TTD Ghee Adulteration: बिना दूध के ही बना डाला 'सिंथेटिक घी', ऐसे सामने आया करोड़ों का फर्जीवाड़ा

TTD Ghee Adulteration: बिना दूध के ही बना डाला 'सिंथेटिक घी', ऐसे सामने आया करोड़ों का फर्जीवाड़ा

मुख्य सप्लायर, उत्तराखंड स्थित भोले बाबा डेयरी ने कथित तौर पर इस अवधि के दौरान दूध या मक्खन की एक बूंद भी नहीं खरीदी. CBI-SIT के मुताबिक, असली घी की जगह पाम ऑयल, पाम कर्नेल ऑयल और केमिकल एडिटिव्स से तैयार सिंथेटिक मिश्रण बनाया गया. इस घोटाले में दिल्ली के कारोबारी अजय कुमार सुगंध (A-16) की अहम भूमिका सामने आई है.

Tirupati laddu ghee row: CBI finds dairy that supplied fake ghee to TTD for five yearsTirupati laddu ghee row: CBI finds dairy that supplied fake ghee to TTD for five years
क‍िसान तक
  • New Delhi ,
  • Jan 29, 2026,
  • Updated Jan 29, 2026, 11:30 AM IST

तिरुमला तिरुपति देवस्थानम (TTD) से जुड़े देश के सबसे बड़े घी मिलावट घोटालों में से एक में CBI के नेतृत्व वाली एसआईटी ने जनवरी 2026 में फाइनल चार्जशीट दाखिल कर दी है. नेल्लोर की ACB कोर्ट में पेश इस चार्जशीट में 36 आरोपियों को नामजद किया गया है. जांच से पता चला है कि 2021 और 2024 के बीच मंदिर को लगभग 68 लाख किलोग्राम सिंथेटिक/नकली घी की सप्लाई की गई, जिसकी कीमत लगभग ₹250 करोड़ थी. 

क्‍या-क्‍या किया गया प्रयोग 

मुख्य सप्लायर, उत्तराखंड स्थित भोले बाबा डेयरी ने कथित तौर पर इस अवधि के दौरान दूध या मक्खन की एक बूंद भी नहीं खरीदी. CBI-SIT के मुताबिक, असली घी की जगह पाम ऑयल, पाम कर्नेल ऑयल और केमिकल एडिटिव्स से तैयार सिंथेटिक मिश्रण बनाया गया. इस घोटाले में दिल्ली के कारोबारी अजय कुमार सुगंध (A-16) की अहम भूमिका सामने आई है, जिसने घी की खुशबू, स्वाद और लैब वैल्यू को असली दिखाने के लिए एसिटिक एसिड एस्टर और आर्टिफिशियल फ्लेवर सप्लाई किए.
 
जांच में यह भी खुलासा हुआ कि घोटाले को अंजाम देने में TTD के कुछ वरिष्ठ अधिकारी, जिनमें तत्कालीन GM (Procurement) आरएसएसवीआर सुब्रह्मण्यम, और बाहरी डेयरी एक्सपर्ट्स शामिल थे. इन पर आरोप है कि उन्होंने रिश्वत और तोहफों के बदले फर्जी क्वालिटी रिपोर्ट दी और सबूत दबाए.

NDDB की रिपोर्ट ने खोली पोल

गुजरात स्थित नेशनल डेयरी डेवलपमेंट बोर्ड (NDDB) की लैब रिपोर्ट (जुलाई 2024) में घी के सैंपल्स में S-Value 19.72 तक पाई गई, जबकि शुद्ध देसी घी के लिए यह मानक 98–104 होता है. रिपोर्ट में साफ कहा गया कि सैंपल्स में सूअर की चर्बी (Lard), बीफ टैलो और वेजिटेबल ऑयल,  मछली के तेल जैसे बाहरी फैट मौजूद थे. 

ISO 17678 मानक के तहत S-4 वैल्यू विशेष रूप से जानवरों की चर्बी की पहचान करती है. SIT की अंतिम रिपोर्ट में माना गया है कि मुख्य मिलावट केमिकल स्लज से की गई, हालांकि कुछ रिजेक्टेड टैंकरों में एनिमल फैट भी पाया गया, जिन्हें दोबारा सप्लाई चेन में डाल दिया गया था.

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