
महाराष्ट्र का मराठवाड़ा क्षेत्र पिछले दो दिनों में बेमौसम बारिश से बुरी तरह प्रभावित हुआ है. मराठवाड़ा में कुल 47 हजार 109 हेक्टेयर क्षेत्र में फसलों के खराब होने की बात सामने आई है. जिसमें 24 हजार 855 हेक्टेयर में बागवानी जबकि 22 हजार 97 हेक्टेयर में रबी फसलों का नुकसान हुआ है. सबसे ज्यादा नुकसान छत्रपति संभाजी नगर जिले के किसानों को हुआ है. इस क्षेत्र में 26 और 27 नवंबर से बारिश हो रही है. बेमौसम और अतिवृष्टि से 598 गांव प्रभावित हुए हैं. जिसमें से अकेले छत्रपति संभाजीनगर के 509 और परभणी के 75 गांव शामिल हैं.
बताया गया है कि बिजली गिरने से 180 जानवरों की जान गई है. जिसमें छत्रपति संभाजीनगर के 69, जालना के 50, परभणी के 57, हिंगोली के तीन और नांदेड़ के चार पशु शामिल हैं. यहां कुल कुल 46 मकान और गौशाला ढह गए हैं. जिसमें छत्रपति संभाजीनगर में छह, जालना में चार, परभणी में 32, हिंगोली में तीन और नांदेड का एक मामला शामिल है.
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भारी बारिश की वजह से हिंगोली में ज्वार की फसल को काफी क्षति पहुंची है. जिले में आज लगातार दूसरे दिन बेमौसम बारिश हुई है. इससे जनजीवन अस्त व्यस्त है. हिंगोली स्थित वाई गोरक्षनाथ के किसान वेंकटेश कदम के ढाई एकड़ खेत में लगी ज्वार की फसल उखड़ गयी है. उन्होंने इसकी बुवाई मवेशियों के लिए साल भर के भोजन और चारे के लिए की थी. ऐसे बहुत सारे किसान हैं जिनकी मेहनत पर बारिश ने पानी फेर दिया है. इसलिए, किसानों के सामने यह सवाल है कि साल भर क्या खाएं और जानवरों को क्या खिलाएं. ऐसी ही स्थिति जिले के अधिकांश स्थानों पर देखने को मिल रही है.
परभणी जिले में पिछले दो दिनों से जारी भारी बेमौसम बारिश पर ब्रेक लगता नहीं दिख रहा है. इस बारिश से खेती को काफी नुकसान हो रहा है. खेत में खड़ा ज्वार आड़ा हो गया है, कूटी हुई कपास भीग गयी है. कई स्थानों पर बगीचों और अन्य फसलों को भी बड़े पैमाने पर नुकसान हुआ. कलेक्टर ने स्वयं नुकसान का निरीक्षण किया. हालांकि अभी नुकसान का आकलन शुरू नहीं हुआ है. पहले खरीफ़ सीजन में बारिश नहीं होने से नुकसान हुआ और अब रबी में बेमौसम बारिश से नुकसान हो रहा है. संकट में फंसे किसानों ने सरकार से तत्काल मदद की मांग शुरू कर दी है. नांदेड और लातूर क्षेत्र में भी बड़े पैमाने पर फसलों को क्षति हुई है.
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