
पंजाब-हरियाणा के बॉर्डर पर पिछले 11 महीनों से किसान आंदोलन जारी है. इस आंदोलन में किसान नेता जगजीत सिंह डल्लेवाल ने एक बार फिर से जान फूंक दिया है. वहीं, आज उनके अनशन का 51वां दिन है. उनकी हालत दिन-ब-दिन गंभीर होती जा रही है. डॉक्टरों ने मेडिकल बुलेटिन जारी करते हुए कहा कि पिछले 48 घंटे से जगजीत सिंह डल्लेवाल को पानी पीने में भी दिक्कत आ रही है, जितना पानी वो पीते हैं, वो उल्टियों के तौर पर बाहर आ जाता है. उनके शरीर के अंग अंदर से काम करना बंद कर रहे हैं, इसलिए वो पानी भी नहीं पी पा रहे हैं.
डॉक्टरों ने बताया कि उनका शरीर मल्टीपल ऑर्गन फेलियर की तरफ बढ़ रहा है जो बेहद चिंताजनक स्थिति है. इस बीच किसान नेताओं ने बताया कि आज किसान बेहद भावुक हैं. किसानों का मानना है कि जगजीत सिंह डल्लेवाल की कुर्बानी से पहले वो अपनी कुर्बानी देंगे. साथ ही आज दोपहर 2 बजे 111 किसानों का जत्था काले कपड़े पहनकर पुलिस की बैरिकेडिंग के पास शांतिपूर्ण ढंग से बैठकर आमरण अनशन शुरू करेगा.
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किसान नेताओं ने बताया कि MSP गारंटी कानून के मुद्दे पर आंदोलनकारी किसानों के साथ सार्थक चर्चा करने की बजाय कुछ बीजेपी नेता लोगों को MSP के मुद्दे पर गुमराह करने का प्रयास कर रहे हैं. वहीं, कल हरियाणा के कैथल जिले से किसानों का बड़ा जत्था जगजीत सिंह डल्लेवाल के समर्थन में दातासिंह वाला खनौरी किसान मोर्चे पर पहुंचा और ऐलान किया कि वे डल्लेवाल के रास्ते पर चल रहे हैं और उनके लिए अपनी स्वयं की कुर्बानी देने के लिए तैयार हैं. साथ ही कल बजरंग दास गर्ग के नेतृत्व में हरियाणा व्यापार मंडल की पूरी कार्यकारिणी जगजीत सिंह डल्लेवाल का समर्थन करने के लिए किसान मोर्चे पर पहुंची थी.
बता दें कि सुप्रीम कोर्ट किसान नेता जगजीत सिंह डल्लेवाल के स्वास्थ्य से जुड़े मामले और अन्य याचिकाओं पर आज यानी 15 जनवरी को सुनवाई करेगा. डल्लेवाल अपनी मांगों को लेकर अनिश्चितकालीन अनशन पर है. जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस एन कोटिश्वर सिंह की पीठ डल्लेवाल की ओर से दायर याचिका पर सुनवाई करेगी. याचिका में केंद्र सरकार को फसलों पर एमएसपी की कानूनी गारंटी समेत एक प्रस्ताव लागू करने का निर्देश देने की मांग की गई है. यह प्रस्ताव कृषि कानूनों के निरस्त होने के बाद 2021 में प्रदर्शनकारी किसानों को दिया गया था.
शीर्ष अदालत ने केंद्र से पूछा था कि सरकार यह क्यों नहीं कह सकती कि उसके दरवाजे खुले हैं और वह फसलों के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य की कानूनी गारंटी समेत मांगों को लेकर प्रदर्शन कर रहे किसानों की वास्तविक शिकायतों पर विचार करेगी.