लखीमपुर से सहारनपुर तक गूंजा किसान कारवां, यूपी में बदलाव की नई कहानी बना किसान कारवां

लखीमपुर से सहारनपुर तक गूंजा किसान कारवां, यूपी में बदलाव की नई कहानी बना किसान कारवां

उत्तर प्रदेश सरकार और India Today Group के संयुक्त प्रयास से आयोजित “किसान तक का किसान कारवां” किसानों के लिए जागरूकता और आधुनिक खेती का बड़ा मंच बनकर उभरा. 29 दिसंबर 2025 को अमरोहा से शुरू हुआ यह कारवां 4 मई 2026 को गौतम बुद्ध नगर पहुंचा. अब तक यह 68 जिलों में 4000 किलोमीटर से ज्यादा की यात्रा कर 55 हजार से अधिक किसानों तक पहुंच चुका है. कहानी कारवां की’ सीरीज में आज पढ़िए वेस्टर्न प्लेन जोन की खेती, किसानों के अनुभव और सरकारी योजनाओं के असर की कहानी.

धर्मेंद्र सिंह
  • Noida ,
  • May 17, 2026,
  • Updated May 17, 2026, 10:53 AM IST

उत्तर प्रदेश सरकार और India Today Group के साझा प्रयास से आयोजित “किसान तक का किसान कारवां” प्रदेश के किसानों के लिए जागरूकता, तकनीक और तरक्की का बड़ा मंच बनकर उभरा.

 29 दिसंबर 2025 को अमरोहा जनपद से शुरू हुआ यह कारवां 4 मई 2026 को गौतम बुद्ध नगर में पहुंचकर अपने अंतिम चरण में दाखिल हुआ. विंध्याचल जोन को पार करने के बाद किसान कारवां अब नॉर्थ वेस्ट तराई जोन में पहुंचा, जहां प्रदेश के सबसे उन्नत कृषि जिलों में शामिल लखीमपुर खीरी, बहराइच, शाहजहांपुर, बरेली, पीलीभीत, रामपुर, मुरादाबाद, बिजनौर, मुजफ्फरनगर और सहारनपुर जैसे जिले शामिल रहे.

किसान कारवां अब तक प्रदेश के 68 जिलों में 4000 किलोमीटर से अधिक की यात्रा पूरी कर चुका है और 55 हजार से ज्यादा किसानों तक सीधे पहुंच बना चुका है. इस यात्रा के दौरान किसानों को खेती, पशुपालन, बागवानी, मत्स्य पालन और सरकारी योजनाओं से जुड़ी ऐसी जानकारियां मिलीं, जिनसे वे पहले पूरी तरह अनजान थे.

किसान कारवां से किसानों को मिला तरक्की का मंत्र

किसान कारवां केवल एक कार्यक्रम नहीं बल्कि किसानों के लिए ज्ञान और समाधान का चलता-फिरता मंच बन गया. गांव-गांव पहुंचकर कृषि वैज्ञानिकों, पशुपालन विशेषज्ञों और विभागीय अधिकारियों ने किसानों को आधुनिक खेती और आय बढ़ाने के नए तरीके बताए.

कई जिलों में किसानों ने पहली बार नैनो यूरिया और लिक्विड डीएपी के बारे में सुना. वैज्ञानिकों ने किसानों को संतुलित उर्वरकों के सही उपयोग की जानकारी दी और समझाया कि अधिक उर्वरक का प्रयोग हमेशा अधिक उत्पादन नहीं देता बल्कि इससे मिट्टी की सेहत खराब होती है.

इंटीग्रेटेड फार्मिंग से बढ़ेगी किसानों की आय

नॉर्थ वेस्ट तराई जोन में किसान कारवां के दौरान किसानों को इंटीग्रेटेड फार्मिंग मॉडल के बारे में विस्तार से जानकारी दी गई. विशेषज्ञों ने बताया कि केवल पारंपरिक खेती पर निर्भर रहने की बजाय किसान अगर खेती के साथ मुर्गी पालन, बकरी पालन, मछली पालन और बागवानी को जोड़ते हैं तो उन्हें सालभर नियमित आमदनी मिल सकती है.किसानों की आय को दोगुना से भी ज्यादा बढ़ाने में मददगार साबित हो रहा है. कई किसानों ने मंच पर आकर अपनी सफलता की कहानियां भी साझा कीं.

संतुलित उर्वरक और मिट्टी की जांच पर दिया गया जोर

किसान कारवां के मंच से वैज्ञानिकों ने किसानों के बीच फैले उस मिथक को तोड़ने की कोशिश की जिसमें किसान मानते हैं कि ज्यादा उर्वरक डालने से अधिक उत्पादन होगा.

केवीके बहराइच के वैज्ञानिक डॉ. शैलेंद्र सिंह ने किसानों को सलाह दी कि वे खरीफ फसल से पहले खेतों में ढैंचा और मूंग की हरी खाद का प्रयोग करें. इससे मिट्टी में जैविक तत्व बढ़ेंगे और फसल उत्पादन में 15 से 20 प्रतिशत तक बढ़ोतरी हो सकती है.उन्होंने किसानों को बीज शोधन के महत्व के बारे में भी बताया और कहा कि बुवाई से पहले बीज उपचार करने से फसलों में रोग कम लगते हैं और उत्पादन बेहतर होता है.

गन्ने की 0238 किस्म से दूरी बनाने की सलाह

किसान कारवां के दौरान गन्ना वैज्ञानिकों ने किसानों को गन्ने की उन्नत किस्मों की जानकारी दी, वहीं 0238 वैरायटी को लेकर चेतावनी भी दी.

वैज्ञानिकों ने बताया कि यह किस्म अब रेड रॉट बीमारी से प्रभावित हो चुकी है, लेकिन इसके बावजूद पश्चिमी उत्तर प्रदेश के कई जिलों जैसे बुलंदशहर, बागपत और हापुड़ में किसान अभी भी इसकी खेती कर रहे हैं.

गन्ना शोध संस्थान शाहजहांपुर के वैज्ञानिकों ने किसानों को सलाह दी कि वे इस किस्म की खेती से बचें, क्योंकि इससे फसल और आमदनी दोनों प्रभावित हो सकते हैं.

कोल्ड स्टोरेज पर मिलेगा 35 प्रतिशत अनुदान

उद्यान विभाग ने किसान कारवां के मंच से किसानों को विभागीय योजनाओं की जानकारी दी. किसानों को बताया गया कि ड्रिप और स्प्रिंकलर सिंचाई यंत्रों पर 90 प्रतिशत तक अनुदान दिया जा रहा है.

शाहजहांपुर के जिला उद्यान अधिकारी पुनीत कुमार पाठक ने किसानों को बताया कि कोल्ड स्टोरेज लगाने पर सरकार की ओर से 35 प्रतिशत तक अनुदान दिया जा रहा है. किसान कारवां के माध्यम से बड़ी संख्या में किसानों ने इन योजनाओं में रुचि दिखाई.

आईवीएफ तकनीक से सुधर रही देसी नस्ल

बरेली स्थित भारतीय पशु चिकित्सा अनुसंधान संस्थान के वैज्ञानिक डॉ. जे. के. प्रसाद ने किसानों को आईवीएफ तकनीक और सेक्स सॉर्टेड सीमेन के बारे में जानकारी दी.

उन्होंने बताया कि इस तकनीक के माध्यम से देसी गायों की नस्ल में सुधार किया जा रहा है, जिससे दूध उत्पादन बढ़ रहा है.वैज्ञानिकों ने बताया कि सेक्स सॉर्टेड सीमेन की मदद से किसानों को अधिक संख्या में बछिया प्राप्त करने में मदद मिल रही है.कई किसान पहली बार इस तकनीक के बारे में सुन रहे थे और उन्होंने मंच से वैज्ञानिकों से सवाल भी पूछे.

सुअर पालन बना किसानों की अतिरिक्त आय का जरिया

भारतीय पशु चिकित्सा अनुसंधान संस्थान, बरेली के वैज्ञानिक डॉ. अमित कुमार ने किसानों को सुअर पालन की उन्नत तकनीकों के बारे में जानकारी दी.

उन्होंने बताया कि कुछ उन्नत नस्लों के सुअरों का पालन करके किसान एक वर्ष के भीतर दोगुना तक मुनाफा कमा सकते हैं. सरकार की ओर से किसानों को प्रशिक्षण और अनुदान दोनों उपलब्ध कराए जा रहे हैं.

पशु बीमा और एंबुलेंस सेवा की जानकारी

किसान कारवां के मंच से पशुपालन विभाग ने किसानों को पशु बीमा योजना के बारे में भी जानकारी दी. अधिकारियों ने बताया कि 50 से 60 हजार रुपये तक के पशु का बीमा कराने के लिए किसानों को केवल लगभग 500 रुपये का अंशदान देना होता है.

यदि किसी कारण पशु की मृत्यु हो जाती है तो सरकार बीमा राशि उपलब्ध कराती है. इसके अलावा पशुओं के लिए 1962 एंबुलेंस सेवा भी उपलब्ध कराई जा रही है, जिससे बीमार पशुओं का समय पर इलाज संभव हो पा रहा है.

फेरोमेन ट्रैप से गन्ने की फसल को सुरक्षा

पीलीभीत में जिला गन्ना अधिकारी ने किसानों को गन्ने की फसल में लगने वाली सफेद तितली बीमारी से बचाव के लिए फेरोमेन ट्रैप के उपयोग की जानकारी दी.

अधिकारियों ने बताया कि यह ट्रैप बेहद सस्ता है और किसान इसे घर पर भी तैयार कर सकते हैं. किसानों को फसल सुरक्षा के आधुनिक तरीकों की जानकारी देकर उन्हें रासायनिक दवाओं पर निर्भरता कम करने की सलाह दी गई.

महिलाओं के लिए प्रेरणा बनी सभावरी 

किसान कारवां की यात्रा में पुरुष किसान ही नहीं बल्कि महिलाओं ने भी बढ़-कर कर हिस्सा लिया. सहारनपुर जनपद में 20 साल की एक युवती से हमारी मुलाकात हुई जो आज जैविक खेती में बड़ा काम कर रही है. सभावरी चौहान 9 साल की उम्र में ही खेती में उतर चुकी थी. आज जनपद के 200 एकड़ से ज्यादा क्षेत्रफल में कॉन्ट्रैक्ट फार्मिंग कर रही है. आज वह दूसरी महिलाओं के लिए रोल मॉडल बन चुकी है. उन्होंने भी किसान कारवां के मंच से अपने अनुभवों को साझा किया और महिलाओं को खेती में कुछ अलग करने के लिए प्रेरित किया.

किसानों और वैज्ञानिकों के बीच बना संवाद का मजबूत मंच

किसान कारवां किसानों और वैज्ञानिकों के बीच सीधा संवाद स्थापित करने का बड़ा माध्यम बना.गांवों में पहुंचे कृषि वैज्ञानिकों और अधिकारियों ने किसानों की समस्याएं सुनीं और मौके पर समाधान भी बताए.

 

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