पटना के दशरथ मांझी सभागार में आयोजित राष्ट्रीय पशु चिकित्सा विज्ञान अकादमी के 23वें दीक्षांत समारोह में विकसित भारत 2047 के लिए पशुधन और प्रोटीन उत्पादन पर हुआ मंथन.
मादा पशुओं को संक्रामक गर्भपात रोग से बचाने के लिए बिहार सरकार ने ब्रुसेलोसिस टीकाकरण अभियान शुरू किया है. 19 सितंबर से चलाए जा रहे इस अभियान के तहत 4 से 8 माह की पाड़ी और बाछी का निशुल्क टीकाकरण किया जा रहा है.
बिहार सरकार दक्षिण बिहार के किसानों की झोली में पानी से सोना उगलने का मौका डाल रही है. मुख्यमंत्री जलाशय मात्स्यिकी विकास योजना के तहत जलाशयों में संचयन आधारित मत्स्य प्रग्रहण और केज आधारित मछली पालन को बढ़ावा देने के लिए सरकार 60 से 80 प्रतिशत तक का अनुदान मुहैया करा रही है.
वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से बिहार के 200 से अधिक मछली पालकों से भारत सरकार के मत्स्य पालन विभाग के सचिव ने की बात. बिहार के मत्स्य क्षेत्र की चुनौतियों और उनके समाधान की दिशा में हुई बात. केंद्रीय सचिव ने कहा कि भारत सरकार की योजनाओं का व्यापक स्तर पर प्रचार-प्रसार किया जाना जरूरी.
लंपी स्किन डिजीज प्रभावित इलाकों में विशेष कैंप के जरिए इलाज मुहैया करा रहा है. मुजफ्फरपुर में लंपी बीमारी के प्रकोप ने आधा दर्जन प्रखंडों को गंभीर रूप से प्रभावित किया है. जिसके कारण कई गायों और बछड़ों की मौत हो चुकी है.
बिहार सरकार की ओर से मत्स्य क्षेत्र को डिजिटल रूप देने के लिए ‘नेशनल फिशरीज डिजिटल प्लेटफॉर्म’ (एनएफडीपी) शुरू किया गया है. इस प्लेटफॉर्म से क्षेत्र के असंगठित मत्स्य किसानों को एक पहचान मिलेगी और उन्हें सरकारी योजनाओं का डायरेक्ट लाभ मिल सकेगा.
देसी मछली पालन और हैचरी को लेकर बिहार सरकार दे रही 60 प्रतिशत तक अनुदान. इच्छुक आवेदक 31 अगस्त तक कर सकते हैं आवेदन. बिहार सरकार प्रदेश में देसी मछली पालन को बढ़ावा दे रही है. इसके अंतर्गत मछली पालकों को प्रोत्साहित किया जा रहा है.
बिहार पशु एवं मत्स्य संसाधान विभाग द्वारा एक साल के भीतर 45 लाख से अधिक पशुओं का हुआ इलाज. वहीं, जहां 2005 तक राज्य में केवल 814 पशु चिकित्सालय थे अब 1,135 हो गए हैं. इससे पशुपालन के क्षेत्र में किसानों को बहुत अधिक मदद मिल रही है.
बिहार में मछली पालन से जुड़े किसानों के लिए सुनहरा मौका. मुख्यमंत्री तालाब मात्स्यिकी विकास योजना के तहत तालाब की खुदाई से लेकर मत्स्य बीज हैचरी के लिए 70 प्रतिशत तक मिल रहा है अनुदान.
Mangur Fish: फिशरीज कॉलेज किशनगंज मछली के क्षेत्र में कर रहा कई काम. उसकी एक खोज में पाया गया है कि मांगुर मछली के जीन से दूसरी मछलियां को गर्मी सहन करने में काबिलियत आ सकती है. अब इस शोध को आगे बढ़ाया जा रहा है ताकि बड़ा रिजल्ट हासिल किया जा सके.
बिहार पशु चिकित्सा महाविद्यालय, पटना ने बुधवार को हर्षोल्लास के साथ अपना 98वां स्थापना दिवस मनाया. बिहार पशु विज्ञान विश्वविद्यालय(बासु)के कुलपति, डॉ. इन्द्रजीत सिंह ने घोषणा की कि विश्वविद्यालय जल्द ही "कैप्सूल कोर्स" शुरू करेगा, जिससे फील्ड में कार्यरत लोग नवीनतम तकनीकों को सीखकर लाभान्वित हो सकेंगे.
डेयरी मवेशियों का अधिकतम मूल्य 60,000 रुपये निर्धारित किया गया है. कुल बीमा प्रीमियम इस मूल्य का 3.5 परसेंट है, जो 2,100 रुपये आता है. इसमें से सरकार 1,575 रुपये की सब्सिडी देती है, जबकि किसान 525 रुपये का भुगतान करता है. इस तरह बहुत कम पैसे में किसान अपने पशुओं का बीमा करा सकते हैं.
बिहार सरकार बकरी पालन के क्षेत्र में गोट फेडरेशन, सेंटर ऑफ एक्सीलेंस, और पशु हाट जैसी योजनाओं को शुरू करने जा रही है.वहीं, बकरियों की नस्ल सुधारने को लेकर 'गोट सीमेन स्टेशन' खोलने की लेकर सरकार की मिली मंजूरी.
सूअरों को क्लासिकल स्वाइन फीवर जैसी घातक बीमारी से बचाने के लिए पशुपालन विभाग द्वारा निःशुल्क टीकाकरण की सुविधा शुरू की गई है. इस अभियान के तहत राज्य के सभी 38 जिलों में एक साथ टीकाकरण अभियान शुरू किया जा रहा है.
पटना के कई युवा वेटनरी के क्षेत्र में पैरा-वेटनरियन बनना चाहते हैं, लेकिन पटना में इस तरह के कोर्स उपलब्ध न होने के कारण उन्हें दूसरे जिलों और राज्यों का रुख करना पड़ता है. अब ऐसे छात्रों के लिए एक अच्छी खबर है. बिहार पशु विज्ञान विश्वविद्यालय पहली बार पैरा-वेटनरियन के लिए डिप्लोमा डिग्री देने की तैयारी कर रहा है. इसके लिए विश्वविद्यालय ने राज्य सरकार को प्रस्ताव भेज दिया है.
अब चिकन की दुकान पर उपलब्ध मुर्गियों की पूरी जानकारी भी उपभोक्ता अपने मोबाइल पर आसानी से देख सकेंगे. मुर्गियों के खान-पान, रखरखाव, उनसे जुड़ी बीमारियों सहित वे किस पोल्ट्री फार्म की हैं- इस तरह की पूरी जानकारी मात्र एक स्कैन के जरिए हासिल की जा सकती है. जानिए इस ऐप का क्या नाम है और यह कैसी काम करती है.
पटना स्थित आईसीएआर पूर्वी परिसर में बर्ड फ्लू का मामला सामने आया है, जिसके बाद संस्थान ने करीब 200 मुर्गियों को मार दिया है. वहीं, बिहार पशु विज्ञान विश्वविद्यालय भी मुर्गियों को मारने की तैयारी कर रहा है.
बिहार में पशुपालन को बढ़ावा देने के लिए कई योजनाएं चलाई जा रही हैं. इसी क्रम में भेड़ बकरी पालन को भी राज्य सरकार प्रोत्साहन दे रही है. ऐसे में बिहार में किन नस्लों की बकरी पालकर अच्छा मुनाफा कमाया जा सकता है. यहां जानिए...
भागलपुर जिले के नारायणपुर प्रखंड के विशनपुर गांव की रहने वाली वंदना कुमारी कहती हैं कि साल 2018 से पहले घर के कामकाज के साथ वह जैविक खेती करती थीं. लेकिन खेती में ज्यादा कमाई नहीं थी. तब उन्होंने बकरी पालन की ट्रेनिंग ली और 2 बकरियों के साथ इसका कारोबार शुरू कर दिया. आज इनके पास 60 बकरियां हैं.
बकरी पालन गरीबों के लिए मुसीबत के समय में पैसा निकालने वाला एटीएम मशीन बन गया है. भागलपुर जिले के निशिकांत सिंह बकरी पालन से सालाना साढ़े तीन लाख रुपये की कमाई कर रहे हैं. कोरोना काल के समय किराने की दुकान बंद होने पर शुरू किया था बकरी पालन.
किसानों के लिए खेती के अलावा आय का दूसरा साधन पशुपालन ही होता है. बिहार में भी छोटे और सीमांत किसानों के लिए बकरी पालन ही आय का जरिया है. ऐसे में बकरी पालन से जुड़ी इन बातों को जान लेना चाहिए, ताकि व्यवसाय में नुकसान न हो.
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