मध्य प्रदेश में आवारा पशुओं की समस्या (सांकेतिक तस्वीर)मध्य प्रदेश में सड़कों पर खुला घूमने वाले आवारा पशुओं से अब राज्य के लोगों को राहत मिलने वाली है. मध्य प्रदेश सरकार ने राज्य में आवारा पशुओं की समस्या पर नियंत्रण के लिए एक उच्च स्तरीय समिति का गठन किया है. सरकार की तरफ से जारी एक अधिकारिक प्रेस रिलीज में इस बात की जानकारी दी गई है. प्रेस रिलीज में कहा गया है कि राज्य सरकार राज्य की सभी प्रमुख सड़कों पर 15 दिवसीय विशेष अभियान चलाएगी. इस दौरान आवारा पशुओं पर नियंत्रण के लिए विशेष कार्रवाई की जाएगी. विशेष अभियान के तहत आवारा पशुओं पर नियंत्रण के लिए प्राप्त सुझावों को भी शामिल किया जाएगा.
इस गंभीर समस्या से निपटने के लिए एक समिति गठित की गई है. विज्ञप्ति में कहा गया है कि इसकी अध्यक्षता गृह विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव करेंगे इसके साथ ही अन्य वरिष्ठ अधिकारी इसके सदस्य होंगे. सरकार ने इससे पहले सभी जिला कलेक्टरों को प्रमुख सड़कों पर आवारा पशुओं पर नियंत्रण के निर्देश जारी किए थे. पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग के एसीएस और पीडब्ल्यूडी, पशुपालन एवं डेयरी विभागों के प्रमुख सचिवों को समिति का सदस्य बनाया गया है. विज्ञप्ति में कहा गया है कि शहरी आवास एवं विकास विभाग के प्रमुख सचिव समिति के सदस्य सचिव होंगे.
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बता दे की प्रदेश में सड़कों पर घूमने वाले आवारा पशुओं की समस्या से निपटने के लिए सरकार ने सख्त कदम उठाए जाने के निर्देश दिए थे. इसी निर्देश के तहत राज्य में उच्च स्तरीय समिति का गठन किया गया है. आवारा पशुओं पर प्रभावी रूप से नियंत्रण करने के लिए नगरीय विकास एवं आवास विभाग के प्रमुख सचिव ने निर्देश दिया था कि राज्य में आवारा पशुओं का नियंत्रण नियम 2023 को प्रभावी ढंग से लागू किया जाए. साथ ही यह भी सुनिश्चित किया जाए की कोई भी आवारा पशु किसी भी सार्वजनिक जगह में घूमते हुए नहीं पाया जाए.
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गौरतलब है कि आवारा पशुओं पर नियंत्रण करने के लिए राज्य सरकार ने गौशालाओं को दिए जाने वाले अनुदान को दोगुना कर दिया है. साथ ही उन्होंने निर्देश दिया था कि वो गौशाला की क्षमता के अनुसार की गौवंश का पालन कर और यह सुनिश्चित करें की आवारा पशु सड़कों पर घूमते हुए नहीं दिखाई दें. पशुपालन विभाग के मंत्री ने भी सभी जिला के कलेक्टरों को यह निर्देश दिया था कि वो आवारा पशुओं को नेशनल और स्टेट हाईवे को पूरी सख्ती से हटाएं. बता दें की प्रदेश में 1289 गौशालाएं हैं जिनका संचालन सीएम गौ सेवा योजना के तहत किया जाता है. इन गौशालाओं में सवा लाख से ज्यादा पशु मौजूद हैं.
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