खेतिहर और मनरेगा मजदूरों की देशव्यापी हड़ताल का ऐलान, SKM ने किया समर्थन

खेतिहर और मनरेगा मजदूरों की देशव्यापी हड़ताल का ऐलान, SKM ने किया समर्थन

संयुक्त किसान मोर्चा (SKM) ने देशभर के अपने सभी सदस्य संगठनों से 15 मई को होने वाली खेतिहर, मनरेगा मजदूर हड़ताल का समर्थन करने की अपील की है. हड़ताल में शामिल संगठन मांग कर रहे हैं कि वीबी ग्राम (जी) अधिनियम को वापस लिया जाए और 2005 के मनरेगा कानून को पहले की तरह मजबूत तरीके से लागू किया जाए.

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खेतिहर और मनरेगा मजदूरों की देशव्यापी हड़ताल का ऐलान, SKM ने किया समर्थनमजदूरों की देशव्यापी हड़ताल का ऐलान (AI- तस्वीर)

संयुक्त किसान मोर्चा (SKM) ने देशभर के अपने सभी सदस्य संगठनों से 15 मई को होने वाली खेतिहर, मनरेगा मजदूर हड़ताल का समर्थन करने की अपील की है. यह हड़ताल खेत मजदूर संगठनों के संयुक्त मंच और मनरेगा संघर्ष मोर्चा के आह्वान पर आयोजित की जा रही है. खेतिहर मजदूरों का कहना है कि मनरेगा में नई तकनीकों और नियमों की वजह से गरीब लोगों के लिए काम पाना मुश्किल होता जा रहा है. खासकर फेसियल रिकग्निशन जैसी उपस्थिति प्रणाली के कारण कई मजदूरों को काम से बाहर होना पड़ रहा है. हड़ताल में शामिल संगठन मांग कर रहे हैं कि वीबी ग्राम (जी) अधिनियम को वापस लिया जाए और 2005 के मनरेगा कानून को पहले की तरह मजबूत तरीके से लागू किया जाए.

मजदूरों को साल में 200 दिनों का मिले रोजगार

उनकी मांग है कि मजदूरों को साल में 200 दिनों का रोजगार मिले और कम से कम 700 रुपये रोज की मजदूरी तय हो, जिसे हर साल महंगाई के हिसाब से बढ़ाया जाए. इसके साथ ही मजदूर संगठन चाहते हैं कि गांव की ग्राम सभाओं को ज्यादा अधिकार दिए जाएं, ताकि मनरेगा के कामों का फैसला गांव के लोग खुद कर सकें और योजनाओं का फायदा सही लोगों तक पहुंचे.

सरकार का दावा वीबी-ग्राम (जी) अच्छी योजना

वीबी-ग्राम (जी) लागू होने के बाद से केंद्र सरकार लगातार यह दावा कर रही है कि नया कानून पुराने मनरेगा कानून से बेहतर है. सरकार का कहना है कि इसमें खेती के व्यस्त सीजन का ध्यान रखा गया है और मजदूरों को ज्यादा दिनों तक काम मिलेगा. लेकिन मजदूर संगठनों और किसान नेताओं का आरोप है कि जमीन पर स्थिति बिल्कुल अलग है. उनका कहना है कि नए कानून से काम के दिनों में कोई खास बढ़ोतरी नहीं होगी, बल्कि काम देने का अधिकार अब सरकारी बजट और फंड पर ज्यादा निर्भर हो गया है. यानी जिन लोगों को कानून के तहत काम मिलने का अधिकार था, उनके साथ अन्याय हो रहा है.

संगठनों का कहना है कि इससे गांवों में बेरोजगारी और बढ़ सकती है. साथ ही गरीब मजदूरों की मुश्किलें भी बढ़ेंगी, क्योंकि काम नहीं मिलने पर वे गांव के बड़े जमींदारों और संपन्न लोगों पर ज्यादा निर्भर हो जाएंगे और शोषण का खतरा भी बढ़ जाएगा.

संयुक्त किसान मोर्चा कि ये है मांग

संयुक्त किसान मोर्चा (SKM) ने मांग की है कि केंद्र सरकार मनरेगा जैसी योजनाओं में पहले की तरह 90 फीसदी आर्थिक हिस्सा देना फिर से शुरू करें, ताकि मजदूरों को बिना रुकावट काम मिल सके. संगठन का कहना है कि महाराष्ट्र की रोजगार गारंटी योजना (EGS) 1977 जैसे राज्य कानून भी जारी रहने चाहिए. उन्होंने याद दिलाया कि 2016 में मुंबई हाई कोर्ट ने ऐसे राज्य कानूनों को जारी रखने की अनुमति दी थी.

किसानों की कर्ज माफी सहित ये मांग

SKM का कहना है कि मजदूरों, खेत मजदूरों और किसानों के अलग-अलग संगठनों को मिलकर देशभर में बड़ा और एकजुट आंदोलन चलाना होगा. उनका मानना है कि लगातार दबाव बनने पर केंद्र सरकार को वीबी जीआरएम (जी) अधिनियम 2025 वापस लेने के लिए मजबूर किया जा सकता है. इसके साथ ही संगठन MSP को लेकर भी बड़ी मांग कर रहा है. उनका कहना है कि सभी फसलों पर C2+50% के फार्मूले के अनुसार कानूनी गारंटी वाला MSP और सरकारी खरीद सुनिश्चित की जाए. साथ ही किसानों की कर्ज माफी, 4 श्रम संहिताओं को वापस लेने और कुछ मुक्त व्यापार समझौतों को रद्द करने की भी मांग की जा रही है.

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