बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि किसानों के लिए कृषि फीडरों पर सुबह 6 बजे से शाम 6 बजे तक बिना रुकावट बिजली की सप्लाई सुनिश्चित की जाए. मुख्यमंत्री ने पीएम सूर्यघर मुफ्त बिजली योजना को भी पूरे प्रदेश में तेजी से लागू करने की जरूरत पर बल दिया.
बिहार सरकार वित्तीय वर्ष 2026-27 में मत्स्य प्रजाति विविधीकरण योजना के तहत मछली पालन के साथ मोती पालन को बढ़ावा देगी. राज्य में 50 एकड़ क्षेत्र में मोती उत्पादन का लक्ष्य रखा गया है, जिससे करीब 1.2 लाख मोती तैयार होने का अनुमान है. चयन ऑनलाइन आवेदन से होगा और किसानों को 60 प्रतिशत तक अनुदान दिया जाएगा.
बिहार सरकार सूरजमुखी की खेती के साथ मधुमक्खी पालन को जोड़कर किसानों की आय बढ़ाने की दिशा में काम कर रही है. कृषि मंत्री विजय कुमार सिन्हा के अनुसार इस एकीकृत मॉडल से किसानों को तेल और शहद दोनों से आय होगी. बांका, शिवहर और सारण में पायलट क्लस्टर शुरू हो चुके हैं, जहां मधुमक्खियों के परागण से सूरजमुखी की पैदावार और क्वालिटी में भी सुधार देखने को मिल रहा है. उत्पादन के साथ प्रसंस्करण और मूल्य संवर्धन पर भी सरकार विशेष जोर दे रही है.
बिहार सरकार ने भूमि से जुड़े मामलों में बड़ा फैसला लिया है. अब मृत जमाबंदी रैयतों की जमीन का दाखिल-खारिज उनके उत्तराधिकारियों के नाम पर कराने के लिए आवेदन देने की जरूरत नहीं होगी. राजस्व कर्मचारी गांव-गांव जाकर ऐसे मामलों की पहचान करेंगे और स्वतः संज्ञान लेकर नामांतरण की प्रक्रिया शुरू करेंगे. पूरी कार्रवाई बिहारभूमि पोर्टल के माध्यम से ऑनलाइन होगी. सरकार ने अधिकारियों को अभियान मोड में काम करने और लापरवाही पर कार्रवाई के निर्देश दिए हैं.
बिहार सरकार ने विलुप्त होने की कगार पर पहुंच रही देसी मछलियों के संरक्षण और संवर्धन के लिए मत्स्य प्रजाति विविधीकरण योजना शुरू की है. योजना के तहत मछली पालकों को 60 प्रतिशत तक अनुदान मिलेगा. इच्छुक लाभार्थी 31 अगस्त तक ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं.
बिहार सरकार राज्य कोल्ड स्टोरेज योजना के तहत कोल्ड स्टोरेज इकाइयों में सोलर पैनल लगाने पर 50 प्रतिशत तक अनुदान दे रही है. योजना के तहत 50 कोल्ड स्टोरेज को सौर ऊर्जा से संचालित किया जाएगा. सोलर सिस्टम की अधिकतम लागत 35 लाख रुपये निर्धारित है, जिस पर 17.50 लाख रुपये तक की सहायता मिलेगी. मधुबनी, नवादा, औरंगाबाद समेत 12 जिलों में लागू इस योजना का उद्देश्य किसानों को सस्ती भंडारण सुविधा उपलब्ध कराना, फलों-सब्जियों की बर्बादी कम करना और कृषि वैल्यू चेन को मजबूत बनाना है.
बिहार सरकार मधुबनी के सकरी और दरभंगा के रैयाम में सहकारी चीनी मिलों को शुरू करने की दिशा में तेजी से काम कर रही है. किसानों की प्राथमिक सदस्यता के लिए ई-सहकारी वेब पोर्टल लॉन्च किया गया है. दोनों चीनी मिलों के कार्यक्षेत्र के 2401 गांवों के पात्र किसान 30 जुलाई 2026 तक ऑनलाइन आवेदन कर प्राथमिक चीनी मिल सहकारी समिति के सदस्य बन सकते हैं.
इस सरकार ने गुणवत्तापूर्ण गन्ना बीज उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए किसानों को सब्सिडी देने का निर्णय लिया है. वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए 'बीज विकास योजना' और 'गन्ना यंत्रीकरण योजना' को मंजूरी दी गई है.
बिहार में मत्स्य पालन को बढ़ावा देने के लिए ICAR और कॉफेड के बीच समझौता हुआ है. इससे आधुनिक तकनीक, प्रशिक्षण और सहकारी मॉडल के जरिए उत्पादन और किसानों की आय में बड़ी बढ़ोतरी की उम्मीद है.
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