
नई दिल्ली में केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान की पुस्तक ‘अपनापन : नरेंद्र मोदी संग मेरे अनुभव’ का भव्य लोकार्पण समारोह आयोजित किया गया. यह कार्यक्रम केवल पुस्तक विमोचन तक सीमित नहीं रहा. यह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के व्यक्तित्व, नेतृत्व, कार्यशैली और मानवीय पक्ष पर केंद्रित एक आत्मीय आयोजन बनकर उभरा. समारोह में पूर्व उपराष्ट्रपति एम. वेंकैया नायडू, पूर्व प्रधानमंत्री एच.डी. देवेगौड़ा सहित कई केंद्रीय मंत्री, मुख्यमंत्री, सांसद, विधायक और सामाजिक क्षेत्र से जुड़े लोग मौजूद रहे.
शिवराज सिंह चौहान की यह पुस्तक प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ लगभग 35 वर्षों की राजनीतिक और संगठनात्मक यात्रा के अनुभवों पर आधारित है. पुस्तक में मोदी के कार्यकर्ता जीवन, संगठन क्षमता, निर्णय लेने की शैली, संवेदनशीलता और राष्ट्रहित को सर्वोपरि रखने वाले दृष्टिकोण को विभिन्न प्रसंगों के माध्यम से प्रस्तुत किया गया है. कार्यक्रम में वक्ताओं ने कहा कि यह किताब केवल संस्मरण नहीं, बल्कि सार्वजनिक जीवन में सेवा, समर्पण और नेतृत्व की शैली को समझने का दस्तावेज है.
पूर्व उपराष्ट्रपति एम वेंकैया नायडू ने अपने संबोधन में कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सबसे बड़ी ताकत जनता से उनका सीधा संवाद है. उन्होंने कहा कि ‘मन की बात’ जैसे कार्यक्रमों के जरिए मोदी ने देश के अलग-अलग वर्गों से विश्वास का संबंध बनाया है. मोदी सरल और आत्मीय शैली में अपनी बात रखते हैं, जिससे आम लोगों के साथ उनका जुड़ाव मजबूत हुआ है.
वेंकैया नायडू ने कहा कि भारत की वैश्विक पहचान को मजबूत करने में भी प्रधानमंत्री मोदी की बड़ी भूमिका रही है. उन्होंने कहा कि आज दुनिया भारतीय संस्कृति और भारतीयता को नए सम्मान के साथ देख रही है. उन्होंने ‘नमस्ते’ को वैश्विक स्तर पर पहचान मिलने का उदाहरण देते हुए कहा कि यह भारत के सांस्कृतिक आत्मविश्वास का प्रतीक है.
वेंकैया नायडू ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी ने पद्म पुरस्कारों को समाज के अनदेखे और सामान्य लोगों तक पहुंचाने का काम किया है. उन्होंने कहा कि पहले राष्ट्रीय सम्मान कुछ सीमित वर्गों तक सिमटे नजर आते थे, लेकिन अब किसान, सामाजिक कार्यकर्ता और साधारण पृष्ठभूमि से आने वाले लोग भी सम्मानित हो रहे हैं. उन्होंने इसे “रिकॉग्नाइज द अनरिकॉग्नाइज्ड” की सोच बताया.
वेंकैया नायडू ने शिवराज सिंह चौहान के लंबे राजनीतिक जीवन और उनकी जनस्वीकार्यता का भी उल्लेख किया. उन्होंने कहा कि मध्य प्रदेश में 17 वर्षों तक मुख्यमंत्री रहना और उसके बाद केंद्र में महत्वपूर्ण जिम्मेदारी निभाना साधारण उपलब्धि नहीं है. उन्होंने याद किया कि मुख्यमंत्री के तौर पर शिवराज सिंह का नाम उन्होंने वरिष्ठ नेताओं के बीच सुझाया था और बाद में यह निर्णय सही साबित हुआ.
उन्होंने कहा कि शिवराज सिंह चौहान की सबसे बड़ी ताकत उनकी सादगी, सहजता और जनता से सीधा जुड़ाव है. वेंकैया नायडू ने कहा कि यही कारण है कि मध्य प्रदेश की जनता उन्हें “मामा” कहकर पुकारती है. उन्होंने ‘लाड़ली लक्ष्मी योजना’ जैसी योजनाओं को जनसंवेदनशील नेतृत्व का उदाहरण बताया.
पूर्व प्रधानमंत्री एच.डी. देवेगौड़ा ने कहा कि भारत की लोकतांत्रिक ताकत गांव, किसान और साधारण लोगों के जीवन से निकलती है. उन्होंने कहा कि वही नेता लंबे समय तक जनता के बीच स्वीकार्यता बनाए रखता है, जो लोगों के संघर्ष और जरूरतों को समझता हो.
देवेगौड़ा ने कहा कि ‘अपनापन’ जैसी पुस्तक यह बताती है कि नेतृत्व केवल शक्ति या प्रशासनिक क्षमता का नाम नहीं है, बल्कि उसमें संवेदना, धैर्य और सेवा-भाव भी होना चाहिए. उन्होंने कहा कि जनता उन्हीं नेताओं पर भरोसा करती है, जो विकास के साथ मानवीय मूल्यों को भी महत्व देते हैं.
केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने अपने संबोधन में कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को करीब से देखने और लंबे समय तक उनके साथ काम करने के दौरान उन्होंने हमेशा उन्हें देश और समाज के लिए समर्पित पाया. उन्होंने कहा कि किसी नेता को केवल उसकी उपलब्धियों से नहीं, बल्कि इस बात से समझा जा सकता है कि वह सामान्य कार्यकर्ता, किसान और गरीब व्यक्ति के साथ कैसा व्यवहार करता है.
शिवराज सिंह ने कहा कि मोदी का “अपनापन” केवल व्यवहार का हिस्सा नहीं, बल्कि उनके व्यक्तित्व का स्वाभाविक गुण है. उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री सत्ता के शीर्ष पर होने के बावजूद देश के अंतिम व्यक्ति की चिंता करते हैं और लोगों के जीवन की धड़कनों से जुड़े रहते हैं.
शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि किसी भी बड़े नेता की विश्वसनीयता उसकी उपलब्धियों से ज्यादा उसकी नीयत, सादगी और निरंतर कर्म से बनती है. उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का सार्वजनिक जीवन अनुशासन, पारदर्शिता और राष्ट्रहित के प्रति समर्पण का उदाहरण है.
उन्होंने कहा कि नेतृत्व की असली परीक्षा संकट के समय होती है और मोदी ने हर परिस्थिति में देशहित को सर्वोच्च रखा है. शिवराज सिंह ने कहा कि कार्यकर्ता से लेकर अंतिम व्यक्ति तक भरोसे का रिश्ता बनाना ही असली जननेतृत्व है और यही भावना ‘अपनापन’ पुस्तक का मूल संदेश है.
कार्यक्रम में कई राज्यों के मुख्यमंत्री, केंद्रीय मंत्री, सांसद, विधायक, सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधि, शिक्षण संस्थानों से जुड़े लोग, लेखक, पत्रकार और विभिन्न क्षेत्रों की हस्तियां मौजूद रहीं. आयोजन में बड़ी संख्या में कार्यकर्ताओं, समाजसेवियों और हितग्राहियों की उपस्थिति भी देखने को मिली, जिससे समारोह का माहौल आत्मीय और जनभागीदारी से भरा नजर आया.