Pulses Import: दालों के आयात में इस बार बड़ी गिरावट की संभावना, जानें इसकी बड़ी वजह 

Pulses Import: दालों के आयात में इस बार बड़ी गिरावट की संभावना, जानें इसकी बड़ी वजह 

आयात में यह गिरावट अधिक कैरी फॉरवर्ड स्टॉक, डॉलर के मुकाबले रुपये की कमजोरी और पीली मटर पर इंपोर्ट ड्यूटी लगाए जाने की वजह से है. इंडिया पल्सेस एंड ग्रेन्स एसोसिएशन (IPGA) के मुताबिक पिछले साल भारत ने 7.3 मिलियन टन दालों का आयात किया था लेकिन मौजूदा वित्तीय वर्ष में यह आंकड़ा घटकर करीब 5 मिलियन टन तक सीमित रहने की संभावना है.

क‍िसान तक
  • New Delhi ,
  • Jan 29, 2026,
  • Updated Jan 29, 2026, 9:06 AM IST

भारत में इस साल दालों का आयात कम रह सकता है और इसकी वजहें भी विशेषज्ञों ने बताई है. एक अनुमान के मुताबिक इस वित्तीय वर्ष में भारत की दालों के आयात में पिछले साल की तुलना में करीब 30 फीसदी की गिरावट रह सकती है. आंकड़ों की मानें तो इस वित्तीय वर्ष में आयात करीब 5 मिलियन टन रह सकता है. जबकि पिछले साल की अगर बात करें तो भारत ने करीब 7.3 मिलियन टन दालों का आयात किया था. कुछ विशेषज्ञ इस घटनाक्रम को सकारात्‍मक मान रहे हैं. 

क्‍यों होगी आयात में गिरावट  

आयात में यह गिरावट अधिक कैरी फॉरवर्ड स्टॉक, डॉलर के मुकाबले रुपये की कमजोरी और पीली मटर पर इंपोर्ट ड्यूटी लगाए जाने की वजह से है. इंडिया पल्सेस एंड ग्रेन्स एसोसिएशन (IPGA) के चेयरमैन बिमल कोठारी ने अखबार बिजनेसलाइन को बताया कि पिछले साल भारत ने 7.3 मिलियन टन दालों का आयात किया था लेकिन मौजूदा वित्तीय वर्ष में यह आंकड़ा घटकर करीब 5 मिलियन टन तक सीमित रहने की संभावना है. उन्होंने बताया कि आयातित दालों की बड़ी मात्रा पिछले साल से कैरी फॉरवर्ड हुई है, जो इस साल आयात में कमी की एक अहम वजह बन रही है. 

वाणिज्‍य मंत्रालय की तरफ से हाल ही में जारी किए गए क्विक एस्टिमेट्स भी इसी रुझान की पुष्टि करते हैं. आंकड़ों के मुताबिक चालू वित्तीय वर्ष के अप्रैल से दिसंबर की अवधि के दौरान दालों का आयात मूल्य के लिहाज से 33.33 प्रतिशत घटकर 2.525 अरब डॉलर रह गया, जबकि पिछले साल इसी अवधि में यह 3.788 बिलियन डॉलर था.

सरकार से की गई थी अपील 

पिछले साल जुलाई में किसानों और व्यापारियों के एक एसोसिएशन ने भारत सरकार से दालों के सस्ते आयात पर रोक लगाने की अपील की थी. उनकी अपील इस मकसद से थी कि दालों की कीमतों को स्थिर रखा जा सके और किसान दालों का रकबा बढ़ाने के लिए उत्‍साहित हो सकें.दुनिया का सबसे बड़ा दाल प्रोड्यूसर होने के बावजूद, भारत बढ़ती घरेलू मांग को पूरा करने के लिए आयात पर निर्भर है. 

भारत के लिए खास हैं दालें 

भारत की खेती और खाने की अर्थव्‍यवस्‍था में दालों की एक खास जगह है. दाल एक ही समय में कंज्यूमर्स के लिए सस्ते प्रोटीन का सोर्स हैं और उसी समय यह लाखों किसानों के लिए रोजी-रोटी की फसल हैं. साथ ही भारत की ट्रेड बातचीत में एक संवेदनशील मसला भी है. हाल ही में भारत सरकार पीली मटर पर 30 फीसदी आयात शुल्‍क लगाना का फैसला किया जिसे काफी सराहा गया.    

आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार दालों का आयात साल 2022-23 में करीब 25 लाख टन से बढ़कर 2023-24 में 47 लाख टन से ज्‍यादा हो गया था. इसकी बड़ी वजह पीली मटर के ड्यूटी-फ्री या कम-ड्यूटी वाले आयात को बताया गया था. 2024-25 (अप्रैल-मार्च) में आयात और बढ़ा और यह 72 लाख टन से ज्‍यादा पहुंच गया. इसकी कीमत 5 अरब डॉलर से ज्‍यादा थी और यह आंकड़ा सबसे ज्‍यादा था.

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