
इंडिया-यूएस अंतरिम व्यापार समझौते को लेकर कांग्रेस ने केंद्र सरकार पर सीधा हमला बोला है. पार्टी ने कहा कि यह समझौता किसी बराबरी की डील नहीं, बल्कि देश के हितों और आत्मसम्मान के साथ समझौता है. कांग्रेस ने आरोप लगाया कि इस फैसले से भारत अमेरिकी उत्पादों का डंपिंग ग्राउंड बन जाएगा और इसका सबसे बड़ा नुकसान किसानों, MSME और मध्यम वर्ग को होगा. कांग्रेस के मीडिया और पब्लिसिटी विभाग के प्रमुख पवन खेड़ा ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि यह समझौता भारत के 75 वर्षों के आर्थिक और राजनीतिक रुख के खिलाफ है.
वहीं, कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने संयुक्त बयान में इस्तेमाल हुए ‘एडिशनल प्रोडक्ट्स’ शब्द पर सवाल उठाते हुए कहा कि यह बहुत खुला और अस्पष्ट है. उन्होंने आशंका जताई कि इससे GM फसलों और डेयरी आयात का रास्ता खुल सकता है, जिससे किसानों की चिंताएं और बढ़ेंगी.
पवन खेड़ा ने केंद्र सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि डील का नाम भले ही समझौता हो, लेकिन असल में यह दबाव में किया गया आत्मसमर्पण है. खेड़ा ने कहा कि बराबरी की बातचीत तब होती है जब दोनों पक्ष आमने-सामने बैठकर शर्तें तय करें, न कि सिर पर बंदूक रखकर.
कांग्रेस नेता ने दावा किया कि इस समझौते के बाद भारत में अमेरिकी कृषि और औद्योगिक उत्पादों की बाढ़ आ सकती है. इससे घरेलू किसानों की कमर टूटेगी और छोटे उद्योगों के लिए बाजार और सिमट जाएगा. उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि अमेरिका भारत पर रूस से तेल खरीद को लेकर निगरानी रख रहा है और इसी दबाव में यह ढांचा तय हुआ है.
सरकार के बचाव पर भी कांग्रेस ने सवाल उठाए. केंद्रीय वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल के उस बयान पर कांग्रेस ने आपत्ति जताई, जिसमें कहा गया कि डेयरी उत्पादों पर कोई रियायत नहीं दी गई है और अमेरिकी बाजार में भारतीय उत्पादों को कम टैरिफ का फायदा मिलेगा. कांग्रेस ने कहा कि सरकार ने यह तो बताया कि क्या नहीं आएगा, लेकिन यह नहीं बताया कि आखिर कौन से उत्पाद भारत में आएंगे और किन पर जीरो ड्यूटी लगेगी.
पार्टी ने दावा किया कि अगले पांच साल में अमेरिका से 500 अरब डॉलर के उत्पाद खरीदने की मंशा से भारत का आयात बिल तेजी से बढ़ेगा. डॉलर के मुकाबले कमजोर होती रुपये की स्थिति में यह देश की अर्थव्यवस्था पर अतिरिक्त दबाव डालेगा. पार्टी ने यह भी आरोप लगाया कि अब सरकार के बड़े फैसले भारतीय समय नहीं, बल्कि अमेरिकी समय के हिसाब से लिए जा रहे हैं. (पीटीआई)