Success Story: तंगी खत्म, गांव हर किसान लखपति, एक किसान के 12 गुना कमाई वाले फॉर्मूले ने बदली सबकी किस्मत

Success Story: तंगी खत्म, गांव हर किसान लखपति, एक किसान के 12 गुना कमाई वाले फॉर्मूले ने बदली सबकी किस्मत

महाराष्ट्र के छत्रपति संभाजीनगर में जहां किसान कपास और बाजरा की खेती में घाटा सह रहे थे, वहीं एक किसान ने रेशम कीट पालन को अपनाकर अपनी कमाई को 12 गुना बढ़ा लिया जो किसान साल भर में मुश्किल से 93 हजार रुपये कमा पाता था, वह आज सालाना 13 लाख रुपये से ज्यादा का टर्नओवर ले रहा है। उन्होंने ' वैज्ञानिक तरीके से रेशम के बीज तैयार किए, जिससे बाजार और मोटा मुनाफा दोनों पक्का हो गया,सदाशिव की इस सफलता ने पूरे इलाके में जोश भर दिया है,आज उनके गांव के 90 फीसदी किसान उन्हीं का 'रेशम मंत्र' अपनाकर लखपति बन चुके हैं.अब यह गांव तंगी के लिए नहीं, बल्कि अपनी खुशहाली और बंपर कमाई के लिए जाना जाता है

हाई तकनीक से रेशम की खेतीहाई तकनीक से रेशम की खेती
जेपी स‍िंह
  • नई दिल्ली,
  • Feb 08, 2026,
  • Updated Feb 08, 2026, 10:59 AM IST

महाराष्ट्र के छत्रपति संभाजीनगर जिले में जहां अक्सर किसान कपास, और बाजरा जैसी पारंपरिक फसलों में लागत न निकलने और पानी की कमी से परेशान रहते हैं, वहीं देवगांव के 45 वर्षीय किसान सदाशिव गोपीनाथ गीते ने अपनी सोच बदलकर खेती की तस्वीर बदल दी है. पहले जहां वे साल भर हाड़-तोड़ मेहनत करके मात्र 93,000 रुपये ही कमा पाते थे, वहीं रेशम कीट पालन यानि सेरीकल्चर की आधुनिक तकनीक और हाइब्रिड बीज उत्पादन को अपनाकर आज वे सालाना 13 लाख रुपये से ज्यादा का मुनाफा ले रहे हैं. उन्होंने पारंपरिक खेती के घाटे के चक्र को तोड़ते हुए अपनी कमाई में 12 गुना से अधिक की बढ़ोतरी की है. सदाशिव ने न केवल खुद को आर्थिक रूप से मजबूत किया, बल्कि अपने गांव के 90 प्रतिशत किसानों को भी बदलाव का रास्ता दिखाया, जिससे आज उनका पूरा इलाका रेशम उत्पादन का एक बड़ा हब बन गया है और हर घर में बंपर कमाई हो रही है.

खेती का नजरिया बदला और चमक गई किस्मत

महाराष्ट्र के छत्रपति संभाजीनगर जिले के देवगांव के किसान सदाशिव गोपीनाथ गीते की कहानी संघर्ष से सफलता की ओर एक बड़ा बदलाव किया. साल 2018-19 तक सदाशिव पूरी तरह से कपास, तुअर (अरहर) और बाजरा जैसी पारंपरिक फसलों पर निर्भर थे. कड़ी मेहनत के बावजूद, इन फसलों से मिलने वाली आय बहुत कम थी और सालभर में वे बमुश्किल 93,000 रुपये का मुनाफा कमा पाते थे. खेती की बढ़ती लागत और अनिश्चित मॉनसून के कारण जीवन यापन मुश्किल होता जा रहा था. इसी दौरान उन्होंने रेशम कीट पालन के क्षेत्र में उतरने का फैसला किया और 3 एकड़ भूमि में शहतूत की खेती शुरू की. यह फैसला उनके जीवन का टर्निंग पॉइंट साबित हुआ, जिसने उन्हें एक साधारण किसान से एक सफल एग्री एंटरप्रेन्योर बना दिया.

सफलता की ओर एक बड़ा बदलाव

कपास-बाजरा छोड़ा और रेशम से नाता जोड़ा

सदाशिव ने अपने काम को और अधिक पेशेवर बनाने के लिए 'एक कंपनी के साथ हाथ मिलाया. उन्होंने केवल रेशम के कोकून उत्पादन तक सीमित रहने के बजाय 'हाइब्रिड सिल्कवर्म सीड प्रोडक्शन' FC1 और FC2 किस्म के बीज पर ध्यान केंद्रित किया. इस नवाचार की सबसे बड़ी खूबी 'बाय-बैक एग्रीमेंट' है, जिसके तहत कंपनी उन्हें रेशम कीट के बीज उपलब्ध कराती है और उत्पादन के बाद उनके द्वारा तैयार किए गए बीजों को वापस खरीद लेती है. इससे बाजार में फसल न बिकने का डर खत्म हो गया और उन्हें एक सुनिश्चित आय का जरिया मिल गया. आज वे साल भर में हाइब्रिड बीजों के 10 बैच तैयार करते हैं, जिससे उनके खेत में साल के 12 महीने काम और कमाई बनी रहती है.

परंपरागत खेती फेल, रेशम पालन हिट

सदाशिव की सफलता के पीछे उनकी तकनीकी सूझबूझ का बड़ा हाथ है. उन्होंने कोकून की उम्र और गुणवत्ता बढ़ाने के लिए कई वैज्ञानिक तरीके अपनाए. उन्होंने मिट्टी की उर्वरता बढ़ाने के लिए प्रति हेक्टेयर 1 से 2 टन गोबर की खाद  का नियमित प्रयोग किया. रेशम कीट पालन में तापमान का बहुत महत्व होता है, जिसे सदाशिव ने बखूबी समझा. उन्होंने कीटों के लिए अनुकूल 18 से 24 डिग्री सेल्सियस का तापमान बनाए रखने की तकनीक विकसित की, जिससे रेशम के धागे की गुणवत्ता बेहतर हुई और कोकून ज्यादा समय तक सुरक्षित रहने लगे. यह नवाचार पूरी तरह से व्यावसायिक बीज उत्पादन पर केंद्रित है, जो सामान्य रेशम उत्पादन की तुलना में काफी अधिक लाभ देता है.

एक  मंत्र ने पूरे गांव को बना दिया मालामाल

रेशम कीट पालन अपनाने के बाद सदाशिव की आर्थिक स्थिति में जो उछाल आया, वह हैरान करने वाला है. साल 2020-21 में, उन्होंने केवल 3 एकड़ जमीन से कोकून उत्पादन के जरिए 5,80,000 रुपये कमाए. उनकी प्रगति यहीं नहीं रुकी; साल 2022-23 में उन्होंने 6 एकड़ जमीन पर व्यावसायिक बीज उत्पादन FC1 और FC2 किया, जिससे उनकी आय बढ़कर 13,20,000 रुपये तक पहुंच गई. उनकी इस अपार सफलता ने आसपास के किसानों को भी प्रेरित किया. आज उनके अकेले के गाँव देवगांव में ही 90 से अधिक किसानों ने अपनी रेशम इकाइयाँ स्थापित कर ली हैं. सदाशिव अब केवल एक किसान नहीं, बल्कि एक मार्गदर्शक बन गए हैं जिन्होंने पूरे क्षेत्र के लिए आजीविका के नए द्वार खोले हैं

रेशम मंत्र' ने पूरे गांव की गरीबी दूर कर दी

सदाशिव गोपीनाथ गीते का यह मॉडल पूरे महाराष्ट्र और देश के अन्य हिस्सों में भी लागू किया जा सकता है. खास तौर पर उन क्षेत्रों में जहाँ शहतूत की खेती की संभावना है, छोटे और सीमांत किसान इस तकनीक को अपनाकर अपनी गरीबी दूर कर सकते हैं. हालांकि, इस नवाचार को और अधिक ऊंचाइयों तक ले जाने के लिए बीज की गुणवत्ता, हाइब्रिड ताकत और अलग-अलग मौसम में इनकी अनुकूलता का वैज्ञानिक सत्यापन ( जरूरी है. अगर सरकार और कृषि विभाग ऐसे नवाचारों को बढ़ावा दें, तो रेशम उत्पादन के क्षेत्र में भारत एक बड़ी क्रांति देख सकता है. सदाशिव ने साबित कर दिया है कि अगर सही तकनीक और बाजार का साथ मिले, तो खेती से भी करोड़ों की कमाई मुमकिन है.

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