महर्षि बामदेव की तपोभूमि के रूप में प्रसिद्ध बांदा जनपद में ‘किसान तक’ का किसान कारवां पूरे उत्साह के साथ पहुंचा. जिले के कनवारा गांव में आयोजित यह कार्यक्रम 75 जिलों की व्यापक कवरेज के अंतर्गत किसान कारवां का 19वां पड़ाव रहा. उत्तर प्रदेश सरकार और इंडिया टुडे ग्रुप के संयुक्त प्रयास से आयोजित इस कार्यक्रम में बड़ी संख्या में किसानों ने भाग लिया और आधुनिक खेती से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारियां हासिल कीं.
कार्यक्रम की शुरुआत किसानों के पंजीकरण और संवाद से हुई, जहां मंच पर कृषि वैज्ञानिकों, विभागीय अधिकारियों और विशेषज्ञों की सक्रिय भागीदारी देखने को मिली. किसानों को उन्नत बीज, फसल प्रबंधन, आधुनिक तकनीक, लागत कम करने और उत्पादन बढ़ाने के व्यावहारिक तरीकों पर विस्तार से जानकारी दी गई. किसानों ने भी खुलकर सवाल पूछे और अपनी समस्याएं साझा कीं, जिनका समाधान विशेषज्ञों ने सरल भाषा में समझाया.
कार्यक्रम के पहले चरण में कृषि विज्ञान केंद्र बांदा की विशेषज्ञ डॉ. प्रज्ञा ओझा ने बुंदेलखंड क्षेत्र में मोटे अनाज की खेती की अपार संभावनाओं पर प्रकाश डाला. उन्होंने बताया कि मोटे अनाज कम पानी और सीमित संसाधनों में भी अच्छी पैदावार देते हैं. इन फसलों में पोषक तत्व भरपूर होते हैं और मौजूदा समय में बाजार में इनका अच्छा मूल्य मिल रहा है, जिससे किसानों की आय बढ़ सकती है.क
दूसरे चरण में कृषि विज्ञान केंद्र बांदा की महिला वैज्ञानिक डॉ. दीक्षा पटेल ने एफपीओ यानी फार्मर प्रोड्यूसर ऑर्गनाइजेशन के महत्व को समझाया. उन्होंने कहा कि एफपीओ से जुड़कर किसान सामूहिक रूप से अपनी फसलों की बिक्री कर सकते हैं, जिससे उन्हें बेहतर दाम मिलता है. इसके साथ ही एफपीओ के माध्यम से खाद, बीज, कृषि यंत्र और विभिन्न सरकारी योजनाओं में अनुदान का लाभ भी आसानी से मिल पाता है.
तीसरे चरण में बांदा जनपद के डिप्टी डायरेक्टर कृषि अभय कुमार यादव ने फार्मर रजिस्ट्री की प्रक्रिया और इसके लाभों की जानकारी दी. उन्होंने सम्मान निधि रुकने के प्रमुख कारणों और उनके समाधान पर भी चर्चा की. साथ ही कृषि विभाग की विभिन्न योजनाओं के बारे में बताते हुए किसानों से समय पर पंजीकरण और दस्तावेज अपडेट रखने की अपील की.
चौथे चरण में जिला कृषि अधिकारी संजय कुमार ने किसानों को देखा-देखी की खेती से बचने की सलाह दी. उन्होंने कहा कि किसान की आय तभी बढ़ेगी जब वह अपनी फसल की लागत को नियंत्रित करेगा. सीमित मात्रा में उर्वरकों का प्रयोग, हरी खाद और गोबर की खाद का उपयोग तथा सॉइल हेल्थ कार्ड के माध्यम से मिट्टी की जांच को उन्होंने बेहद जरूरी बताया.
पांचवें चरण में बांदा कृषि विश्वविद्यालय के निदेशक शोध डॉ. जगन्नाथ पाठक ने प्राकृतिक खेती को अपनाने का संदेश दिया. उन्होंने कहा कि धरती मां स्वस्थ होगी तभी मानव भी स्वस्थ रहेगा. गोबर खाद, हरी खाद और स्थानीय प्राकृतिक संसाधनों के उपयोग से मिट्टी की उर्वरता बढ़ाई जा सकती है, जबकि रासायनिक खाद और कीटनाशक लंबे समय में मिट्टी को नुकसान पहुंचाते हैं.
छठे चरण में पशुपालन विभाग के उप मुख्य पशु चिकित्सा अधिकारी डॉ. रमेश ने पशुओं के स्वास्थ्य से जुड़ी अहम जानकारियां साझा कीं. उन्होंने रेबीज से बचाव के उपाय बताए और पशुओं में होने वाली पथरी की समस्या पर भी प्रकाश डाला. सर्दियों के मौसम में पशुओं को पर्याप्त मात्रा में पानी पिलाने की सलाह भी दी गई.
सातवें चरण में कार्यक्रम में मौजूद जादूगर सलमान ने सरल और रोचक अंदाज में किसानों को सरकारी योजनाओं से जुड़े रहने के फायदे समझाए. उन्होंने किसानों से अपने ब्लॉक और जिला कृषि कार्यालय से नियमित संपर्क बनाए रखने की अपील की, ताकि किसी भी योजना का लाभ छूट न जाए.
कार्यक्रम के अंतिम और आठवें चरण में लकी ड्रा का आयोजन किया गया, जिसने किसानों के बीच खासा उत्साह पैदा किया. लकी ड्रा में ₹500 के 10 नकद पुरस्कार वितरित किए गए. वहीं प्रथम पुरस्कार के रूप में ₹3000 गांव की महिला किसान रजनी को और द्वितीय पुरस्कार के रूप में ₹2000 दाता राम को प्रदान किए गए.