रबी सीजन में किसानों के लिए राहत: जनवरी की बारिश ने बढ़ाई मिट्टी की नमी, बुवाई रकबा भी बढ़ा

रबी सीजन में किसानों के लिए राहत: जनवरी की बारिश ने बढ़ाई मिट्टी की नमी, बुवाई रकबा भी बढ़ा

जनवरी में औसत से ज्यादा बारिश ने कमजोर मॉनसून से हुई मिट्टी की नमी की कमी को पूरा किया है. रबी फसलों का रकबा बढ़ा है और गेहूं, दाल और तिलहन की पैदावार को लेकर किसानों में उम्मीद बढ़ी है.

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क‍िसान तक
  • New Delhi ,
  • Jan 29, 2026,
  • Updated Jan 29, 2026, 2:10 PM IST

इस साल रबी का मौसम देश भर के किसानों के लिए उम्मीद और राहत दोनों लेकर आया है. जहां अनाज, दालों और तिलहन की बुवाई पिछले साल से ज्यादा हुई है, वहीं जनवरी में औसत से ज्यादा बारिश ने कमजोर मॉनसून के कारण हुई मिट्टी की नमी की कमी को पूरा कर दिया है.

कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि हालांकि पहली नजर में ज्यादा बारिश चिंताजनक लग सकती है, लेकिन मौजूदा हालात में यह किसानों के लिए चिंता का कारण नहीं, बल्कि राहत की बात है.

सरकारी आंकड़ों के अनुसार, कई प्रमुख कृषि राज्यों में 1 जनवरी से 27 जनवरी के बीच औसत से अधिक बारिश दर्ज की गई. पंजाब में 71 प्रतिशत ज्यादा बारिश हुई, हरियाणा में 28 प्रतिशत ज्यादा और चंडीगढ़ में 16 प्रतिशत ज्यादा.

दक्षिण भारत में यह बढ़ोतरी और भी ज्यादा थी, जहां तमिलनाडु में 195 प्रतिशत अधिक बारिश हुई, पुडुचेरी में 250 प्रतिशत ज्यादा और केरल में 78 प्रतिशत अधिक. 'इंडिया टुडे' से बात करते हुए कृषि विशेषज्ञ देविंदर शर्मा ने कहा कि यह बारिश उन इलाकों के लिए खास तौर पर महत्वपूर्ण रही जहां रबी की फसलें पूरी तरह से मिट्टी की नमी पर निर्भर करती हैं.

“सितंबर में मॉनसून उम्मीद के मुताबिक नहीं रहा. उस समय कई राज्यों में सामान्य से कम बारिश हुई, जिससे मिट्टी में नमी का स्तर कम हो गया. विशेषज्ञों का कहना है कि अगर जनवरी में बारिश नहीं होती, तो गेहूं, सरसों और चने जैसी रबी की फसलों के लिए पानी की कमी एक गंभीर समस्या बन सकती थी. जनवरी की बारिश ने न केवल मिट्टी की नमी को बैलेंस किया है, बल्कि फसलों की जड़ों को मजबूत करने में भी अहम भूमिका निभाई है,” शर्मा ने कहा.

बुवाई के आंकड़े भी किसानों में बढ़ते आत्मविश्वास को दर्शाते हैं. रबी की फसलों के तहत कुल रकबा बढ़कर 652.33 लाख हेक्टेयर हो गया है - जो पिछले साल की इसी अवधि की तुलना में 20.88 लाख हेक्टेयर अधिक है.

गेहूं की बुवाई में 6.13 लाख हेक्टेयर की बढ़ोतरी हुई है, जबकि दालों के तहत रकबा 3.82 लाख हेक्टेयर और तिलहन के तहत 3.53 लाख हेक्टेयर बढ़ा है. मोटे अनाज और बाजरा के तहत रकबे में भी काफी बढ़ोतरी देखी गई है, जिसे फसल विविधीकरण की दिशा में एक पॉजिटिव संकेत माना जा रहा है.

फिलहाल, पूरे भारत में अभी गेहूं बढ़वार के स्टेज में है. यह स्टेज बहुत जरूरी है क्योंकि यह तय करता है कि आखिरी फसल कितनी अच्छी होगी. एक्सपर्ट्स का कहना है कि इस समय बारिश गेहूं के लिए अच्छी होती है, क्योंकि यह पौधों को अच्छे से बढ़ने में मदद करती है और हर पौधे से ज्यादा अनाज मिलने की संभावना बढ़ जाती है. अगर मौसम ऐसा ही रहा, तो अप्रैल में गेहूं की कटाई शुरू होने की संभावना है, और पंजाब, हरियाणा और राजस्थान के किसान अच्छी फसल की उम्मीद कर सकते हैं.(पल्लवी पाठक की रिपोर्ट)

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