Economic Survey: खेती भारत की रीढ़, 46 फीसद लोगों को मिला रोजगार

Economic Survey: खेती भारत की रीढ़, 46 फीसद लोगों को मिला रोजगार

आर्थिक सर्वेक्षण 2025-26 के अनुसार कृषि भारत की राष्ट्रीय आय में लगभग 20% योगदान देती है और 46% आबादी को रोजगार देती है. सरकार उत्पादकता, फूड सिक्योरिटी और किसानों की आय बढ़ाने पर जोर दे रही है.

Economic Survey 2025-26: Flags the need to reset urea pricingEconomic Survey 2025-26: Flags the need to reset urea pricing
क‍िसान तक
  • New Delhi ,
  • Jan 29, 2026,
  • Updated Jan 29, 2026, 4:22 PM IST

आर्थिक सर्वेक्षण 2025-26 बताता है कि खेती और उससे जुड़ी गतिविधियां भारत की राष्ट्रीय आय में भले ही करीब 20 प्रतिशत का योगदान देती हों, लेकिन देश की लगभग आधी आबादी की रोजी-रोटी इसी पर टिकी है. यही वजह है कि सरकार खेती को समावेशी विकास और खाद्य सुरक्षा की कुंजी मान रही है.

सर्वे में कहा गया है कि किसानों की आय बढ़ाने के लिए सरकार उत्पादकता सुधार, बेहतर तकनीक, इनपुट सपोर्ट, बाजार तक पहुंच और फसल बीमा जैसे उपायों को मिशन मोड में लागू कर रही है. राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा एवं पोषण मिशन के तहत चावल, गेहूं, दाल, मोटा अनाज और पोषक अनाज (श्री अन्न) की पैदावार बढ़ाने पर जोर है.

दलहन, तिलहन का रकबा बढ़ा

तिलहन और खाद्य तेल के मामले में आत्मनिर्भरता बढ़ाने के लिए अलग-अलग राष्ट्रीय मिशन चलाए जा रहे हैं, जिनका असर दिखने लगा है. बीते एक दशक में तिलहन का रकबा, उत्पादन और उत्पादकता – तीनों में अच्छी बढ़ोतरी दर्ज की गई है, जिससे आयात पर निर्भरता कम हुई है.

ग्रामीण इलाकों में खेती को मजबूत करने के लिए सरकार ने पीएम धन धान्य कृषि योजना के तहत 100 कृषि-प्रधान जिलों पर फोकस किया है. इस योजना का मकसद फसल विविधीकरण, सिंचाई सुधार, भंडारण सुविधाएं और टिकाऊ खेती को बढ़ावा देना है.

वहीं, प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना किसानों के लिए सुरक्षा कवच बनी हुई है. 2024-25 में इस योजना के तहत 4.19 करोड़ किसानों को बीमा कवर मिला, जिससे प्राकृतिक आपदाओं और मौसम की मार से होने वाले नुकसान में बड़ी राहत मिली है.

खेती मजबूत तो अर्थव्यवस्था मबबूत

कुल मिलाकर, आर्थिक सर्वे साफ संकेत देता है कि अगर खेती मजबूत होगी, तो गांव, किसान और देश की अर्थव्यवस्था – तीनों मजबूत होंगे.

आर्थिक समीक्षा बताती है कि पिछले पांच सालों में खेती और उससे जुड़ी गतिविधियां अच्छी रफ्तार से बढ़ी हैं. इस दौरान कृषि क्षेत्र की औसत सालाना बढ़ोतरी करीब 4.4 प्रतिशत रही है, जो एक मजबूत संकेत है. साल 2025-26 की दूसरी तिमाही में खेती की ग्रोथ 3.5 प्रतिशत रही.

अगर पिछले 10 साल (2016 से 2025) को देखें, तो खेती की औसत बढ़ोतरी 4.45 प्रतिशत रही है, जो अब तक के दशकों में सबसे बेहतर मानी जा रही है. यह तेजी खासतौर पर पशुपालन और मछली पालन की वजह से आई है.

पशुधन (दूध, पशु, पोल्ट्री आदि) में करीब 7.1 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई. मछली पालन में यह बढ़ोतरी और भी ज्यादा, करीब 8.8 प्रतिशत रही. फसलों की खेती में भी 3.5 प्रतिशत की ग्रोथ दर्ज की गई. 

पशुपालन और मछली पालन बना सहारा

पिछले 10 सालों में पशुपालन क्षेत्र ने जबरदस्त तरक्की की है. 2015 से 2024 के बीच इस सेक्टर की कमाई (GVA) लगभग तीन गुना हो गई. यानी दूध, पशु और पोल्ट्री अब किसानों की आय बढ़ाने का बड़ा जरिया बन चुके हैं.

मछली पालन का प्रदर्शन भी शानदार रहा है. 2014 के बाद से मछली उत्पादन में 140 प्रतिशत से ज्यादा बढ़ोतरी हुई है. इसका मतलब है कि अब यह सेक्टर भी खेती के साथ-साथ किसानों को अच्छी आमदनी दे रहा है.

खाद्यान्न उत्पादन में रिकॉर्ड बढ़ोतरी

देश में अनाज का उत्पादन लगातार बढ़ रहा है. साल 2024-25 में खाद्यान्न उत्पादन करीब 3,577 लाख मीट्रिक टन रहने का अनुमान है, जो पिछले साल से काफी ज्यादा है. इस बढ़ोतरी में धान, गेहूं, मक्का और मोटे अनाज (श्री अन्न) की अहम भूमिका रही है.

बागवानी खेती ने मारी बाजी

सब्जी, फल और दूसरी बागवानी फसलें अब खेती का सबसे मजबूत हिस्सा बनती जा रही हैं. बागवानी का उत्पादन अब अनाज से भी ज्यादा हो गया है. 2024-25 में बागवानी उत्पादन करीब 362 मिलियन टन रहा. वहीं खाद्यान्न का उत्पादन इससे कम रहा. फल, सब्जी और दूसरी बागवानी फसलों से किसानों को ज्यादा दाम मिलते हैं, इसलिए यह क्षेत्र तेजी से आगे बढ़ रहा है.

भारत की वैश्विक पहचान मजबूत

आज भारत दुनिया का सबसे बड़ा प्याज उत्पादक बन चुका है. फल, सब्जी और आलू के उत्पादन में दुनिया में दूसरे नंबर पर है. इससे साफ है कि भारत अब सिर्फ अपने लिए नहीं, बल्कि दुनिया के लिए भी खाने की चीजें उगाने वाला बड़ा देश बनता जा रहा है.

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