Farmers Protest: केन-बेतवा परियोजना पर बवाल, छतरपुर में किसानों ने पुलिस-प्रशासन पर किया पथराव

Farmers Protest: केन-बेतवा परियोजना पर बवाल, छतरपुर में किसानों ने पुलिस-प्रशासन पर किया पथराव

बिजावर क्षेत्र के ढोढन-पलकोंआ गांव में 13 मई को उस समय तनाव फैल गया, जब अतिक्रमण हटाने पहुंची पुलिस और प्रशासन की टीम पर आदिवासी किसानों ने पथराव कर दिया. हालात ऐसे बने कि पुलिस और अधिकारियों को मौके से वापस लौटना पड़ा.

केन-बेतवा परियोजना पर बवालकेन-बेतवा परियोजना पर बवाल
क‍िसान तक
  • Chhatarpur,
  • May 14, 2026,
  • Updated May 14, 2026, 12:05 PM IST

मध्य प्रदेश के छतरपुर में केन-बेतवा लिंक परियोजना को लेकर चल रहा विवाद अब और ज्यादा गर्मा गया है. बिजावर क्षेत्र के ढोढन-पलकोंआ गांव में 13 मई को उस समय तनाव फैल गया, जब अतिक्रमण हटाने पहुंची पुलिस और प्रशासन की टीम पर आदिवासी किसानों ने पथराव कर दिया. हालात ऐसे बने कि पुलिस और अधिकारियों को मौके से वापस लौटना पड़ा. गुस्साए किसानों ने सिर्फ पत्थरबाजी ही नहीं की, बल्कि तहसीलदार की गाड़ी और बुलडोजर-जेसीबी मशीन के कांच भी तोड़ दिए. इस पूरी घटना का वीडियो अब सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है.

किसान लंबे समय से कर रहे हैं विरोध

दरअसल, केन नदी पर बनने वाले डैम और केन-बेतवा लिंक परियोजना को लेकर इलाके के किसान लंबे समय से विरोध कर रहे हैं. किसानों का आरोप है कि उन्हें जमीन और मकानों के बदले उचित मुआवजा नहीं मिला है. इसी मांग को लेकर कई किसान जल सत्याग्रह और चिता सत्याग्रह जैसे आंदोलन भी कर चुके हैं. किसानों के विरोध की वजह से डैम निर्माण का काम लगातार प्रभावित हो रहा है.

प्रशासनिक टीम पर किसानों ने किया पथराव

13 मई को प्रशासन भारी पुलिस बल के साथ गांव पहुंचा था, जहां एक किसान के कच्चे मकान को बुलडोजर से हटाने की कार्रवाई शुरू की गई. आरोप है कि जैसे ही मकान तोड़ा जाने लगा, ग्रामीण भड़क गए और उन्होंने प्रशासनिक टीम पर पथराव शुरू कर दिया. माहौल इतना बिगड़ गया कि अधिकारियों को कार्रवाई बीच में छोड़कर वापस लौटना पड़ा.

DM ने किसानों के आरोप को बताया गलत

उधर,  जिला कलेक्टर पार्थ जायसवाल ने किसानों के आरोपों को गलत बताया है. उनका कहना है कि प्रभावित किसानों को सरकार की ओर से उचित मुआवजा दिया जा चुका है. कलेक्टर के मुताबिक अब तक करीब 700 करोड़ रुपये किसानों को दिए जा चुके हैं, जिस किसान के मकान पर कार्रवाई हुई, उसे भी लगभग साढ़े 12 लाख रुपये का मुआवजा मिल चुका है.

जिला कलेक्टर ने यह भी कहा कि घटना में साजिश की आशंका लग रही है. उन्होंने दावा किया कि संबंधित किसान ने खुद पर रंग डालकर उसे खून जैसा दिखाने की कोशिश किया प्रशासन पूरे मामले की जांच कर रहा है और घटना में शामिल लोगों के खिलाफ जांच के बाद कार्रवाई की जाएगी.

12.5 लाख मुआवजे की मांग

प्रदर्शनकारी मांग कर रहे हैं कि मझगवां और विश्रामगंज बांधों के लिए तय 5 लाख रुपये के पुराने मुआवजे पैकेज को बढ़ाकर 12.5 लाख रुपये कर दिया जाए, ताकि यह धोदन बांध के विस्थापित लोगों को दिए गए मुआवजे के बराबर हो जाए. हालांकि, प्रशासन ने इस मांग को "नीतिगत रूप से असंभव" बताया है, क्योंकि इससे जुड़े फैसले तो सालों पहले ही हो चुके थे. इस आंदोलन की अगुवाई कर रहे सामाजिक कार्यकर्ता अमित भाटनागर ने प्रशासन के दावों को सिरे से खारिज कर दिया. उन्होंने आरोप लगाया कि प्रभावित लोगों में से सिर्फ 60 फीसदी को ही मुआवजा मिला है, और इसमें भी कई बड़ी गड़बड़ियां हैं. (लोकेश चौरसिया की रिपोर्ट)

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