
एक जिला एक उत्पाद (ओडीओपी) योजना अब उत्तर प्रदेश के पारंपरिक उत्पादों को वैश्विक पहचान दिलाने का मजबूत माध्यम बनती जा रही है. इसी कड़ी में बलिया का मशहूर चने का सत्तू अब देश की सीमाएं पार कर यूएसए, चीन, नेपाल और दुबई समेत कई खाड़ी देशों तक अपनी पहचान बना चुका है. अब बलिया के सत्तू से तैयार होने वाले लड्डू को भी अंतर्राष्ट्रीय बाजार में भेजने की तैयारी पूरी कर ली गई है. सबसे खास बात यह है कि इसके जरिए 700 से अधिक महिलाओं को रोजगार से जोड़ा गया है.
योगी सरकार की पहल से बलिया का यह पारंपरिक और पौष्टिक उत्पाद आज ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म पर तेजी से लोकप्रिय हो रहा है। अमेजन, फ्लिपकार्ट और जियो मार्ट जैसे ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर इसकी मांग लगातार बढ़ रही है. तमिलनाडु, कर्नाटक, महाराष्ट्र और मध्यप्रदेश समेत कई राज्यों के लोग अब यूपी के इस उत्पाद को पसंद कर रहे हैं.
बलिया का सत्तू जब से ओडीओपी योजना में शामिल हुआ है, तब से इसका व्यापार कई गुना बढ़ गया है. प्रदेश के विभिन्न जिलों के साथ ही महाराष्ट्र और दक्षिण भारत के कई राज्यों में इसकी मांग तेजी से बढ़ी है. सत्तू अब केवल गांवों तक सीमित नहीं रह गया, बल्कि स्वस्थ जीवनशैली अपनाने वाले शहरी लोगों की भी पहली पसंद बनता जा रहा है.
निधि उद्योग की संस्थापक नीति अग्रवाल ने बताया कि बलिया के सत्तू से बनने वाले लड्डू को अमेरिका और खाड़ी देशों में भेजने की पूरी तैयारी कर ली गई है. उन्होंने कहा कि आने वाले समय में बलिया का यह पारंपरिक स्वाद अंतर्राष्ट्रीय बाजार में नई पहचान बनाएगा. वहीं, बलिया में सत्तू का कारोबार कई गुना बढ़ा है. ओडीओपी में शामिल होने के बाद इसकी मांग लगातार बढ़ती जा रही है.
व्यवस्थापक सौरभ अग्रवाल ने बताया कि सत्तू उत्पादन और पैकेजिंग के इस बढ़ते कारोबार ने महिलाओं को बड़े स्तर पर रोजगार दिया है. करीब 700 से अधिक महिलाएं इस कार्य से जुड़कर आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बन रहीं हैं. वहीं, द्वाबा क्षेत्र के किसानों का चना हाथों हाथ खरीदा जा रहा है, जिससे उन्हें फसल का वाजिब दाम मिल रहा है.
उन्होंने बताया कि जी आई टैग मिलने के बाद सत्तू को एक अलग पहचान मिलेगी. साथ ही नकली उत्पादों पर रोक लगेगी और देश विदेश में ब्रांडिंग मजबूत होगी. इसके अलावा किसानों को ज्यादा दाम मिल सकेगा और एक्सपोर्ट के मौके और बढ़ जाएंगे.
जिलाधिकारी मंगला प्रसाद सिंह ने बताया कि एक जिला एक उत्पाद योजना का व्यापक असर देखने को मिल रहा है. इससे न सिर्फ स्थानीय उत्पादों को पहचान मिल रही है, बल्कि रोजगार के अवसर भी तेजी से बढ़ रहे हैं. उन्होंने कहा कि बलिया की सांस्कृतिक पहचान अब देशभर में फैल रही है. पीढ़ियों से लोकप्रिय सत्तू अब वैश्विक बाजार में चमकने जा रहा है.
मुख्य विकास अधिकारी ओजस्वी राज ने बताया कि भृगु मंदिर के आसपास बड़ी संख्या में सत्तू के स्टॉल लगते हैं. यहां लोग सत्तू को बाबा का प्रसाद मानते हैं. ऐसे में सबसे पहले चने के सत्तू को ब्रांड बनाने की योजना तैयार की गई. सबसे पहले आकर्षक बॉक्स तैयार कर होली, दिवाली समेत विशेष अवसरों पर विशिष्ट लोगों और पुलिस कर्मियों को सत्तू भेंट किया गया, जिससे इसकी व्यापक पहचान बनी.
वहीं, इंडस्ट्रियल एरिया में प्रोसेसिंग यूनिट शुरू होने के बाद एफपीओ बनाकर लोगों और किसानों को जोड़ा गया. वर्तमान में करीब साढ़े छह हजार हेक्टेयर क्षेत्रफल में चने की खेती की जा रही है और किसानों को उपज का वाजिब दाम भी मिल रहा है.
ओडीओपी उत्पाद को लेकर बहुत ही अच्छे परिणाम सामने आ रहे हैं. परिवहन मंत्री दयाशंकर सिंह ने प्रदेश के सभी मंत्रियों और विधायकों को बलिया के सत्तू के पैकेट भी भेजे हैं, ताकि प्रदेश के इस पारंपरिक उत्पाद को व्यापक स्तर पर बढ़ावा मिल सके.
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