मध्य प्रदेश के नीमच और मंदसौर जिले में रविवार को अचानक मौसम ने करवट लेते हुए तबाही मचा दी, दोपहर करीब 20 से 25 मिनट तक चली तेज आंधी, मूसलाधार बारिश और भारी ओलावृष्टि ने आम जनजीवन सहित किसानों को अस्त-व्यस्त कर दिया.
नीमच जिले के पलसोड़ा, जीरन तहसील, रूपावास सहित नीमच से जुड़े मंदसौर के ग्रामीण इलाकों में तेज़ आंधी के साथ बारिश और ओले गिरे, सड़कों के किनारे बर्फ जैसी ओलों की परत जम गई, कई जगह होर्डिंग्स गिर पड़े और जलभराव की स्थिति बन गई.
राहगीरों ने सड़क पर जमे ओलों को हाथों में उठाकर दिखाया और बताया कि इतनी भीषण बारिश और ओलावृष्टि से निश्चित तौर पर फसलों को बड़ा भारी नुकसान हुआ है, जिसमें अफीम और गेहूं को अधिक नुकसान हुआ है.
क्षेत्र में प्रकृति के इस कहर का सबसे ज्यादा असर किसानों पर पड़ा है, पलसोड़ा, चल्दू, हर्कियाखाल और भाटखेड़ा गांवों में तेज हवाओं और ओलों की मार से खेतों में खड़ी फसलें चौपट हो गई, ऐसे में अफीम की नाजुक फसल को भारी नुकसान पहुंचा है. डोडे टूट गए हैं और पौधे जमीन पर गिर पड़े हैं.
इसके अलावा कलौंजी, चिया सीड और गेहूं की फसलें भी प्रभावित हुई है जहां फसलें कटाई के करीब पहुंच चुकी कलौंजी और चिया पूरी तरह झड़ गईं. वहीं, गेहूं की फसल तेज आंधी से खेतों में बिछ गई है.
मंदसौर और नीमच जिले के इलाकों में बेमौसम आए इस तूफान ने संभलने का मौका तक नहीं दिया और महीनों की मेहनत पल भर में मिट्टी में मिल गई, फसलों को हुए नुकसान से क्षेत्र के अन्नदाता गहरी चिंता में हैं.
खासकर अफीम की खेती करने वाले किसान भविष्य को लेकर आशंकित नजर आ रहे हैं. वहीं, मौसम विभाग ने पहले चेतावनी जरूर दी थी, लेकिन अचानक आई इस आपदा ने जनजीवन के साथ-साथ कृषि व्यवस्था को भी झकझोर कर रख दिया है. (अजय बडोलीया की रिपोर्ट)