
भारत और अमेरिका के बीच प्रस्तावित अंतरिम व्यापार समझौते को लेकर सेब आयात पर उठे सवालों को लेकर केंद्रीय वाणिज्य और उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने सरकार का पक्ष रखा. उन्होंने कहा कि इस समझौते से देश के सेब उत्पादक किसानों के हितों पर कोई आंच नहीं आएगी. अमेरिका से सेब आयात को लेकर सरकार ने ऐसे प्रावधान किए हैं, जिससे घरेलू किसानों को पूरी तरह सुरक्षा मिलेगी और बाजार में सस्ते आयात से कीमतों पर दबाव नहीं पड़ेगा.
केंद्रीय मंत्री ने कहा कि प्रस्तावित भारत-अमेरिका अंतरिम व्यापार समझौते के तहत अमेरिका से आयात होने वाले सेब पर 25 प्रतिशत आयात शुल्क और 80 रुपये प्रति किलो का न्यूनतम आयात मूल्य (MIP) तय किया गया है. इसका सीधा मतलब यह है कि अमेरिका से 100 रुपये प्रति किलो से कम कीमत वाले सेब भारत में प्रवेश नहीं कर पाएंगे.
फिलहाल सेब पर 50 प्रतिशत आयात शुल्क और 50 रुपये प्रति किलो का एमआईपी लागू है, जिसके चलते 75 रुपये प्रति किलो से कम कीमत वाले सेब आयात के दायरे से बाहर रहते हैं. नए प्रावधानों में शुल्क घटा जरूर है, लेकिन एमआईपी बढ़ाकर किसानों की सुरक्षा सुनिश्चित की गई है.
केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल ने कहा कि भारत हर साल करीब छह लाख टन सेब का आयात करता है, जिसमें अमेरिका भी एक प्रमुख सल्पायर देश है. इसके बावजूद देश की घरेलू जरूरतें मुख्य रूप से भारतीय सेब उत्पादन से पूरी होती हैं. उन्होंने दो टूक कहा कि सेब उत्पादक किसानों को घबराने की जरूरत नहीं है और सरकार उनके हितों से किसी भी तरह का समझौता नहीं करेगी.
मंत्री ने यह भी बताया कि इस अंतरिम व्यापार समझौते के तहत अमेरिका में कई भारतीय उत्पादों पर शून्य पारस्परिक शुल्क लगाया जाएगा. इसमें कृषि से जुड़े कई उत्पाद शामिल हैं. भारतीय फल, सब्जियां, चाय और कॉफी को अमेरिकी बाजार में बिना किसी पारस्परिक शुल्क के पहुंच मिलने की संभावना है. हालांकि, भारत ने डेयरी उत्पादों, चीनी और मिलेट्स पर अमेरिका को किसी भी तरह की शुल्क छूट नहीं दी है.
पीयूष गोयल ने कहा कि यह समझौता किसानों के साथ-साथ एमएसएमई, हस्तशिल्प और हथकरघा क्षेत्रों के हितों को भी पूरी तरह सुरक्षित रखेगा. भारत ने अमेरिका को कुछ सीमित क्षेत्रों जैसे अल्कोहलिक बेवरेजेज, कॉस्मेटिक्स और मेडिकल डिवाइसेज में ही शुल्क रियायत दी है.
इसके बदले भारत को ऑटो और विमान के कुछ पुर्जों पर अमेरिकी बाजार में शून्य पारस्परिक शुल्क का लाभ मिलेगा. उन्होंने दावा किया कि यह समझौता संतुलित है और देश के संवेदनशील क्षेत्रों को सुरक्षित रखते हुए निर्यात के नए अवसर खोलेगा. प्रस्तावित भारत-अमेरिका अंतरिम व्यापार समझौते पर मध्य मार्च तक हस्ताक्षर होने की संभावना जताई जा रही है. (पीटीआई)