
पूरे देश में किसानों की फार्मर आईडी बनाने का काम तेजी से किया जा रहा है. इसी क्रम में बिहार में भी फार्मर रजिस्ट्री के दूसरे चरण की शुरुआत मंगलवार से कर दी गई. राज्य के कृषि मंत्री विजय कुमार सिन्हा ने पटना स्थित कृषि भवन के सभागार से इस अभियान की औपचारिक शुरुआत की. इस मौके पर पटना जिले के फुलवारी शरीफ प्रखंड के किसानों की फार्मर आईडी बनाई गई और पांच किसानों को मौके पर ही फार्मर आईडी वितरित की गई. कृषि विभाग के अनुसार, अब तक राज्य में 47 लाख 85 हजार किसानों की फार्मर आईडी तैयार हो चुकी है.
कृषि मंत्री विजय कुमार सिन्हा ने कहा कि फार्मर आईडी बनाने का यह दूसरा चरण एक मिशन मोड में चलाया जा रहा है. उन्होंने साफ कहा कि “फार्मर रजिस्ट्री केवल एक नंबर नहीं है, बल्कि यह किसान की पहचान है. इससे खाद, बीज, ऋण और फसल सहायता जैसी सभी योजनाओं का लाभ सीधे किसानों के खाते में पहुंचेगा.”
मंत्री ने कहा कि तकनीक के जरिए किसानों को उनकी जमीन और फसल का असली हक मिलेगा. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सोच का हवाला देते हुए उन्होंने कहा कि तकनीक और किसान का मेल ही आत्मनिर्भर ग्रामीण अर्थव्यवस्था की नींव है और फार्मर आईडी इस दिशा में एक बड़ा कदम है.
कृषि मंत्री ने बताया कि बिहार में 4 करोड़ 54 लाख से अधिक जमाबंदी दर्ज हैं. अब तक 88 लाख 40 हजार किसानों का e-KYC पूरा हो चुका है और इनमें से 47 लाख 85 हजार किसानों की फार्मर आईडी बनाई जा चुकी है.
उन्होंने कहा कि पहले राजस्व और भूमि सुधार विभाग में लंबित म्यूटेशन और परिमार्जन जैसे मामलों को पोर्टल के जरिए तेजी से निपटाया गया, जिसका फायदा अब फार्मर रजिस्ट्री के रूप में साफ दिखाई दे रहा है.
मंत्री विजय सिन्हा ने बताया कि पहले चरण में जिन किसानों की फार्मर आईडी बनी है, उनमें PM‑किसान योजना के 23 लाख 79 हजार लाभार्थी शामिल हैं. यानी PM‑किसान से जुड़े करीब 28 प्रतिशत किसानों की फार्मर आईडी तैयार हो चुकी है. इस प्रगति के चलते केंद्र सरकार ने बिहार को 269 करोड़ 88 लाख रुपये की प्रोत्साहन राशि भी दी है.
बिहार के मुख्य सचिव प्रत्यय अमृत ने अधिकारियों को साफ निर्देश दिए कि फार्मर आईडी बनाने में किसी भी तरह की लापरवाही न बरती जाए. उन्होंने कहा कि डिजिटल प्लेटफॉर्म का उद्देश्य पारदर्शिता लाना है, ताकि किसानों को योजनाओं के लिए दफ्तरों के चक्कर न लगाने पड़ें. मुख्य सचिव के अनुसार, फार्मर रजिस्ट्री होने से किसानों की जमीन से जुड़े रिकॉर्ड का परिमार्जन अपने‑आप हो जाएगा, जिससे समय और परेशानी दोनों बचेंगी.
कृषि विभाग के प्रधान सचिव नर्मदेश्वर लाल ने किसानों से अपील की कि वे अपनी फार्मर आईडी जरूर बनवाएं, क्योंकि कृषि विभाग की सभी योजनाओं का लाभ आगे चलकर इसी के जरिए मिलेगा. कुल मिलाकर, फार्मर आईडी से बिहार के किसानों को न सिर्फ सरकारी योजनाओं का फायदा आसानी से मिलेगा, बल्कि खेती से जुड़ी कई परेशानियों से भी राहत मिलने की उम्मीद है.