
मध्य प्रदेश के सीहोर जिले के अमलाहा स्थित खाद्य दलहन अनुसंधान केंद्र में आज राष्ट्रीय दलहन आत्मनिर्भरता मिशन हेतु राष्ट्र-स्तरीय परामर्श कार्यक्रम का आयोजन हुआ. यहां केंद्रीय कृषि और किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह ने कहा कि दालें आयात करना भारत के लिए आनंद की नहीं, बल्कि शर्म की बात है. अब हमारा लक्ष्य भारत को दालों का निर्यातक बनाना है. कार्यक्रम में कृषि मंत्री चौहान ने दलहन क्षेत्र में बीज से बाजार तक पूरी वैल्यू चेन को मजबूत करने के रोडमैप का ब्योरा दिया. इस दौरान उन्होंने बताया कि देशभर में 1000 दाल मिलें लगाई जाएंगी.
केंद्रीय मंत्री ने कहा कि आत्मनिर्भर भारत के संकल्प में दलहन की भूमिका बेहद अहम है. आज भी दालों के लिए आयात पर निर्भरता चिंता का विषय है. इस निर्भरता को खत्म करने के लिए सरकार उत्पादन, उत्पादकता और प्रोसेसिंग तीनों मोर्चों पर एक साथ काम कर रही है.
शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि दलहन मिशन केवल उत्पादन बढ़ाने तक सीमित नहीं है. बीज सुधार, उन्नत किस्में, क्लस्टर आधारित खेती, स्थानीय प्रोसेसिंग और बाजार तक सीधी पहुंच, हर कड़ी को मजबूत किया जाएगा. उन्होंने कहा कि अच्छा उत्पादन तभी सार्थक है, जब किसान को सही दाम मिले, और इसके लिए सरकार पूरी व्यवस्था तैयार कर रही है.
दलहन आत्मनिर्भरता मिशन के तहत देशभर में 1,000 दाल मिलें स्थापित की जाएंगी. इन मिलों को क्लस्टर स्तर पर बढ़ावा दिया जाएगा, ताकि जहां दाल का उत्पादन हो, वहीं प्रोसेसिंग भी हो सके. सरकार दाल मिल लगाने पर 25 लाख रुपये तक की सब्सिडी देगी. इससे किसानों को अपनी उपज का बेहतर मूल्य मिलेगा, परिवहन लागत घटेगी और ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के नए अवसर बनेंगे. मध्य प्रदेश में ही अलग-अलग क्लस्टरों में 55 दाल मिलें स्थापित करने की योजना है.
केंद्रीय मंत्री ने बताया कि दलहन उत्पादन बढ़ाने के लिए क्लस्टर मॉडल अपनाया जाएगा. किसानों को समूहों में जोड़कर उन्नत तकनीक, गुणवत्तापूर्ण बीज और वैज्ञानिक सलाह दी जाएगी. बीज ग्राम की अवधारणा को मजबूत किया जाएगा, ताकि स्थानीय स्तर पर ही प्रमाणित बीज उपलब्ध हो सकें. क्लस्टर से जुड़े किसानों को बीज किट और आदर्श खेती के लिए प्रति हेक्टेयर 10,000 रुपये की सहायता भी दी जाएगी.
शिवराज सिंह चौहान ने दलहन बीज व्यवस्था में बड़ा बदलाव करते हुए कहा कि अब कोई भी नया बीज दिल्ली में बंद कमरों में रिलीज नहीं होगा. बीज सीधे किसानों के बीच, उनके खेतों में जाकर जारी किए जाएंगे. इससे किसान नई किस्मों को समझ सकेंगे और तेजी से अपनाएंगे. मसूर, चना, मूंग, उड़द जैसी फसलों की जल्दी पकने वाली और अधिक उत्पादक किस्मों पर विशेष फोकस रहेगा.
दलहन उत्पादन में अग्रणी मध्य प्रदेश की भूमिका पर बात करते हुए केंद्रीय मंत्री ने कहा कि प्रदेश पहले से ही देश में नंबर वन है, लेकिन क्षेत्र में कमी चिंता का विषय है. उन्होंने भरोसा दिलाया कि केंद्र और राज्य मिलकर ऐसा माहौल बनाएंगे, जिसमें दलहन किसान के लिए फिर से फायदे का सौदा बने. सभी राज्यों के लिए उनकी जरूरत के मुताबिक अलग-अलग रोडमैप तैयार किए जाएंगे.