
महाराष्ट्र के सांगली जिले में गन्ने के शुरुआती भुगतान को लेकर किसानों का आंदोलन उग्र हो गया है. स्वाभिमानी शेतकरी संगठन ने गन्ने के लिए ₹4,500 प्रति टन शुरुआती भुगतान की मांग की है. संगठन ने किसानों से आधिकारिक खरीद मूल्य घोषित होने तक गन्ने की कटाई नहीं करने और चीनी मिलों तक उसकी ढुलाई रोकने की अपील की है. इसके बावजूद कुछ किसानों ने कटाई और ढुलाई शुरू करने की कोशिश की, जिसके बाद जिले में तनाव बढ़ गया.
जानकारी के अनुसार, सोमवार रात मालेवाड़ी-अराग रोड पर अराग स्थित मोहनराव शिंदे शुगर फैक्ट्री की ओर जा रहे गन्ने से लदे ट्रैक्टरों को आग लगा दी गई. इसी तरह, करंदवाड़ी स्थित सर्वोदय शुगर फैक्ट्री की राजारामबापू यूनिट के लिए गन्ना ले जा रहे ट्रैक्टरों को नांद्रे-खोटवाड़ी रोड पर भी निशाना बनाया गया. इन घटनाओं को गन्ने के शुरुआती भुगतान की मांग से जुड़े विरोध प्रदर्शन के तौर पर देखा जा रहा है.
किसान संगठन का आरोप है कि चीनी मिल मालिकों ने गन्ने का खरीद मूल्य घोषित किए बिना ही कामकाज शुरू कर दिया है. इससे सांगली जिले के किसानों में नाराजगी बढ़ गई है. स्वाभिमानी शेतकरी संगठन का कहना है कि जब तक किसानों को ₹4,500 प्रति टन शुरुआती भुगतान देने पर फैसला नहीं होता, तब तक गन्ने की कटाई और ढुलाई शुरू नहीं की जानी चाहिए.
किसान नेता संदीप राजोबा ने आरोप लगाया कि सरकार किसानों के साथ दोहरा रवैया अपना रही है. उन्होंने कहा कि बांधों में 85 प्रतिशत पानी का भंडार होने के बावजूद सरकार नदियों के सूखने और गन्ने की फसल सूखने का डर दिखा रही है, ताकि किसान जल्द से जल्द गन्ने की कटाई शुरू कर दें.
राजोबा ने किसानों से चार से पांच दिन और इंतजार करने की अपील की. उन्होंने कहा कि गन्ने के दाम को लेकर जारी गतिरोध जल्द सुलझ सकता है और इतने कम समय में गन्ने की फसल सूखने की आशंका नहीं है.
संदीप राजोबा ने चेतावनी दी कि किसानों की नाराजगी के कारण आगे कोई अप्रिय स्थिति पैदा होती है तो इसकी जिम्मेदारी गन्ना कटाई करने वालों, ट्रांसपोर्टरों और चीनी मिल प्रशासन की होगी. उन्होंने साफ किया कि संगठन ₹4,500 प्रति टन शुरुआती भुगतान की मांग पर अडिग है. (प्रबोधिनी चिखलीकर की रिपोर्ट)