Indore Milk Powder Plant: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इंदौर में 76.5 करोड़ रुपये की लागत से बने मिल्क पाउडर प्लांट का वर्चुअल उद्घाटन किया. यह प्लांट प्रतिदिन 30 मीट्रिक टन दूध पाउडर का उत्पादन कर सकता है.
MP कैबिनेट बैठक में प्रदेश में बेसहारा गौवंश की समस्या से निपटने के लिए पशुपालन और डेयरी विभाग के तहत "मध्यप्रदेश राज्य में स्वावलंबी गौशालाओं की स्थापना की नीति : 2025" को मंजूरी दी गई है. अब प्रदेश की गौ-शालाओं को प्रति गोवंश के रख-रखाव (चारे) के लिए हर दिन 40 रुपये दिए जाएंगे. दूध पर बोनस मिलना भी जल्द शुरू हो सकता है. पशुपालन योजना का नाम भी बदल दिया गया है.
मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने मंगलवार को कहा कि राज्य में कृषि उत्पादकता बढ़ाने पर सरकार का ध्यान केंद्रित है और इस दिशा में तेजी से काम किया जा है. राज्यभर में दू्ग्ध समितियां बनाई जाएंगी जो दूध खरीद से लेकर दूध उपकरण या पशु खरीद के लिए किसानों को अनुदान दिलाएंगी.
अगले पांच वर्षों के लिए राष्ट्रीय डेयरी विकास बोर्ड (NDDB) मध्यप्रदेश राज्य कोऑपरेटिव डेयरी फेडरेशन और इससे जुड़े दुग्ध संघों के प्रबंधन और संचालन की जिम्मेदारी संभालेगा. मंगलवार को मंत्रालय में आयोजित हुई पशुपालन एवं डेयरी विभाग की बैठक में इस पर सहमति बनी.
वायरल वीडयो में दिख रहा है कि गायों को जबरदस्ती नदी के अंदर हांका जा रहा है. जिससे गाएं पानी में डूब रही हैं, जबकि कुछ गाय निकलने का प्रयास कर रही है, लेकिन दूसरे छोर पर भी एक व्यक्ति खड़ा है जो गायों को बाहर निकलने नहीं दे रहा है.
गांव में मोटरसाइकिल में सवार होकर दो चोर आए और उन्होंने रास्ते में चर रही एक बकरी को उठाया और बाइक में बैठाकर भागने लगे. जब ग्रामीणों ने चोरों को बकरी को ले जाते हुए देखा तो ग्रामीणों ने चोरों को रोकने का प्रयास किया. पर इसके बावजूद चोर मोटरसाइकल का फायदा उठाते हुए तेजी से गांव से बाहर भागने में सफल रहे.
मध्य प्रदेश सरकार ने राज्य में आवारा पशुओं की समस्या पर नियंत्रण के लिए एक उच्च स्तरीय समिति का गठन किया है. सरकार की तरफ से जारी एक अधिकारिक प्रेस रिलीज में इस बात की जानकारी दी गई है.
राज्य सरकार की इस योजना से पशुपालकों की आय बढ़ाने में मदद मिलेगी. साथ ही सड़क पर घूमने वाली गायों से भी निजात मिलेगी. मुख्यमंत्री मोहन यादव ने कहा कि राज्य में पशुपालकों के हितों को ध्यान में रखते हुए और उनकी आय बढ़ाने के लिए पशुपालन से संबंधित एक नई योजना की शुरुआत की जाएगी.
मध्य प्रदेश के पन्ना जिले में चारा-भूसा की आपूर्ति बनाए रखने व कानून-व्यवस्था को देखते हुए कलेक्टर हरजिंदर सिंह ने दंड प्रक्रिया संहिता 1973 की धारा 144 के तहत प्रतिबंधात्मक आदेश जारी कर दिए हैं. जिसके तहत तत्काल प्रभाव से आगामी आदेश तक पशु चारे को जिले के बाहर निर्यात पर प्रतिबंध लगाया गया है.
कड़कनाथ मुर्गा मध्य प्रदेश के झाबुआ का ब्रीड है. इसलिए भारत सरकार ने इसे झाबुआ का कड़कनाथ नाम से जीआई टैग दिया है. कड़कनाथ मुर्गे की सबसे बड़ी खासियत है कि इसके मांस, खून और पंख का कलर भी काला ही होता है. साथ ही इसकी हड्डी भी काली होती है. इसमें आयरन और प्रोटीन देसी मुर्गे के मुकाबले ज्यादा होता है.
विधानसभा चुनाव में सियासत और उससे जुड़े लोग चुनाव अभियान में शिरकत करने झाबुआ आते हैं. चूंकि झाबुआ का कड़कनाथ विश्व प्रसिद्ध है, लिहाजा झाबुआ के कड़कनाथ मुर्गे को खाने की इच्छा इसकी मांग और कीमत बढ़ा देती है. इसलिए मांसाहारी लोग झाबुआ आने पर इसे खाने की इच्छा रखते हैं.
मध्य प्रदेश में डेयरी किसान सहकारिता के मॉडल को अपना कर मिल्क प्रोडक्ट के कारोबार का दायरा निरंतर व्यापक बना रहे हैं. इस काम में राज्य की सहकारी दुग्ध संघ इकाइयां डेयरी किसानों को लाभांश में हिस्सेदारी देकर इस क्षेत्र से जुड़ने में मदद कर रही हैं. इस कड़ी में इंदौर दुग्ध संघ ने भी डेयरी किसानों से जुड़कर मिल्क पाउडर की उत्पादन क्षमता को बढ़ाने का फैसला किया है.
भोपाल बकरों की बिक्री के लिए जाना जाता है क्योंकि यहां हर साल बकरीद पर बड़ी संख्या में बकरों की खरीद-फरोख्त होती है. इन बकरों का जैसा वजन और रंग-रूप होता है, वैसा ही दाम भी लगता है. इस बार किंग बकरे की कीमत 15 लाख रुपये रखी गई है.
जिस गाय ने इस बछड़े को जन्म दिया, वह गाय स्वस्थ है लेकिन बछड़ा जन्म के करीब आधा घंटा बाद खत्म हो गया. इस पूरी घटना को कुछ जानकार रिसर्च का विषय बता रहे हैं. शेर के आकार वाले मृत बछड़े को गोरखा गांव के दूरदराज के लोग बड़ी संख्या में देखने आ रहे हैं.
निमाड़ी नस्ल के बैलों की दांत देख कर उनकी पहचान होती है. इसी आधार पर इन बैलों की कीमत भी तय होती है. खरगोन के पशु मेले (khargone pashu mela) में स्थानीय ग्रामीणों के साथ दूर-दूर से खरीदार और विक्रेता आते हैं. यहां लोग अपनी जेब और जरूरत के हिसाब से पशुओं की खरीद करते हैं.
मध्य प्रदेश के शिवपुरी में एक साथ कई सूअरों को मार देने का आदेश जारी हुआ है. आइए जानते हैं आखिर क्यों सूअरों को मारने के पीछे की वजह क्या है.
मध्य प्रदेश सरकार किसानों की स्थिति सुधारने के लिए बकरी पालन को बढ़ावा दे रही है. इसके तहत बकरियों की नस्ल में सुधार करने के लिए प्रदेश सरकार ने नर बकरा प्रदाय योजना की शुरुआत की है.
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