
मिजोरम के दूरदराज गांव की 35 साल की एक महिला ने खेती को कमाई का जरिया बनाकर बड़ी पहचान बनाई है. लॉन्गतलाई जिले के सांगाउ गांव की रहने वाली जेड टी लालरिथांगी, जिन्हें लोग प्यार से पी मारी-आई कहते हैं, को संयुक्त राष्ट्र की संस्था खाद्य एवं कृषि संगठन (FAO) की ओर से सम्मानित किया जाएगा. उन्होंने स्ट्रॉबेरी की खेती को सफल कारोबार में बदलकर ग्रामीण विकास और कृषि के क्षेत्र में मिसाल पेश की है.
लालरिथांगी का चयन “FAO 100 Women Heroes in Agrifood Systems and Rural Development” के लिए हुआ है. यह सम्मान FAO की ओर से International Year of Women Farmers 2026 के तहत दिया जा रहा है. लालरिथांगी के मुताबिक, इस सम्मान के लिए 131 देशों की 600 से ज्यादा महिलाओं को नामित किया गया था. इनमें से 100 महिलाओं का चयन किया गया है. भारत से दो महिलाओं को इस सम्मान के लिए चुना गया है.
लालरिथांगी को 21 सितंबर को ईमेल के जरिए उनके चयन की जानकारी दी गई. उन्हें सम्मान लेने के लिए इटली के रोम आने का न्योता भी मिला है.
लालरिथांगी को यह सम्मान 12 से 16 अक्टूबर के बीच रोम में FAO के मुख्यालय में होने वाले World Food Forum के दौरान दिया जाएगा. फिलहाल वह रोम जाने के लिए जरूरी दस्तावेज तैयार कर रही हैं. इससे पहले मिजोरम के बागवानी विभाग ने भी उन्हें इस अंतरराष्ट्रीय सम्मान के लिए चुने जाने की जानकारी दी थी.
लालरिथांगी ने साल 2024 में स्ट्रॉबेरी की खेती शुरू की थी. उन्हें पड़ोसी सियाहा जिले के कुछ किसानों के बारे में पता चला, जो स्ट्रॉबेरी की सफल खेती कर रहे थे. इसके बाद उन्होंने भी इस खेती को आजमाने का फैसला किया. उन्होंने शुरुआत करीब 1,000 स्ट्रॉबेरी पौधों से की. उनका खेत सांगाउ गांव से करीब 5 किलोमीटर दूर है. पहली ही साल उन्हें करीब 1.5 लाख रुपये की कमाई हुई. इसके बाद उन्होंने स्ट्रॉबेरी की खेती को और बढ़ाने का फैसला किया. अब वह करीब दो हेक्टेयर जमीन में 10 हजार से ज्यादा स्ट्रॉबेरी के पौधे लगा रही हैं. इसके साथ ही वह एवोकाडो, केला और दूसरी फल-सब्जियों की भी खेती करती हैं.
साल 2025 में लालरिथांगी ने स्ट्रॉबेरी की खेती से 10 लाख रुपये से ज्यादा की कमाई की. वह स्ट्रॉबेरी को सिर्फ ताजा फल के रूप में नहीं बेचतीं, बल्कि इसका कुछ हिस्सा प्रोसेस करके स्ट्रॉबेरी वाइन भी बनाती हैं. इसे स्थानीय बाजार में बेचा जाता है. उनकी मेहनत को इससे पहले भी पहचान मिल चुकी है. उन्हें Mizoram Horti Fair 2026 में लॉन्गतलाई जिले का सर्वश्रेष्ठ किसान चुना गया था.
खेती शुरू करने से पहले लालरिथांगी एक निजी स्कूल में शिक्षक थीं. उन्होंने IGNOU से समाजशास्त्र में पोस्टग्रेजुएशन किया है. पढ़ाई पूरी करने के बाद उन्होंने सरकारी नौकरी पाने के लिए कई प्रतियोगी परीक्षाएं भी दीं, लेकिन उन्हें सफलता नहीं मिली. इसके बाद उन्होंने खेती को अपना करियर बनाने का फैसला किया. उनका कहना है कि सिर्फ सरकारी नौकरी ही कमाई का रास्ता नहीं है. अगर कोई मेहनत करे तो दूसरे कामों से भी अच्छी कमाई की जा सकती है.
लालरिथांगी ने बताया कि उनके पति परिवार का खर्च उठाने में मदद कर सकते थे, लेकिन वह खुद भी आत्मनिर्भर बनना चाहती थीं. इसी सोच ने उन्हें खेती की ओर जाने के लिए प्रेरित किया. उन्होंने बताया कि वह चाहती थीं कि उनकी पढ़ाई का इस्तेमाल सिर्फ नौकरी पाने तक सीमित न रहे, बल्कि वह अपने पैरों पर खड़ी हों. इसी सोच के साथ उन्होंने खेती शुरू की.
स्ट्रॉबेरी की खेती शुरू करने से पहले लालरिथांगी ने सरकारी मदद लेने की कोशिश की थी. लेकिन उन्हें बताया गया कि उस समय स्ट्रॉबेरी की खेती विभाग की परियोजना में शामिल नहीं थी. इसके बाद उन्होंने इसे चुनौती के रूप में लिया और अपने दम पर खेती शुरू कर दी. बाद में सरकार और बागवानी विभाग की ओर से उन्हें अलग-अलग तरह की मदद भी मिली.
लालरिथांगी के पास स्ट्रॉबेरी की खेती की कोई औपचारिक ट्रेनिंग नहीं थी. उन्होंने इंटरनेट और YouTube पर उपलब्ध खेती के वीडियो देखकर खेती की तकनीक सीखी. साथ ही दूसरे किसानों से भी जानकारी ली. तीन बच्चों की मां होने के कारण उनके पास समय कम था. इसलिए वह अक्सर रात में खेती से जुड़ी जानकारी पढ़ती और वीडियो देखती थीं. उन्होंने बताया कि कई बार बच्चों की देखभाल और उन्हें दूध पिलाने के बीच भी वह खेती की तकनीक सीखती थीं.
खेती में लालरिथांगी को उनके परिवार का भी पूरा सहयोग मिला. उनके पति सरकारी प्राथमिक स्कूल में काम करते हैं. उनके सास-ससुर ने भी खेती के काम में उनका साथ दिया. खेती के लिए मजदूरों की मदद लेने के साथ-साथ लालरिथांगी और उनके पति सप्ताहांत में खुद भी खेत पर समय बिताते हैं. उनका कहना है कि परिवार के सामूहिक सहयोग की वजह से ही खेती सफल हो पाई और उन्हें अंतरराष्ट्रीय पहचान मिली.
एक शिक्षक से किसान बनी लालरिथांगी की कहानी बताती है कि खेती को भी एक सफल कमाई के साधन के रूप में अपनाया जा सकता है. उन्होंने सीमित संसाधनों से शुरुआत की और धीरे-धीरे स्ट्रॉबेरी की खेती का क्षेत्र बढ़ाया. अब उनकी मेहनत को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान मिलने जा रही है. रोम में मिलने वाला FAO सम्मान न सिर्फ उनके लिए बल्कि मिजोरम की महिला किसानों के लिए भी एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है.
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