
महाराष्ट्र में सूखे से जूझ रहे किसानों को राहत देने के लिए राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरदचंद्र पवार) यानी NCP (SP) ने राज्य सरकार से आर्थिक मदद बढ़ाकर 25,000 रुपये प्रति किसान करने की मांग की है. पार्टी ने यह राशि दिवाली से पहले बांटने की अपील की है. इसके साथ ही सूखे के हालात को देखते हुए निर्माण परियोजनाओं को पानी की आपूर्ति रोककर पेयजल और खेती के लिए पानी को प्राथमिकता देने की मांग भी उठाई है.
NCP (SP) के नेता और महाराष्ट्र विधान परिषद में विपक्ष के नेता शशिकांत शिंदे ने राज्य सरकार की ओर से घोषित 5,000 रुपये प्रति किसान की सहायता को अपर्याप्त बताया. उन्होंने मांग की कि इसे बढ़ाकर कम से कम 25,000 रुपये किया जाए और दिवाली से पहले किसानों के खातों तक राहत पहुंचाई जाए. उन्होंने सूखे की स्थिति में पशुओं के लिए चारा और देखभाल सुनिश्चित करने के लिए पशु शिविर शुरू करने की भी मांग की.
NCP (SP) के नेता जितेंद्र आव्हाड ने कहा कि सूखे के दौरान पानी के बंटवारे में आम लोगों और किसानों को व्यावसायिक परियोजनाओं से ऊपर रखा जाना चाहिए. उन्होंने मुंबई और ठाणे में बिल्डरों की निर्माण परियोजनाओं को पानी की आपूर्ति रोकने की मांग की.
आव्हाड ने कहा कि निर्माण परियोजनाओं को छह महीने या एक साल तक पानी नहीं मिलने से बिल्डरों को करोड़ों रुपये का नुकसान हो सकता है, लेकिन आम लोगों को घरेलू जरूरतों के लिए पानी नहीं मिलना गंभीर समस्या है. उन्होंने सरकार से पहले नागरिकों की पेयजल जरूरतें पूरी करने की अपील की.
NCP (SP) के अध्यक्ष शरद पवार ने मुंबई स्थित यशवंतराव चव्हाण सेंटर में पार्टी की कोर कमेटी की बैठक की अध्यक्षता की. बैठक में महाराष्ट्र के सूखा प्रभावित क्षेत्रों की स्थिति, आने वाले महीनों में सामने आने वाली चुनौतियों और राहत के लिए अतिरिक्त उपायों पर चर्चा हुई. पवार ने पार्टी के सांसदों, विधायकों और अन्य नेताओं से हालात की जानकारी ली. महाराष्ट्र सरकार ने राज्य के 358 में से 305 तालुकाओं में सूखा घोषित किया है. यह राज्य के कुल तालुकाओं का करीब 85 फीसदी है.
वहीं, शशिकांत शिंदे ने आरोप लगाया कि पानी वितरण समितियों की भूमिका को नजरअंदाज किया जा रहा है और बांधों से पानी छोड़ने के फैसले राजनीतिक दबाव में लिए जा रहे हैं. उन्होंने कहा कि सरकार को निर्धारित नियमों के अनुसार पानी का वितरण सुनिश्चित करना चाहिए. शिंदे ने पेयजल और कृषि के लिए उचित योजना बनाने पर जोर देते हुए चेतावनी दी कि पानी की बर्बादी होने पर राज्य सरकार को जिम्मेदार ठहराया जाएगा.
शिंदे ने सूखे के बावजूद माइक्रोफाइनेंस कंपनियों और कर्जदाताओं की ओर से छोटे ऋणों की वसूली के दौरान किसानों को कथित तौर पर परेशान किए जाने का मुद्दा उठाया. उन्होंने कहा कि सूखे के दौरान जबरन वसूली रोकने संबंधी सरकारी निर्देशों के बावजूद ऐसी शिकायतें सामने आ रही हैं. उन्होंने संबंधित कर्जदाताओं के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की. (पीटीआई)