
पराली प्रबंधन से बदलेगी खेतीउत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर जिले सिसौली स्थित किसान भवन में आयोजित चार दिवसीय प्राकृतिक खेती शिविर के दूसरे दिन देशभर से आए किसानों को खेती से जुड़ी नई और आसान जानकारी दी गई. इस दौरान मशहूर कृषि विशेषज्ञ सुभाष पालेकर ने किसानों को वर्मी कंपोस्ट, पराली प्रबंधन और प्राकृतिक खेती के बारे में समझाया. उन्होंने कहा कि अगर खेती को लंबे समय तक फायदेमंद बनाना है तो हमें प्राकृतिक संसाधनों का सही इस्तेमाल करना होगा.
अपने संबोधन में सुभाष पालेकर ने कहा कि खेती को लाभकारी और टिकाऊ बनाने के लिए प्राकृतिक संसाधनों का संरक्षण अत्यंत आवश्यक है. उन्होंने वर्मी कंपोस्ट के महत्व पर प्रकाश डालते हुए बताया कि यह मिट्टी की उर्वरता बढ़ाने के साथ-साथ रासायनिक उर्वरकों पर निर्भरता कम करता है. इससे किसानों की लागत घटती है और उत्पादन की क्वालिटी में सुधार होता है.
पराली जलाने के विषय में उन्होंने नई नीतियों और आधुनिक तकनीकों के उपयोग पर जोर देते हुए कहा कि पराली जलाना पर्यावरण और मिट्टी दोनों के लिए हानिकारक है. उन्होंने किसानों को प्रेरित किया कि वे पराली को जलाने के बजाय उसे जैविक खाद के रूप में उपयोग करें, जिससे पर्यावरण संरक्षण के साथ-साथ खेती को भी लाभ मिल सके.

इस अवसर पर गौतम बुद्ध नगर से आए किसानों ने सुभाष पालेकर का पगड़ी बांधकर सम्मान किया. कार्यक्रम में उत्तर प्रदेश सहित अलग-अलग राज्यों और जनपदों से बड़ी संख्या में किसान शामिल हुए, जो प्राकृतिक खेती के प्रति बढ़ती जागरूकता को दर्शाता है. इस दौरान भारतीय किसान यूनियन के राष्ट्रीय प्रवक्ता राकेश टिकैत ने रासायनिक खेती के दुष्प्रभावों पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि आज इसका खामियाजा पूरा समाज भुगत रहा है.
किसान नेता राकेश टिकैत ने कहा कि रासायनिक उर्वरकों और कीटनाशकों के अत्यधिक प्रयोग से मिट्टी की क्वालिटी लगातार गिर रही है और इसका सीधा असर किसानों की आय और आमजन के स्वास्थ्य पर पड़ रहा है. उन्होंने किसानों से अपील किया कि वे प्राकृतिक खेती को अपनाकर न केवल अपनी लागत कम करें, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए सुरक्षित और स्वस्थ वातावरण भी सुनिश्चित करें. टिकैत ने कहा कि ऐसे शिविर किसानों को नई दिशा देने का कार्य कर रहे हैं और उन्हें आधुनिक और टिकाऊ खेती की ओर अग्रसर कर रहे हैं. शिविर के दूसरे दिन का समापन किसानों की सक्रिय भागीदारी और उत्साह के साथ हुआ.
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