आम की खेती में सर्दी यानी जनवरी से मध्य फरवरी का महीना सबसे अहम होता है. इसी समय पेड़ के अंदर यह तय होता है कि उसमें नई पत्तियां आएंगी या मंजर. उत्तर भारत की जलवायु में अक्सर लोग ये गलती करते हैं कि इस समय नाइट्रोजन वाली खाद या ज्यादा सिंचाई कर देते हैं, जिससे पेड़ में फूल की जगह नई पत्तियां निकलने लगती हैं.
इस सर्दी आम के बाग की अनदेखी करना फसल के लिए घातक हो सकता है, क्योंकि इसी समय पेड़ यह तय करता है कि वह फल देगा या सिर्फ पत्तियां. अगर किसान इस दौरान वैज्ञानिक स्प्रे और सही पोषण का ध्यान नहीं रखते, तो कोहरे और नमी के कारण 'पाउडरी मिल्ड्यू' जैसी फफूंद और 'भुनगा कीट' पूरे मंजर को काला कर सुखा देते हैं.
एक्सपर्ट के अनुसार, सर्दियों में पेड़ की वानस्पतिक वृद्धि को रोककर उसे बौर यानी मंजर देने की दिशा में मोड़ना जरूरी है. इसके लिए पोटैशियम नाइट्रेट 1% का छिड़काव बहुत फायदेमंद होता है, जिससे फूल आने की प्रक्रिया तेज हो जाती है. इसके लिए आम की बागवानी में पैक्लोब्यूट्राजोल सबसे अच्छी तरह काम करता है, और मंजर निकालने में मदद करता है.
इसके साथ ही, मंजर को मजबूती देने के लिए सूक्ष्म पोषक तत्व जैसे बोरॉन 0.2% और जिंक सल्फेट का छिड़काव बहुत जरूरी है. बोरॉन की कमी से अक्सर फूल सूख कर झड़ने लगते हैं और परागण सही से नहीं हो पाता. इन तत्वों के इस्तेमाल से फल स्वस्थ बनते हैं और उनकी चमक भी बढ़ती है.
मंजर निकलने से ठीक पहले कई खतरनाक कीट और बीमारियां बाग पर हमला करती हैं. इनमें पाउडरी मिल्ड्यू यानी सफेद फफूंद, एन्थ्रेक्नोज और भुनगा कीट प्रमुख हैं. जैसे ही मंजर निकलने की शुरुआत हो, हेक्साकोनाजोल या डाइनो काजोल जैसे फफूंदनाशक के साथ इमिडाक्लोप्रिड का छिड़काव करना चाहिए.
अक्सर किसान सिर्फ मंजर आने पर ध्यान देते हैं, लेकिन फल तुड़ाई के बाद पेड़ों पर कॉपर ऑक्सीक्लोराइड का छिड़काव करना चाहिए. यह टहनियों और तनों में छिपे हुए पुराने रोगों के बीजाणुओं को खत्म कर देता है. अगर पिछले साल की बीमारियां पेड़ पर रहेंगी, तो वे जनवरी-फरवरी में नए मंजरों को तुरंत खराब कर देंगी. इसलिए बाग की साफ-सफाई और टहनियों की हल्की छंटाई एक स्वस्थ फसल की नींव है.
आजकल जलवायु परिवर्तन के कारण कभी भी पाला गिरता है या कोहरा छाया रहता है. ऐसी स्थिति में स्प्रे करते समय सावधानी बरतनी चाहिए. स्प्रे हमेशा साफ मौसम में, सुबह की धूप निकलने के बाद 10 बजे के बाद या दोपहर ढलने पर 3 बजे के बाद करना चाहिए. अगर बहुत ज्यादा ठंड या पाले की चेतावनी हो, तो छिड़काव कुछ दिन टाल दें.