
महाराष्ट्र के सांगली जिले में गन्ने के उचित दाम की मांग को लेकर किसानों का आंदोलन तेज हो गया है. स्वाभिमानी शेतकरी संघटना के कार्यकर्ताओं ने भोसे गांव में गन्ना लेकर जा रहे 100 से अधिक वाहनों को रोक दिया. गन्ने की कीमतों पर ठोस फैसला होने से पहले ही कटाई और ढुलाई शुरू किए जाने से संगठन नाराज है. वाहनों को छुड़ाने की कोशिश के दौरान प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच तीखी बहस भी हुई.
स्वाभिमानी शेतकरी संघटना ने मिरज-पंढरपुर रोड पर भोसे फाटा के पास गन्ना ले जा रहे वाहनों को रोककर विरोध प्रदर्शन किया. संगठन की मांग है कि चीनी मिलें किसानों को गन्ने का उचित मूल्य देने की घोषणा करें. कार्यकर्ताओं ने कहा कि कीमतों को लेकर फैसला होने तक रोके गए वाहनों को आगे नहीं जाने दिया जाएगा.
प्रदर्शन के दौरान पुलिस और चीनी मिल प्रशासन ने रोके गए वाहनों को छुड़ाने की कोशिश की. इस पर संगठन के कार्यकर्ताओं ने कड़ा विरोध जताया, जिससे मौके पर तनाव बढ़ गया. पुलिस ने कुछ प्रदर्शनकारियों को हिरासत में भी लिया. इसी दौरान स्वाभिमानी शेतकरी संघटना के नेता सौरभ राजू शेट्टी ने बीच-बचाव किया और हिरासत में लिए गए कार्यकर्ताओं को पुलिस वाहन से बाहर निकालने में मदद की.
विरोध बढ़ने के बाद गन्ना लेकर जा रहे सभी वाहनों को एम. डी. जाधव कॉलेज के मैदान में ले जाया गया. संगठन के कार्यकर्ता गन्ने के दाम पर फैसला होने तक अपनी मांग पर अड़े रहे.
उनका कहना है कि किसानों के हितों को ध्यान में रखकर गन्ने की कीमत तय की जानी चाहिए और भुगतान की व्यवस्था साफ होनी चाहिए.
संगठन के नेता सौरभ राजू शेट्टी ने गन्ने के लिए 4,500 रुपये प्रति टन की शुरुआती किस्त देने की मांग की है. संगठन चाहता है कि चीनी मिलें किसानों को पहली किस्त के रूप में यह राशि दें और बाकी 1,000 रुपये प्रति टन का भुगतान मिल बंद होने के समय किया जाए. गन्ने के उचित मूल्य और भुगतान की समयसीमा को लेकर संगठन ने अपना आंदोलन जारी रखने का रुख अपनाया है. (प्रबोधिनी चिखलीकर की रिपोर्ट)