मेले का अवलोकन करते हुए केंद्रीय पशुपालन एवं डेयरी मंत्रीहरियाणा की देसी गायों ने सिर्फ देश में ही नहीं, बल्कि वैश्विक स्तर पर अपनी खास पहचान बनाई है. दूध उत्पादन के क्षेत्र में हरियाणा आज देश के अग्रणी राज्यों में शामिल है. केंद्रीय मत्स्य, पशुपालन एवं डेयरी और पंचायती राज मंत्री राजीव रंजन सिंह उर्फ ललन सिंह ने यह बात कुरुक्षेत्र में आयोजित 41वें राज्य स्तरीय पशुधन मेला एवं प्रदर्शनी के दौरान कही.
केंद्रीय मंत्री ने मेले का अवलोकन करते हुए कहा कि हरियाणा नस्ल की गायें अपनी उत्पादक क्षमता और गुणवत्ता के कारण पूरी दुनिया में विख्यात हैं. उन्होंने राज्य सरकार से आग्रह किया कि हर गांव में सहकारी समितियों को मजबूत किया जाए, ताकि पशुपालकों को सीधा लाभ मिल सके और दूध के कलेक्शन और निर्यात को नई गति दी जा सके.
नस्ल सुधार पर जोर देते हुए ललन सिंह ने बताया कि पशुपालन विभाग की ओर से कुछ पशुओं में जिनोमिक चिप लगाई जा रही हैं, जिससे बीमारियों और शारीरिक बदलावों की समय-समय पर जानकारी मिल सके. इसके साथ ही एनडीएलएम कार्यक्रम के तहत एफएमडी टीकाकरण किया जा रहा है और हरियाणा में केंद्र सरकार की ओर से ये वैक्सीन मुफ्त उपलब्ध कराई जा रही हैं.
ललन सिंह ने कहा कि धर्मनगरी कुरुक्षेत्र की धरती पर आयोजित यह पशुधन मेला केवल एक प्रदर्शनी नहीं, बल्कि पशुपालन क्षेत्र की ताकत और संभावनाओं का प्रतीक है. प्रदेश के अलग-अलग जिलों से आए पशुपालक अपनी उन्नत नस्लों के पशुओं के साथ यहां पहुंचे हैं, जो यह दिखाता है कि पशुपालकों का अपने पशुओं के प्रति गहरा लगाव है. उन्होंने कहा कि देश में करीब 10 करोड़ लोगों की आजीविका प्रत्यक्ष या परोक्ष रूप से पशुधन पर निर्भर है और इस क्षेत्र ने महिलाओं के आर्थिक सशक्तिकरण में भी अहम योगदान दिया है.
केंद्रीय मंत्री ने कहा कि केंद्र सरकार डेयरी और पशुपालन के विकास के लिए लगातार योजनाएं चला रही है और भविष्य में इस क्षेत्र को और मजबूत करने के लिए नई योजनाएं भी लाई जाएंगी. उन्होंने बताया कि वर्तमान में पशुपालन और डेयरी से जुड़ा बाजार लगभग 19 लाख करोड़ रुपए का हो चुका है, जो इसकी बढ़ती आर्थिक अहमियत को दर्शाता है.
उन्होंने आंकड़ों का हवाला देते हुए कहा कि वर्ष 2014 में देश में दूध का कुल उत्पादन करीब 146.3 मिलियन टन था, लेकिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में पशुपालन क्षेत्र पर विशेष ध्यान दिए जाने से आज यह उत्पादन बढ़कर करीब 248 मिलियन टन तक पहुंच गया है. कृषि विभाग से अलग पशुपालन का स्वतंत्र मंत्रालय बनाए जाने से इस क्षेत्र को नई दिशा मिली है और भारत आज दुनिया में सबसे ज्यादा दूध उत्पादन करने वाला देश बन चुका है.
उन्होंने बताया कि प्रदेश में करीब 70 मोबाइल वेटनरी क्लीनिक भी चलाए जा रहे हैं, ताकि पशुपालकों को उनके गांव के पास ही पशु चिकित्सा सेवाएं मिल सकें. केंद्रीय मंत्री ने विश्वास जताया कि आत्मनिर्भर भारत के लक्ष्य को हासिल करने में पशुपालक और डेयरी क्षेत्र आने वाले समय में और बड़ी भूमिका निभाएंगे.
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