उत्तर प्रदेश सरकार ने किसानों की आय बढ़ाने और कृषि क्षेत्र को नई दिशा देने के लिए 4 महत्वपूर्ण MoU किए हैं. मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि किसान को सिर्फ उत्पादक नहीं बल्कि समृद्धि का भागीदार बनाना सरकार का लक्ष्य है. नई पहल के तहत वैज्ञानिक खेती, जलवायु अनुकूल तकनीक और आधुनिक कृषि ज्ञान को किसानों तक पहुंचाया जाएगा.
बांदा सदर से बीजेपी विधायक प्रकाश द्विवेदी ने लघु सिंचाई विभाग की योजनाओं में बड़े पैमाने पर अनियमितताओं का आरोप लगाते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को पत्र लिखा है. विधायक का कहना है कि ब्लास्टिंग कूप, चेकडैम और अन्य सिंचाई परियोजनाओं पर करोड़ों रुपये खर्च दिखाए गए, लेकिन कई काम या तो अधूरे हैं या उनकी क्वालिटी बेहद खराब है. मामले में जांच कर दोषियों पर कार्रवाई और सरकारी पैसे की रिकवरी की मांग की गई है.
उत्तर प्रदेश के बुलंदशहर में एफपीओ के माध्यम से शुरू हुए पायलट प्रोजेक्ट के तहत पशुपालकों से 10 रुपये प्रति लीटर की दर से गोमूत्र खरीदा जा रहा है. 15 गांवों में गोमूत्र डेयरी बना कर रोजाना 500 लीटर जुटाया जा रहा है. इस पहल से ग्रामीण आय, महिला सशक्तीकरण, गो संरक्षण और जैविक खेती को बढ़ावा मिल रहा है.
UP News: इस आर्थिक सहायता का उपयोग फार्म या शेड बनाने, सुअरों की खरीद, उपकरण और दूसरी जरूरी सुविधाओं पर किया जा सकता है. इस योजना का फायदा कई तरह के लोग उठा सकते हैं. इनमें किसान, पशुपालक, स्वयं सहायता समूह, किसान उत्पादक संगठन, स्टार्टअप और नए उद्यमी शामिल हो सकते है.
अमरोहा में 207 करोड़ रुपये से अधिक की 43 विकास परियोजनाओं का उद्घाटन और शिलान्यास करते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि उत्तर प्रदेश चीनी, गन्ना और इथेनॉल उत्पादन में देश का अग्रणी राज्य बन गया है. उन्होंने दावा किया कि सरकार ने किसानों को 3.23 लाख करोड़ रुपये का गन्ना मूल्य भुगतान किया है और गन्ने का मूल्य बढ़ाकर 400 रुपये प्रति क्विंटल कर दिया है. मुख्यमंत्री ने बेहतर इंफ्रास्ट्रक्चर, कानून-व्यवस्था, किसानों की आय और युवाओं के रोजगार को सरकार की प्रमुख उपलब्धियां बताया.
उत्तर प्रदेश सरकार एकीकृत बागवानी विकास मिशन (MIDH) के तहत किसानों को फल, फूल और सब्जियों की आधुनिक खेती के लिए बंपर सब्सिडी दे रही है. साथ ही पॉलीहाउस, हाईटेक नर्सरी, कोल्ड स्टोरेज, जैविक खेती और ड्रैगन फ्रूट की खेती पर अनुदान देकर सरकार किसानों की आय बढ़ाने और आधुनिक खेती को बढ़ावा दे रही है.
भारतीय सब्जी अनुसंधान संस्थान (IIVR), वाराणसी ने किसानों और एफपीओ प्रतिनिधियों के साथ बैठक कर निर्यातोन्मुख सब्जी उत्पादन को बढ़ावा देने की रणनीति पर चर्चा की. विशेषज्ञों ने मिर्च और अन्य सब्जियों के गुणवत्तापूर्ण उत्पादन, सुरक्षित खेती और निर्यात मानकों की जानकारी दी.
वाराणसी में आईसीएआर-भारतीय सब्जी अनुसंधान संस्थान में आयोजित बैठक में कृषि विशेषज्ञों, एफपीओ प्रतिनिधियों और किसानों ने खेत बचाओ अभियान, संतुलित उर्वरक उपयोग और प्राकृतिक खेती पर चर्चा की. गोपाल भाई सुतारिया ने कहा कि गाय आधारित प्राकृतिक खेती अपनाकर ही कृषि का भविष्य सुरक्षित किया जा सकता है.
उत्तर प्रदेश सरकार और India Today Group के संयुक्त प्रयास से 126 दिनों तक चला किसान कारवां 75 जिलों में पहुंचा. 1 लाख से अधिक किसानों ने भाग लिया। कारवां में किसानों को आधुनिक खेती, जैविक खेती, पशुपालन, सिंचाई तकनीक, सह-फसली मॉडल और सरकारी योजनाओं की जानकारी दी गई.
उत्तर प्रदेश सरकार और India Today Group के संयुक्त प्रयास से आयोजित “किसान तक का किसान कारवां” किसानों के लिए जागरूकता और आधुनिक खेती का बड़ा मंच बनकर उभरा. 29 दिसंबर 2025 को अमरोहा से शुरू हुआ यह कारवां 4 मई 2026 को गौतम बुद्ध नगर पहुंचा. अब तक यह 68 जिलों में 4000 किलोमीटर से ज्यादा की यात्रा कर 55 हजार से अधिक किसानों तक पहुंच चुका है. कहानी कारवां की’ सीरीज में आज पढ़िए वेस्टर्न प्लेन जोन की खेती, किसानों के अनुभव और सरकारी योजनाओं के असर की कहानी.
उत्तर प्रदेश सरकार और इंडिया टुडे ग्रुप के संयुक्त प्रयास से आयोजित ‘किसान तक का किसान कारवां’ 75 जिलों तक पहुंचकर किसानों के लिए जानकारी और बदलाव का बड़ा मंच बना.29 दिसंबर 2025 को अमरोहा से शुरू हुई यह यात्रा 4 मई 2026 को गौतमबुद्ध नगर में संपन्न हुई.‘कहानी कारवां की’ सीरीज में आज पढ़िए विंध्याचल जोन की खेती, किसानों के अनुभव और सरकारी योजनाओं के असर की कहानी.
उत्तर प्रदेश सरकार और इंडिया टुडे के संयुक्त प्रयास से आयोजित ‘किसान तक का किसान कारवां’ प्रदेश के सभी 75 जिलों तक पहुंचा. अब शुरू हो रही है खास सीरीज ‘कहानी कारवां की’, जिसमें उत्तर प्रदेश के 9 एग्रोक्लाइमेटिक जोन्स की खेती, किसानों की सफलता, वैज्ञानिकों की सलाह और सरकारी योजनाओं के असर की कहानी दिखाई जाएगी. आज की कड़ी में जानिए North Eastern Plain Zone के किसानों की बदलती तस्वीर, जहां मछली पालन, मखाना, मधुमक्खी पालन और काला नमक धान किसानों की आय बढ़ाने का जरिया बन रहे हैं.
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