
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार को गुजरात के बनासकांठा में आयोजित विशाल किसान-पशुपालक सम्मेलन को संबोधित करते हुए कृषि, पशुपालन और ग्रामीण विकास से जुड़ी केंद्र सरकार की योजनाओं का जिक्र किया. कार्यक्रम का मुख्य अवसर पीएम किसान सम्मान निधि योजना की 24वीं किस्त जारी करना था, जिसके तहत करोड़ों किसानों के खातों में सहायता राशि ट्रांसफर की गई.
अपने संबोधन की शुरुआत करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि आज देश के सभी जिलों के किसान तकनीक के माध्यम से कार्यक्रम से जुड़े हैं. उन्होंने बनासकांठा में आयोजित खाट सभा की सराहना करते हुए कहा कि दुनिया में इतनी बड़ी खाट सभा शायद पहले कभी नहीं हुई होगी. उन्होंने मजाकिया अंदाज में कहा कि यदि इसकी जानकारी गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड को दी जाती तो एक नया रिकॉर्ड बन सकता था.
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि उन्हें जनता की सेवा करते हुए 25 वर्ष पूरे हो गए हैं और इस अवसर पर उनका पहला कार्यक्रम बनासकांठा में होना विशेष महत्व रखता है. उन्होंने याद दिलाया कि वर्ष 2001 में मुख्यमंत्री बनने के बाद उनका पहला बड़ा सार्वजनिक कार्यक्रम भी डीसा में हुआ था, जिसमें लाखों लोग शामिल हुए थे.
प्रधानमंत्री ने बनासकांठा के मशहूर आलू का जिक्र करते हुए कहा, "बनासकांठा का आलू दुनिया में प्रसिद्ध है और यहां कोई आकर यह नहीं कह सकता कि मैं आलू से सोना बनाऊंगा. यहां के लोग पहले से जानते हैं कि आलू का क्या महत्व है." प्रधानमंत्री की इस टिप्पणी पर सभा में मौजूद लोगों ने तालियों और ठहाकों के साथ प्रतिक्रिया दी.
प्रधानमंत्री मोदी ने दावा किया कि केंद्र सरकार की विभिन्न नीतियों के कारण बीते वर्षों में किसानों को लगभग 50 लाख करोड़ रुपये का लाभ मिला है या उनकी उतनी बचत हुई है. उन्होंने कहा कि पीएम किसान सम्मान निधि योजना के तहत अब तक करीब 4.5 लाख करोड़ रुपये सीधे छोटे किसानों के बैंक खातों में भेजे जा चुके हैं.
उन्होंने कहा कि देश के 85 प्रतिशत से अधिक किसान छोटे किसान हैं और सरकार की प्राथमिकता इन्हीं किसानों को आर्थिक रूप से मजबूत बनाना है.
प्रधानमंत्री ने कहा कि वैश्विक परिस्थितियों के कारण खादों की कीमतों में भारी वृद्धि हुई, लेकिन सरकार ने इसका बोझ किसानों पर नहीं पड़ने दिया. उन्होंने बताया कि किसानों को राहत देने के लिए केंद्र सरकार ने उर्वरक सब्सिडी पर लगभग 16 लाख करोड़ रुपये खर्च किए हैं.
प्रधानमंत्री ने कहा कि उनकी सरकार ने न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) को लेकर किसानों से किया गया वादा निभाया है. उन्होंने बताया कि पिछले 12 वर्षों में गेहूं और धान उत्पादकों को MSP के रूप में लगभग 24 लाख करोड़ रुपये का भुगतान किया गया.
उन्होंने पीएम फसल बीमा योजना का उल्लेख करते हुए कहा कि इस योजना के तहत पिछले 12 वर्षों में किसानों को 2 लाख करोड़ रुपये से अधिक का मुआवजा दिया गया है.
प्रधानमंत्री ने कहा कि सरकार लगातार खेती की लागत कम करने के प्रयास कर रही है. इसके तहत किसानों को 12 लाख सोलर पंप उपलब्ध कराए गए हैं, जिससे लगभग 80 करोड़ लीटर डीजल की बचत हुई है.
उन्होंने कृषि में विज्ञान और तकनीक के महत्व पर जोर देते हुए कहा कि सॉयल हेल्थ कार्ड योजना इसका सबसे बड़ा उदाहरण है. देशभर में 26 करोड़ से अधिक सॉयल हेल्थ कार्ड जारी किए गए हैं, जिससे किसानों को मिट्टी की क्वालिटी के अनुसार खेती करने में मदद मिली है.
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि पशुपालन ग्रामीण अर्थव्यवस्था का महत्वपूर्ण आधार है. बेहतर पशु नस्लों के विकास से दूध उत्पादन बढ़ता है और पशुओं में बीमारियों से होने वाला नुकसान कम होता है. उन्होंने इस क्षेत्र में हो रहे निवेश और नई तकनीकों को किसानों की आय बढ़ाने का माध्यम बताया.
अपने संबोधन के अंत में प्रधानमंत्री ने भावनात्मक अंदाज में कहा कि जब गुजरात के लोग उन्हें "हमारे नरेंद्र भाई" कहकर पुकारते हैं तो उन्हें अच्छा लगता है. उन्होंने कहा कि गुजरात ने उन्हें बहुत कुछ सिखाया है और यहीं की जनता ने उन्हें पहले राज्य और फिर देश की सेवा का अवसर दिया.
इस दौरान प्रधानमंत्री ने कृषि, पशुपालन, सिंचाई, डेयरी और ग्रामीण विकास से जुड़ी कई परियोजनाओं का लोकार्पण और शिलान्यास भी किया.