
बकरी पालन से बिहार का किसान कर रहा लाखों में कमाई.कोरोना के दौरान मानव जीवन उस दौर से गुजर रहा था, जहां इंसान के लिए अपनी जिन्दगी को बचाना ही एक बहुत बड़ा चैलेंज बन चुका था. उस दौर में सारे रोजगार चौपट हो चुके थे. हालांकि, उस कठिन परिस्थिति में भी कई लोगों ने नये रोजगार की ओर कदम बढ़ाया और अपनी खुद की अलग पहचान बनाई. एक ऐसे ही किसान निशिकांत सिंह हैं. उनकी भागलपुर शहर में पहले एक किराने की दुकान थी. लेकिन कोरोना काल में उनकी दुकान बंद हो गई. ऐसे में वे बकरी पालन करने लगे. अब वे बकरी पालन से अच्छी कमाई कर रहे हैं. इनके पास अभी 100 से अधिक बकरियां हैं. वहीं, बकरी पालन के लिए उन्हें राज्यपाल से सम्मान भी मिल चुका है.

बिहार राज्य के भागलपुर शहर के रहने वाले हैं निशिकांत सिंह. पिछले करीब पांच साल से बकरी पालन कर रहे हैं. वहीं हाल के समय में इनके पास करीब 100 से अधिक बकरियां हैं. इस कारोबार से सालाना साढ़े तीन लाख रुपये से अधिक की कमाई कर रहे हैं. किसान तक के साथ बकरी पालन को लेकर अपना अनुभव साझा करते हुए कहते हैं कि बकरी पालन कम खर्च में किसान को अधिक मुनाफा देने वाला व्यवसाय है.
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निशिकांत सिंह 2019 से पहले भागलपुर शहर में एक छोटी सी किराना की दुकान चलाते थे. इसी के सहारे अपने परिवार का पालन पोषण करते थे. लेकिन कोरोना काल आने के साथ ही इनके कारोबार पर भी मुसीबतों का पहाड़ गिरा. जिसके बाद किराने की दुकान बंद हो गई. उसके बाद बकरी पालन की ट्रेनिंग ली. फिर बकरी पालन का कारोबार शुरू किया. आज उनके पास करीब 100 से अधिक बकरियां हैं. आगे सिंह बताते हैं कि वह बकरी पालन से सालाना साढ़े तीन लाख रुपये के आसपास की कमाई कर लेते हैं, जो उनके किराना स्टोर की दुकान की कमाई से करीब दोगुना से अधिक है.
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बकरी पालन के साथ लंबे समय से जुड़ने के क्रम में अपने अनुभव को साझा करते हुए सिंह कहते हैं कि कुछ लोग बकरियों को मिनरल वॉटर पिलाते है. वहीं ग्रामीण क्षेत्र के लोग जो खुद पानी पीते है, उसे पिलाते है. लेकिन मैंने पिछले पांच साल के दौरान जो अनुभव किया, उसमें बकरियों को मोटा पानी पिलाना चाहिए. इससे बकरियां कम समय में अधिक मजबूत होती हैं. ऐसे भी मोटा पानी का टिडियस साधारण पानी से थोड़ा ज्यादा होता है. बकरी पालन में बेहतर कार्य को लेकर बीते दिनों इन्हें बिहार के राज्यपाल राजेंद्र विश्वनाथ आर्लेकर द्वारा सम्मानित किया गया. वे बताते हैं कि किराने की दुकान से राज्यपाल के हाथों सम्मानित होने का मौक़ा कभी नहीं मिलता.
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