
उत्तर प्रदेश के हरदोई जिले के कोतवाली देहात थाना क्षेत्र के पूरा बहादुर गांव में एक किसान की आत्महत्या ने प्रशासनिक तंत्र पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं. गांव के रहने वाले 56 वर्षीय सूबेदार सिंह का शव शुक्रवार खेत में लगे सागौन के पेड़ से रस्सी के सहारे लटका मिला. लेकिन किसान की इस आत्महत्या ने पूरे इलाके में हड़कंप मचा दिया. दरअसल, किसान ने मरने से पहले पेन से अपनी शर्ट पर लिखकर सरकारी तंत्र के एक आदमी को अपनी मौत का जिम्मेदार बता दिया. किसान ने लिखा “लेखपाल अरुणेश यादव के कारण " यह शब्द सामने आते ही गांव में सनसनी फैल गई और पुलिस के साथ प्रशासनिक अधिकारी मौके पर पहुंच गए.
परिजनों के मुताबिक किसान और उसके परिवार के नाम 50 बीघा जमीन थी, जिसमें 14 बीघा जमीन गांव में चकबंदी की प्रक्रिया के कारण नहीं चढ़ी थी. उसी को चढ़वाने को लेकर लेखपाल के पास करीब साल भर से चक्कर काट रहे थे लेकिन जमीन दर्ज न होने की वजह से उन्होंने आत्महत्या कर ली, जबकि प्रसाशनिक अधिकारी सभी जमीन चढ़ी होने का दावा करते हुए मामले की लीपापोती करने में जुटे हैं.
कोतवाली देहात के पूरा बहादुर गांव के रहने वाले 56 वर्षीय रणवीर सिंह सुबह अपने घर से निकले थे ,तब किसी परिजन को कोई अनहोनी की आशंका नहीं थी. इस बीच रणवीर के पुत्र खेत पर पहुंचे तो उन्हें अपने खेत में भीड़ लगी दिखाई दी, जब मौके पर पहुंचे तो देखा कि उनके पिता खेत में लगे सागौन के पेड़ से लटके हुए थे. जब परिजनों की नजर उनकी पहनी हुई शर्ट पर पड़ी तो देखा कि उन्होंने शर्ट पर कुछ लिखा हुआ था. एक तरफ शर्ट पर अरुणेश यादव तो दूसरी तरफ लेखपाल अरुणेश यादव के कारण, यह इबारत लिखी हुई थी.
मौत का जिम्मेदार गांव के लेखपाल को बताने के बाद पूरे गांव में हड़कंप मच गया. परिजनों के मुताबिक रणवीर सिंह पिछले एक साल से चकबंदी में हुई गड़बड़ी को लेकर अधिकारियों और लेखपालों के चक्कर काट रहे थे. गांव में हुई चकबंदी के दौरान उनकी करीब 14 बीघा जमीन रिकॉर्ड में गड़बड़ा गई थी. जमीन का शुद्धिकरण कराने के लिए उन्होंने कई बार गुहार लगाई. परिवार का आरोप है कि लेखपाल अरुणेश यादव ने काम कराने के नाम पर करीब 20 हजार रुपये भी ले लिए, लेकिन न जमीन सही हुई और न ही कोई कार्रवाई हुई. उल्टा उन्हें लगातार दौड़ाया जाता रहा.
मृतक के भतीजे गोपाल सिंह ने बेहद गंभीर आरोप लगाते हुए बताया कि वह कई बार अपने चाचा के साथ लेखपाल के पास गए थे. गोपाल के मुताबिक एक दिन लेखपाल ने रणवीर सिंह को अपमानित करते हुए 'पागल' कहकर भगा दिया था और कहा था तुम पागल हो, तुम्हारा काम नहीं हो पाएगा. परिवार का कहना है कि इस घटना के बाद रणवीर सिंह अंदर से टूट गए थे. वह गुमसुम रहने लगे, लोगों से बातचीत बंद कर दी और हर वक्त तनाव में डूबे रहते थे.
सरकारी दफ्तरों की बेइज्जती और जमीन का दर्द उन्हें धीरे-धीरे मौत की तरफ धकेलता रहा. बताया गया कि रणवीर सिंह की बेटी की शादी अभी 20 अप्रैल को हुई थी. परिवार में दो बेटे निशांत और अभिषेक प्रताप सहित उनकी तीन बेटियां हैं, जिनमें दो की शादी हो चुकी है. घर की जिम्मेदारियों और जमीन के संकट के बीच रणवीर सिंह लगातार मानसिक दबाव झेल रहे थे. शुक्रवार सुबह करीब 4 बजे वह घर से निकले और कुछ देर बाद खेत में उनका शव फांसी पर लटका मिला.
घटना के बाद गांव में भारी आक्रोश है. लोग खुलकर सवाल उठा रहे हैं कि आखिर एक किसान को अपनी ही जमीन के लिए इतना अपमान क्यों सहना पड़ा कि उसे मौत को गले लगाना पड़ गया. फिलहाल पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है. प्रशासनिक अधिकारियों का कहना है कि मृतक की शर्ट पर लिखे संदेश समेत पूरे मामले की गंभीरता से जांच की जा रही है और जांच के बाद कार्रवाई की जाएगी. फिलहाल मौके पर मौजूद प्रशासनिक अधिकारी आरोपी लेखपाल और अपनी जवाबदेही से बचने के लिए पूरे मामले में गोलमोल जवाब देकर लीपापोती करने में जुटे हैं. (प्रशांत पाठक की रिपोर्ट)