खरीफ सम्‍मेलन 2026 से 'गायब' मंत्री-अफसरों पर भड़के शिवराज, बोले- ये पद पर रहने लायक नहीं

खरीफ सम्‍मेलन 2026 से 'गायब' मंत्री-अफसरों पर भड़के शिवराज, बोले- ये पद पर रहने लायक नहीं

खरीफ सम्मेलन-2026 में केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने गैरहाजिर मंत्री और अधिकारियों पर सख्त नाराजगी जताई. उन्होंने कहा कि कृषि के सबसे बड़े सम्मेलन में शामिल न होने वाले लोग अपने दायित्व के साथ न्याय नहीं कर रहे हैं और ऐसे लोग पद पर रहने लायक नहीं हैं. सम्मेलन में कृषि उत्पादन, किसानों की आय और खेती की रणनीति पर मंथन हुआ.

Kharif Sammelan 2026 ShivrajKharif Sammelan 2026 Shivraj
क‍िसान तक
  • नई दिल्‍ली,
  • May 28, 2026,
  • Updated May 28, 2026, 4:49 PM IST

नई दिल्ली में आयोजित खरीफ सम्मेलन-2026 के पहले दिन केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कृषि व्यवस्था, उत्पादन और किसानों से जुड़े मुद्दों पर बड़ा संदेश दिया. पूसा परिसर में आयोजित दो दिवसीय राष्ट्रीय सम्मेलन में देशभर के कृषि वैज्ञानिक, विशेषज्ञ, वरिष्ठ अधिकारी और नीति निर्धारक शामिल हुए. इस दौरान कई राज्‍यों से मंत्री और अफसर कार्यक्रम में नहीं आए, जिसपर कृषि मंत्री ने कड़ी नाराजगी जताते हुए कहा कि जो मंत्री और अधिकारी कृषि के सबसे बड़े सम्मेलन में शामिल नहीं होते, वे अपने दायित्व के साथ न्याय नहीं कर रहे हैं. कृषि सम्मेलन में नहीं आने वाले मंत्री-अधिकारी पद पर रहने के लायक नहीं हैं.

सम्मेलन के दौरान शिवराज सिंह चौहान ने साफ शब्दों में कहा कि कृषि और खाद्यान्न उत्पादन देश की सबसे गंभीर जिम्मेदारियों में शामिल है, इसलिए इस तरह के राष्ट्रीय सम्मेलन को हल्के में नहीं लिया जा सकता. शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि अगर कोई व्यक्ति देश के उत्पादन और किसानों से जुड़े सबसे अहम सम्मेलन में नहीं आता तो उस पद पर बने रहने का औचित्य नहीं बचता. उन्होंने बताया कि पहले कृषि मंत्रियों की भागीदारी कम रहती थी, लेकिन अब अधिकांश राज्य सक्रिय रूप से शामिल हो रहे हैं. सम्मेलन में खरीफ फसलों की तैयारी, उत्पादन बढ़ाने की रणनीति, जल प्रबंधन, बीज गुणवत्ता और किसानों की आय बढ़ाने जैसे विषयों पर विस्तार से मंथन हुआ.

जमीन अनुभव से बनेगी बेहतर रणनीति: शिवराज

केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज ने अधिकारियों और विशेषज्ञों से खुलकर सुझाव देने की अपील भी की. उन्होंने कहा, “मौनी बाबा मत बनिए, अपने सुझाव खुलकर दीजिए.” उन्‍होंने कहा कि खेती और किसानों से जुड़े मुद्दों का समाधान केवल औपचारिक बैठकों से नहीं होगा, बल्कि जमीनी अनुभव और सुझावों के आधार पर बेहतर रणनीति तैयार करनी होगी. उन्होंने कहा कि सरकार कृषि सुधार को लेकर पूरी गंभीरता से काम कर रही है और हर स्तर पर सुझावों का स्वागत है.

शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि देश में खाद्यान्न उत्पादन लगातार बढ़ रहा है और इस बार रिकॉर्ड उत्पादन का अनुमान है. उन्होंने किसानों और कृषि वैज्ञानिकों की सराहना करते हुए कहा कि विपरीत मौसम और जलवायु परिवर्तन जैसी चुनौतियों के बावजूद किसानों ने शानदार काम किया है. उन्होंने कहा कि दुनिया में कितना भी बड़ा संकट आ जाए, भारत में कोई भूखा नहीं रहेगा, क्योंकि देश के अन्न भंडार मजबूत स्थिति में हैं.

'दलहन-तिलहन में आत्‍मनिर्भरता हासिल करनी होगी'

हालांकि, उन्होंने दलहन और तिलहन उत्पादन को लेकर चिंता भी जताई. उन्‍होंने कहा कि इन फसलों में आत्मनिर्भरता जरूरी है और आयात पर निर्भरता कम करनी होगी. इसके लिए राज्यों के साथ मिलकर रणनीति बनाई जाएगी. उन्होंने इंटीग्रेटेड फॉर्मिंग मॉडल पर भी जोर दिया और कहा कि छोटे होते जोत आकार को देखते हुए किसानों को पशुपालन, बागवानी, मत्स्य पालन और अन्य गतिविधियों से जोड़ना जरूरी है, ताकि उनकी आमदनी बढ़ सके.

“वन नेशन, वन एग्रीकल्चर, वन टीम” का दिया संदेश

केंद्रीय मंत्री ने नकली खाद और पेस्टिसाइड बेचने वालों पर भी सख्त कार्रवाई की बात कही. उन्होंने कहा कि किसानों के साथ धोखा करने वालों को किसी भी कीमत पर छोड़ा नहीं जाएगा. साथ ही सरकार पेस्टिसाइड और बीज कानूनों में सुधार को लेकर भी काम कर रही है. सम्मेलन में शिवराज सिंह चौहान ने “वन नेशन, वन एग्रीकल्चर, वन टीम” का संदेश देते हुए कहा कि केंद्र और राज्य मिलकर कृषि क्षेत्र को मजबूत बनाने का काम करें. उन्होंने कहा कि कृषि राज्य का विषय जरूर है, लेकिन केंद्र सरकार हर स्तर पर राज्यों को सहयोग देने के लिए तैयार है.

अल नीनो की आशंका पर शिवराज का राहत भरा बयान

खरीद व्यवस्था को लेकर भी उन्होंने चिंता जताई. उन्होंने कहा कि कई जगहों पर किसानों को समय पर भुगतान नहीं मिल पाता, जिससे उन्हें परेशानी होती है. किसान को समय पर पैसा मिलना जरूरी है, ताकि वह अगली फसल की तैयारी कर सके. उन्होंने नेफेड और एनसीसीएफ की भूमिका बढ़ाने की बात भी कही.

अल नीनो की आशंकाओं पर शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि घबराने की जरूरत नहीं है. उन्होंने कहा कि परिस्थितियों के अनुसार राज्यों के लिए अलग-अलग कृषि रोडमैप तैयार किए जाएंगे और जरूरत पड़ने पर जिलावार कंटीन्जेंसी प्लान भी लागू किए जाएंगे. उन्होंने संतुलित उर्वरक उपयोग और प्राकृतिक खेती पर भी जोर दिया.

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