
इतिहास में पहली बार केंद्रीय बजट रविवार को पेश होने जा रहा है. एक फरवरी 2026 को सुबह 11 बजे वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण संसद में वित्तीय वर्ष 2026-27 का बजट रखेंगी. लेकिन तारीख और परंपरा से ज्यादा ध्यान इस बात पर है कि क्या यह बजट देश के किसानों के लिए कुछ ठोस राहत लेकर आएगा. पिछले कुछ वर्षों में खेती लगातार महंगी हुई है. बीज, खाद, कीटनाशक और डीजल, सबकी कीमतें बढ़ीं. इसके साथ ही मौसम की अनिश्चितता और बाजार में दाम गिरने का डर किसानों की कमर तोड़ रहा है. सरकार ने योजनाएं तो शुरू कीं, लेकिन खेत तक उनका असर सीमित ही रहा. ऐसे माहौल में बजट 2026 से उम्मीद की जा रही है कि वह नीतियों को दोहराए नहीं बल्कि खेती की मौजूदा चुनौतियों को ध्यान में रखे.
किसानों को मिलने वाली प्रत्यक्ष नकद सहायता अब समय के हिसाब से कम पड़ने लगी है. महंगाई के दौर में छह हजार रुपये सालाना मदद राहत नहीं, सिर्फ सहारा भर रह गई है. ऐसे में सरकार अगर इस राशि में सीमित लेकिन व्यावहारिक बढ़ोतरी करती है, तो इसका असर सीधे ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर दिख सकता है.
न्यूनतम समर्थन मूल्य यानी एमएसपी को लेकर सबसे बड़ी समस्या भरोसे की है. किसान को पता नहीं होता कि उसकी फसल सरकारी खरीद में आएगी भी या नहीं. बजट के जरिए सरकार अगर खरीद एजेंसियों को ज्यादा संसाधन देती है, तो कानून के बिना भी किसानों को कुछ सुरक्षा मिल सकती है.
बीमा योजना किसानों के लिए सुरक्षा कवच होनी चाहिए और देर से मिलने वाला मुआवजा इस कवच को बेकार बना देता है. देश में आज भी कुछ राज्यों में फसल बीमा सिर्फ एक वादा भर बनकर रह गया है. नई तकनीक के इस्तेमाल और भुगतान की सख्त समयसीमा तय किए बिना इस योजना पर भरोसा लौटना मुश्किल है.
भारत के कई हिस्सों में किसान नैचुरल फार्मिंग या प्राकृतिक खेती को अपनाने लगे हैं. वहीं सरकार की तरफ से भी इस दिशा में काफी कुछ किया जा रहा है. वहीं इस बात पर भी ध्यान दिया जाना चाहिए कि नैचुरल फार्मिंग की बात अब भाषणों तक सीमित न रहे. किसानों को प्रशिक्षण, प्रमाणन और शुरुआती खर्च में मदद दिए बिना यह मॉडल जमीन पर नहीं उतर सकता.
सरकार खेती को सिर्फ उत्पादन नहीं, पोषण और आय से जोड़ने की दिशा में भी सोच सकती है. बेहतर पोषण वाली फसलें और निर्यात को बढ़ावा देने से किसानों को नए बाजार मिल सकते हैं. बजट 2026 से किसी बड़े चमत्कार की उम्मीद शायद गलत हो लेकिन अगर ये मुद्दे ईमानदारी से उठाए जाते हैं तो यह बजट किसानों के लिए राहत की एक ठोस शुरुआत बन सकता है.
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