
कर्नाटक में गन्ना किसानों की मांगों और कृषि क्षेत्र में पानी की कमी के मुद्दे पर राज्य सरकार ने 26 अक्टूबर को बैठक बुलाई है. मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने गुरुवार को बताया कि इस बैठक में गन्ना किसानों के साथ चीनी मिल मालिकों को भी आमंत्रित किया गया है. उन्होंने कहा कि गन्ने से जुड़े मुद्दों पर केंद्र सरकार से भी हस्तक्षेप करने का आग्रह किया गया है.
मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने नई दिल्ली रवाना होने से पहले पत्रकारों से बातचीत में बताया कि 26 अक्टूबर को होने वाली बैठक में गन्ना किसानों की मांगों पर चर्चा की जाएगी. इसमें चीनी मिल मालिकों को भी शामिल होने के लिए बुलाया गया है, ताकि संबंधित मुद्दों पर बातचीत की जा सके.
उन्होंने कहा कि केंद्रीय मंत्री प्रहलाद जोशी ने शुरुआत में बैठक में शामिल होने की सहमति दी थी, लेकिन बाद में कुछ कारणों से उन्होंने इसमें शामिल होने में असमर्थता जताई है. हालांकि, उन्होंने राज्य सरकार को बैठक आगे बढ़ाने और केंद्र की ओर से जरूरी कदम उठाने का आश्वासन दिया है.
CM डीके शिवकुमार ने कहा कि केंद्रीय मंत्री प्रहलाद जोशी ने संबंधित केंद्रीय अधिकारियों को जरूरी निर्देश देने की बात कही है. उन्होंने कहा कि गन्ना किसानों से जुड़ा मुद्दा केवल कर्नाटक का नहीं है, बल्कि दूसरे राज्यों के किसान भी इससे प्रभावित हैं. इसी सिलसिले में राज्य सरकार ने कुछ अधिकारियों को केंद्र के स्तर पर संबंधित मामलों को आगे बढ़ाने की जिम्मेदारी दी है.
मुख्यमंत्री ने राज्य में पानी की कमी को लेकर भी चिंता जताई. उन्होंने कहा कि कावेरी और तुंगभद्रा नदी बेसिन में पर्याप्त पानी नहीं है. बारिश की कमी के बीच किसानों की पानी की मांग बढ़ रही है और नहरों में पानी छोड़ने जैसे मुद्दों पर भी समस्याएं सामने आ रही हैं.
उन्होंने ने कहा कि मौजूदा स्थिति में किसानों की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए जल प्रबंधन पर ठोस कार्ययोजना तैयार करना जरूरी है. उन्होंने संकेत दिया कि सिंचाई के लिए पानी की उपलब्धता और सूखे से निपटने के उपायों पर सरकार को समन्वित तरीके से काम करना होगा.
डीके शिवकुमार ने बताया कि उन्होंने आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री से भी पानी के मुद्दे पर चर्चा का आग्रह किया है. उन्होंने कहा कि दोनों राज्यों को आपसी बातचीत के लिए नियमित रूप से मिलना चाहिए, क्योंकि आंध्र प्रदेश में भी पानी की कमी है और किसानों की मांग अधिक है.
मुख्यमंत्री ने कहा कि कावेरी और तुंगभद्रा में पानी की कमी तथा नहरों में पानी छोड़ने से जुड़ी दिक्कतों के बीच राज्यों के बीच समन्वय जरूरी है. बारिश नहीं होने की स्थिति में सूखे से निपटने के लिए कार्ययोजना तैयार करनी होगी.
मुख्यमंत्री ने कहा कि कर्नाटक में सूखे की स्थिति से निपटने के लिए प्रधानमंत्री और केंद्रीय गृह मंत्री से मुलाकात की जरूरत है. उन्होंने बताया कि राज्य सरकार ने दूसरे राज्यों में सूखा राहत की मांगों और उनसे जुड़े उपायों का अध्ययन करने के लिए अधिकारियों की एक टीम को जिम्मेदारी सौंपी है.
उन्होंने कहा कि कर्नाटक में सूखे की स्थिति का आकलन करने के लिए केंद्र की एक टीम को भी राज्य का दौरा करना होगा. राज्य सरकार की कोशिश है कि सूखे से प्रभावित क्षेत्रों की स्थिति और किसानों की जरूरतों को केंद्र के सामने रखा जाए. (एएनआई)