
महाराष्ट्र के अकोला शहर के तापमान में लगातार बढ़ोतरी के बीच बुधवार को एक बड़ी दुर्घटना टल गई. दरअसल, शहर से सटे गायगांव क्षेत्र में स्थित तेल डिपो के पास गेहूं के खेत में अचानक भीषण आग लग गई, जिससे कुछ समय के लिए पूरे इलाके में अफरा-तफरी मच गई. जानकारी के अनुसार, इन दिनों अकोला में तापमान 40 डिग्री सेल्सियस के करीब पहुंच चुका है और खेतों में रबी फसल की कटाई का काम जोरों पर है. इसी दौरान गायगांव स्थित उस खेत में आग भड़क उठी, जो सीधे पेट्रोल-डीजल सप्लाई करने वाले बड़े ऑयल डिपो के समीप स्थित है.
यह डिपो विदर्भ और मराठवाड़ा के कई जिलों में पेट्रोल और डीजल की आपूर्ति करता है. यहां भारत पेट्रोलियम, इंडियन ऑयल और हिंदुस्तान पेट्रोलियम के लाखों लीटर ईंधन से भरे टैंक मौजूद हैं. इतना ही नहीं, डिपो परिसर में ईंधन भरवाने के लिए खड़े कई टैंकर भी मौजूद थे. प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, आग गेहूं की पराली में लगी और देखते ही देखते पूरे खेत में फैल गई. तेज गर्मी और सूखी पराली के कारण आग ने कुछ ही मिनटों में विकराल रूप धारण कर लिया.
स्थिति की गंभीरता को समझते हुए स्थानीय किसानों और नागरिकों ने बिना समय गंवाए मौके पर पहुंचकर आग बुझाने का प्रयास शुरू किया. उन्होंने पेड़ों की हरी-गीली टहनियों और पत्तों की मदद से आग पर काबू पाया. खास बात यह रही कि अकोला महानगरपालिका की फायर ब्रिगेड मौके पर पहुंचती, उससे पहले ही स्थानीय लोगों ने आग पूरी तरह बुझा दी. जानकारी के अनुसार, आग लगने का कारण शॉर्ट सर्किट बताया जा रहा है. हालांकि, प्रशासन द्वारा इसकी जांच की जा रही है.
घटनास्थल से महज 500 से 1000 मीटर की दूरी पर स्थित इस ऑइल डिपो में लाखों लीटर ज्वलनशील पदार्थ मौजूद होने के कारण यह घटना बेहद संवेदनशील बन गई थी. यदि समय रहते आग पर काबू नहीं पाया जाता, तो बड़ा विस्फोट और जनहानि हो सकती थी. इस घटना ने एक बार फिर ग्रामीण क्षेत्रों में फायर सेफ्टी व्यवस्था की पोल खोल दी है. साथ ही, स्थानीय किसानों की सतर्कता और साहस के चलते एक संभावित बड़ी आपदा टल गई.