कश्मीर में स्ट्रॉबेरी बनी किसानों की नई उम्मीद, जल्दी कटाई और बढ़ती मांग से आमदनी में इजाफा

कश्मीर में स्ट्रॉबेरी बनी किसानों की नई उम्मीद, जल्दी कटाई और बढ़ती मांग से आमदनी में इजाफा

कश्मीर घाटी में अप्रैल के अंत और मई की शुरुआत में स्ट्रॉबेरी की कटाई शुरू हो जाती है. जल्दी तैयार होने वाली इस फसल से किसानों को लंबी सर्दियों के बाद बेहतर आमदनी मिल रही है. बढ़ती मांग और अच्छे दामों के चलते घाटी में बड़ी संख्या में किसान स्ट्रॉबेरी की खेती की ओर रुख कर रहे हैं.

Kashmir strawberry farmingKashmir strawberry farming
अशरफ वानी
  • Srinagar,
  • May 12, 2026,
  • Updated May 12, 2026, 4:57 PM IST

स्ट्रॉबेरी उन कई फसलों में से एक है जिसकी कटाई पूरे कश्मीर घाटी में अप्रैल के आखिर और मई की शुरुआत में की जाती है. इसकी जल्दी कटाई होने की वजह से, अधिकतर किसान अब अपने खेतों में स्ट्रॉबेरी लगा रहे हैं, क्योंकि यह न सिर्फ एक नकदी फसल है, बल्कि लंबी सर्दियों के बाद, यह फसल किसानों को न सिर्फ पैदावार देती है, बल्कि आमदनी भी देती है.

मध्य कश्मीर में, कई किसान अपनी खेती का तरीका बदलकर स्ट्रॉबेरी की खेती अपना रहे हैं, क्योंकि साल के इस समय में, स्ट्रॉबेरी की मांग न सिर्फ अच्छी होती है, बल्कि उन्हें इस फसल के लिए अच्छा-खासा पैसा भी मिलता है.

स्ट्रॉबेरी पर पहलगाम अटैक का असर

एक किसान ने बताया कि इस साल पिछली बार से फसल अच्छी है क्योंकि पिछली बार गर्मी ज्यादा थी और हीटवेव भी थी. इस साल मार्च में भी थोड़ी सी हीटवेव थी. फिर 10 मार्च से बारिश शुरू हुई जो इस फसल के लिए अच्छी रही. इस साल भी पूरी फसल अच्छी है. पिछले साल की बात करें तो जब कटाई शुरू हुई तो दो तीन दिन लू वाले दिन थे. बदकिस्मती से वह पहलगाम अटैक की वजह से स्ट्रॉबेरी फसल पर बहुत असर हुआ क्योंकि टूरिस्ट फिर भाग गए. उस समय यहां पर कोई नहीं था. बाजार नहीं चल पा रहे थे.

किसान ने कहा, इस साल उम्मीद है कि पिछले साल जो नुकसान हुआ था, उसकी भरपाई इस साल हो जाएगी. फसल की बात करें तो पिछले साल के मुकाबले इस बार अच्छी है. घाटी में कई किसान स्ट्रॉबेरी की खेती में दिलचस्पी ले रहे हैं, जिसकी जितनी क्षमता है वह उतनी खेती कर रहा है. एक दो साल से कई किसान इसमें लगे हैं.

किसानों को सरकार से मदद

किसान ने कहा, सरकार से भी मदद मिल रही है. सरकार ने बोरवेल दिया है जिससे पानी की कमी का समाधान निकलेगा. जिन इलाकों में पानी कम है, वहां बोरवेल की मदद से किसान स्ट्रॉबेरी की खेती कर रहे हैं. अब कुछ मार्केटिंग में समस्या आ रही है जिसका समाधान हो जाए तो अच्छा रहेगा.

स्ट्रॉबेरी की खेती करने वाले किसानों को सलाह है कि अगर आपके पास पांच छह मरला ही जमीन है तो आप कुछ भी कर सकते हैं. जरूरी नहीं कि आप स्ट्रॉबेरी और जाफरान की ही खेती करें, आप नर्सरी लगा कर भी कमाई कर सकते हैं. 

किसानों में सरकार की इस कोशिश से खुशी है जिसमें फल और सब्जियों को बाहर भेजने के लिए ट्रेन सर्विस शुरू की गई है. किसानों के लिए अलग से ट्रेन की सुविधा होने से उन्हें अपनी उपज दूसरे राज्यों में बेचने में सहूलियत होगी. एक दो साल में कश्मीर की स्ट्रॉबेरी दूर-दूर के राज्यों में अपनी मौजूदगी दर्ज कराएगी. इस बार 27 अप्रैल के बाद स्ट्रॉबेरी की हार्वेस्टिंग शुरू हुई है जो 25 या 26 मई तक चलेगी. लगभग एक महीने तक इसकी कटाई चलती है.

स्ट्रॉबेरी की शेल्फ लाइफ कम

इस फल की शेल्फ लाइफ बहुत कम है जिसके चलते घाटी के जिलों में ही इसकी खपत होती है. कश्मीर में लंबी सर्दियों के बाद सबसे पहली फसल जो तैयार होती है वह कश्मीर में चेरी और स्ट्रॉबेरी है. पिछले कुछ सालों के दौरान जिस अंदाज से स्ट्रॉबेरी की कीमतों में इजाफा हुआ है और बाजारों में इसकी मांग बढ़ी है, उसे देखते हुए कश्मीर में किसान बड़ी तादाद में इसकी खेती कर लगे हैं. इससे खेती में न सिर्फ कमाई बढ़ी है बल्कि स्ट्रॉबेरी की कटाई के बाद दूसरी फसल की बुआई भी आसान हुई है.

MORE NEWS

Read more!