
भारतीय जनता पार्टी (BJP) के नेता और पूर्व डिप्टी सीएम सम्राट चौधरी बिहार के नए मुख्यमंत्री होंगे. पटना के बीजेपी कार्यालय में विधानमंडल दल की बैठक में इस फैसले पर मुहर लगी. ये बैठक केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान के नेतृव में हुई जिसके बाद सम्राट चौधरी बीजेपी विधायक दल के नेता चुने गए. इसके बाद नए मुख्यमंत्री के रूप में सम्राट चौधरी के नाम का ऐलान हुआ. बीजेपी पहली बार बिहार में अपनी अगुवाई में सरकार बनाने जा रही है.
अब सम्राट चौधरी बुधवार को 11 बजे मुख्यमंत्री पद की शपथ लेंगे. उन्होंने नब्बे के दशक में अपनी राजनीतिक पारी का आगाज किया था. गौर करने वाली बात ये है कि सम्राट चौधरी न राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) की पाठशाला से निकले हैं और न ही बीजेपी से अपनी सियासी पारी की आगाज किया है. इसके बाद भी बीजेपी की मिट्टी में सम्राट इस तरह फले फूले कि बिहार के सीएम बनकर उभरे हैं.
मंगलवार को थोड़ी देर पहले ही नीतीश कुमार ने सीएम पद से इस्तीफा दिया. उन्होंने राज्यपाल को अपना इस्तीफा सौंपा जिसके बाद से ही लगभग तय था कि सम्राट चौधरी बिहार के अगले मुख्यमंत्री होंगे. इस्तीफे के बाद नीतीश कुमार ने X पर एक पोस्ट में अपने कार्यकाल की उपलब्धियों का जिक्र किया. उन्होंने लिखा कि आप जानते हैं कि 24 नवंबर, 2005 को राज्य में पहली बार एनडीए सरकार बनी थी. तब से राज्य में कानून का राज है और हम लगातार विकास के काम में लगे हुए हैं. सरकार ने शुरू से ही सभी तबकों का विकास किया है चाहे हिंदू हो, मुस्लिम हो, अपर कास्ट हो, पिछड़ा हो, अति पिछड़ा हो, दलित हो, महादलित हो- सभी के लिए काम किया गया है. हर क्षेत्र में काम हुआ है चाहे शिक्षा हो, स्वास्थ्य हो, सड़क हो, बिजली हो, कृषि हो. महिलाओं एवं युवाओं के लिए भी बहुत काम किया गया है.'
243 सदस्यों वाली विधानसभा में 89 विधायकों के साथ सबसे बड़ी पार्टी BJP ने चौधरी को अपना विधायक दल का नेता चुना गया. यह चुनाव तब हुआ जब JD(U) के प्रमुख और पिछले हफ्ते ही राज्यसभा सांसद बने नीतीश कुमार ने मुख्यमंत्री पद से अपना इस्तीफा राज्यपाल सैयद अता हसनैन को सौंप दिया.
चौहान, जिन्हें BJP संसदीय बोर्ड ने विधायक दल के नेता के चुनाव के लिए केंद्रीय पर्यवेक्षक नियुक्त किया था, ने पत्रकारों से कहा, "सम्राट चौधरी को सर्वसम्मति से BJP विधायक दल का नेता चुना गया है." तारापुर से BJP विधायक चौधरी, NDA विधायक दल के नेता चुने जाने के बाद बिहार के अगले मुख्यमंत्री होंगे.
2024 से, वे उपमुख्यमंत्री के तौर पर काम कर रहे हैं और उन्होंने वित्त, शहरी विकास और पंचायती राज जैसे अहम विभागों को संभाला है. ये शासन के मुख्य क्षेत्र हैं, और इन्हें संभालने से उन्हें राज्य सरकार चलाने का सीधा अनुभव मिला है. इससे वे न सिर्फ एक राजनीतिक नेता बन गए हैं, बल्कि ऐसे व्यक्ति भी बन गए हैं जो शासन-प्रशासन को अंदर से समझते हैं.
सम्राट चौधरी की राजनीतिक यात्रा भी उनके इस उभार को समझने के लिए बहुत जरूरी है. उन्होंने 1990 के दशक में राष्ट्रीय जनता दल से अपने करियर की शुरुआत की और 1999 में राबड़ी देवी की सरकार के दौरान मंत्री बने. सत्ता में यह उनकी पहली बड़ी भूमिका थी, और इससे उन्हें शुरुआती प्रशासनिक अनुभव हासिल करने में मदद मिली. बाद में, वे जनता दल (यूनाइटेड) में शामिल हो गए, जहां उन्होंने नीतीश कुमार के नेतृत्व वाली राजनीतिक व्यवस्था में काम किया.
हालांकि, वे अपने पूरे करियर के दौरान एक ही पार्टी में नहीं रहे. आखिरकार, वे 2018 में BJP में शामिल हो गए, जहां उनका राजनीतिक विकास और भी मजबूत हुआ. कुल मिलाकर, वे तीन बड़ी पार्टियों का हिस्सा रहे हैं और उन्होंने दो बार पार्टियां बदली हैं, जो बिहार की बदलती राजनीतिक परिस्थितियों के हिसाब से खुद को ढालने की उनकी काबिलियत को दिखाता है.
2014 में एक अहम मोड़ आया, जब उन्होंने BJP में शामिल होने से पहले RJD से विधायकों के एक समूह को अलग करने में बड़ी भूमिका निभाई. इससे यह साबित हुआ कि वे सिर्फ एक अनुयायी नहीं, बल्कि एक ऐसे नेता हैं जो साहसी राजनीतिक फैसले ले सकते हैं.
BJP के भीतर, सम्राट चौधरी का उभार लगातार और सुनियोजित रहा है. वे पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष बने, फिर चुनावों में एक अहम चेहरा बने, और बाद में उपमुख्यमंत्री बने. आज, उन्हें बिहार में BJP के सबसे मजबूत OBC नेताओं में से एक के तौर पर देखा जाता है. पार्टी नेतृत्व ने लगातार उनका समर्थन किया है, जिससे यह साफ जाहिर होता है कि उन्हें शीर्ष पद के लिए तैयार किया जा रहा है.