
संयुक्त किसान मोर्चा (एसकेएम) ने अमेरिका के साथ प्रस्तावित अंतरिम व्यापार समझौते को लेकर केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला है. संगठन ने वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल के तत्काल इस्तीफे की मांग करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से अमेरिका के साथ किसी भी तरह के व्यापार समझौते पर हस्ताक्षर न करने की अपील की है. एसकेएम ने चेतावनी दी कि अगर सरकार समझौते से पीछे नहीं हटी तो देशभर में व्यापक, एकजुट और निर्णायक जनआंदोलन शुरू किया जाएगा.
संयुक्त किसान मोर्चा ने शनिवार को एक प्रेस बयान जारी कर कहा कि अमेरिका-भारत अंतरिम व्यापार समझौते का जो ढांचा सामने आया है, वह आरएसएस-भाजपा सरकार की आत्मनिर्भरता की बातों के बिल्कुल उलट है. यह समझौता अमेरिकी कृषि बहुराष्ट्रीय कंपनियों के सामने पूर्ण आत्मसमर्पण का दस्तावेज है, जिससे भारतीय कृषि, डेयरी और ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर गहरा संकट खड़ा हो जाएगा.
किसान संगठन ने आरोप लगाया कि कि सरकार की ओर से प्रेस सूचना ब्यूरो पर उपलब्ध जानकारी (डील पर साझा बयान) के अनुसार, भारत अमेरिका के औद्योगिक उत्पादों के साथ-साथ कृषि और खाद्य उत्पादों की एक बड़ी सूची पर टैरिफ समाप्त या कम करने को तैयार है.
इसमें DDG, पशु आहार के लिए ज्वार, मेवे, ताजे और प्रोसेस्ड फल, सोयाबीन तेल, शराब और स्पिरिट जैसे उत्पाद शामिल हैं. एसकेएम ने कहा कि यह स्थिति सीधे तौर पर वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल के उन दावों का खंडन करती है, जिसमें उन्होंने कहा था कि कृषि और डेयरी को मुक्त व्यापार समझौतों से बाहर रखा गया है.
संयुक्त किसान मोर्चा ने कहा कि डेयरी उत्पाद पहले ही ब्रिटेन, न्यूजीलैंड और यूरोपीय संघ के साथ हुए समझौतों में शामिल किए जा चुके हैं. ऐसे में अब अमेरिका के साथ भी कृषि और डेयरी बाजार खोलना यह साबित करता है कि सरकार किसानों को गुमराह कर रही है. संगठन ने इसे विश्वासघात करार देते हुए पीयूष गोयल की भूमिका को किसान विरोधी बताया और उनके इस्तीफे की मांग दोहराई.
एसकेएम ने यह भी आरोप लगाया कि जिस समझौते को सरकार मुक्त व्यापार बता रही है, वह वास्तव में असमान और एकतरफा है. अमेरिका जहां भारतीय उत्पादों पर 18 प्रतिशत तक शुल्क लगा रहा है, वहीं भारत अपने 30 से 150 प्रतिशत तक के कृषि शुल्क को शून्य करने की दिशा में बढ़ रहा है. इससे भारतीय बाजार अमेरिकी कंपनियों के लिए पूरी तरह खुल जाएगा और घरेलू किसान प्रतिस्पर्धा में टिक नहीं पाएंगे.
किसान संगठन ने गैर-शुल्क बाधाओं (NTBs) को हटाने पर भी कड़ा विरोध जताया. कहा कि इससे अमेरिका से दूध और डेयरी उत्पादों का आयात आसान होगा. संगठन ने दावा किया कि अब तक मांसाहार आधारित पशुओं से प्राप्त दूध को लेकर जो आपत्तियां थीं, उन्हें भी दबाव में हटाया जा रहा है. इससे लाखों छोटे दुग्ध उत्पादकों की आजीविका खतरे में पड़ जाएगी.
मक्का, सोयाबीन और ज्वार को पशु आहार के रूप में बड़े पैमाने पर आयात किए जाने की आशंका जताते हुए एसकेएम ने कहा कि इससे भारतीय पशु आहार बाजार पर अमेरिकी कंपनियों का एकाधिकार हो जाएगा. साथ ही जीएम खाद्य पदार्थों और बीजों के आयात को लेकर भी संगठन ने गंभीर चिंता जताई और इसे देश की मिट्टी, जैव विविधता और खाद्य सुरक्षा के लिए खतरनाक बताया.
संयुक्त किसान मोर्चा ने ताजे फलों और सूखे मेवों के आयात को पहाड़ी और पूर्वोत्तर राज्यों के किसानों के लिए विनाशकारी करार दिया. कहा कि सेब, अनानास, नारियल और काजू जैसे उत्पादों का सस्ता आयात स्थानीय किसानों को बाजार से बाहर कर देगा.
एसकेएम ने मौजूदा आर्थिक हालात का जिक्र करते हुए कहा कि केंद्रीय बजट 2026-27 पहले ही कृषि विकास और रोजगार सृजन में गिरावट को उजागर कर चुका है. न्यूनतम समर्थन मूल्य लागत से नीचे है, बाजार भाव एमएसपी से कम हैं, खाद और डीजल महंगे हो रहे हैं और किसान कर्ज के बोझ तले दबे हैं. ऐसे में सस्ते आयात किसानों पर दोहरी मार साबित होंगे.
किसान संगठन ने सभी राजनीतिक दलों, ट्रेड यूनियनों और जन संगठनों से अपील की है कि वे इस कथित राष्ट्र-विरोधी व्यापार समझौते के खिलाफ एकजुट हों. संयुक्त किसान मोर्चा ने 12 फरवरी 2026 को देशभर में विरोध प्रदर्शन और आम हड़ताल का आह्वान किया है और कहा है कि यही सरकार की नीतियों का करारा जवाब होगा.