बिहार में बाढ़ का पानी उतरा, मुसीबत नहीं: खेतों में बर्बाद हुई फसल, मुआवजे की आस में किसान

बिहार में बाढ़ का पानी उतरा, मुसीबत नहीं: खेतों में बर्बाद हुई फसल, मुआवजे की आस में किसान

बिहार में बाढ़ का पानी कम होने के बाद भी किसानों की मुश्किलें जारी हैं. नवगछिया, भोजपुर, मुंगेर, बेगूसराय और सारण में फसलों को नुकसान हुआ है. किसान अब मुआवजे और अगली फसल की बुआई के लिए आर्थिक मदद की मांग कर रहे हैं.

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बिहार में बाढ़ का पानी उतरा, मुसीबत नहीं: खेतों में बर्बाद हुई फसल, मुआवजे की आस में किसानबिहार में बाढ़ से जनजीवन तबाह

बिहार में बाढ़ का पानी भले ही धीरे-धीरे कम हो गया है, लेकिन इससे प्रभावित लोगों की मुश्किलें अभी खत्म नहीं हुई हैं. पानी उतरने के बाद अब तबाही की तस्वीर ज्यादा साफ दिखाई दे रही है. कई जिलों में किसानों की तैयार फसल बर्बाद हो गई है तो कहीं खेतों में पानी और दलदल के कारण अगली फसल की बुआई पर संकट मंडरा रहा है. कर्ज लेकर खेती करने वाले किसानों के सामने आर्थिक संकट भी खड़ा हो गया है.

नवगछिया में सैकड़ों एकड़ फसल पर संकट

नवगछिया के रंगरा प्रखंड के सधुवा और चापर गांव में कोसी और गंगा के पानी से खेती को भारी नुकसान हुआ है. गांवों के आसपास बड़े इलाके में पानी भरने से सैकड़ों एकड़ में लगी फसल बर्बाद होने की स्थिति में पहुंच गई है.

किसानों का कहना है कि पानी उतरने के बाद भी तुरंत खेती शुरू करना आसान नहीं होगा. लंबे समय तक खेतों में पानी जमा रहने से जमीन और कृषि गतिविधियां प्रभावित हुई हैं. किसानों ने फसल नुकसान का आकलन कर सरकारी प्रावधान के मुताबिक मुआवजा देने की मांग की है.

भोजपुर में पूंजी के साथ कर्ज भी डूबा

भोजपुर में गांवों और खेतों से बाढ़ का पानी कम होने लगा है, लेकिन किसानों पर आर्थिक बोझ बना हुआ है. बड़हरा और शाहपुर के गंगा किनारे के इलाकों में किसानों ने अपनी जमा-पूंजी लगाने के साथ कर्ज लेकर खेती की थी.

किसानों ने धान के अलावा लौकी, मूली और दूसरी सब्जियां लगाई थीं. कई किसानों ने मालगुजारी पर खेत लेकर भी फसल तैयार की थी. उम्मीद थी कि उपज बेचकर परिवार की जरूरतों के साथ कर्ज चुकाया जाएगा, लेकिन फसल घर पहुंचने से पहले ही खेत बाढ़ की चपेट में आ गए.

मुंगेर में पानी उतरा, सामने आया नुकसान

मुंगेर में गंगा का जलस्तर वार्निंग लेवल से नीचे आने के बावजूद बाढ़ की मार झेल चुके परिवारों का संकट बना हुआ है. जिले के छह प्रखंड बाढ़ से प्रभावित बताए गए हैं. पानी कम होने के बाद अब फसलों और लोगों की आजीविका को हुए नुकसान की तस्वीर सामने आ रही है.

असरगंज प्रखंड के चोरगांव की रहने वाली बादो देवी भी प्रभावित किसानों में शामिल हैं. परिवार के गुजारे के लिए वह अपनी करीब दस कट्ठा जमीन के साथ दूसरे किसानों की जमीन बटाई पर लेकर खेती करती हैं. उनका कहना है कि लगातार फसल खराब होने से परिवार के सामने रोजमर्रा का खर्च चलाने तक का संकट है. उन्हें सरकार की ओर से सात हजार रुपये की सहायता मिली है, लेकिन वह फसल नुकसान के मुआवजे की भी मांग कर रही हैं.

बेगूसराय में करीब 30 हजार हेक्टेयर फसल प्रभावित

बेगूसराय में पानी कम होने के बावजूद कई जगह लोगों की परेशानी जारी है. कुछ घरों में अब भी पानी है, जबकि कई जगह जमीन दलदल में तब्दील हो चुकी है. बाढ़ का असर मकानों पर भी पड़ा है और कुछ परिवार अब भी बांध के किनारे रहने को मजबूर हैं.

दिए गए सरकारी आंकड़ों के अनुसार जिले में करीब 30 हजार हेक्टेयर फसल को नुकसान हुआ है. किसानों का कहना है कि उन्होंने कर्ज लेकर खेती की थी, लेकिन फसल बर्बाद होने के बाद अभी तक मुआवजा नहीं मिला है. प्रशासन की ओर से नुकसान की जानकारी और तस्वीरें जुटाए जाने की बात किसानों ने कही है.

अब उनके सामने रबी की खेती की तैयारी का सवाल है. किसानों का कहना है कि अगली फसल लगाने के लिए उन्हें दोबारा कर्ज लेने की जरूरत पड़ सकती है.

सारण में सब्जी और मक्का की फसल बर्बाद

सारण जिले के रिविलगंज प्रखंड की दिलियारहिमपुर पंचायत में बाढ़ का पानी उतर चुका है, लेकिन नुकसान के निशान बाकी हैं. स्थानीय लोगों के मुताबिक कुछ दिन पहले यहां घरों में छह से सात फीट तक पानी भर गया था और करीब 15 दिनों तक स्थिति बनी रही.

बाढ़ ने घरों के साथ खेती को भी नुकसान पहुंचाया. दियारा इलाके में किसान परवल, लौकी, भिंडी, नेनुआ और मक्का जैसी फसलों की खेती करते हैं. बाढ़ का पानी आने से फसलें बर्बाद हो गईं. स्थानीय किसानों का कहना है कि इन फसलों से होने वाली कमाई परिवार की सालभर की आर्थिक जरूरतों को पूरा करने में अहम भूमिका निभाती है.

कटिहार में बाढ़ के बाद मानव तस्करी को लेकर सतर्कता

कटिहार में प्रशासन बाढ़ के बाद पैदा होने वाली सामाजिक चुनौतियों को लेकर भी सतर्क हो गया है. गरीबी, बेरोजगारी और आर्थिक संकट का फायदा उठाकर मानव तस्करी करने वाले लोगों के सक्रिय होने की आशंका के मद्देनजर जागरुकता अभियान चलाया जा रहा है.

कटिहार के जिलाधिकारी आशुतोष द्विवेदी के मुताबिक मानव तस्करी रोकने के लिए विशेष जागरुकता अभियान चलाए जा रहे हैं. पुलिस, प्रशासन और सामाजिक संगठनों को भी सतर्क किया गया है, ताकि बाढ़ प्रभावित परिवार किसी तरह के प्रलोभन या धोखाधड़ी का शिकार न हों.

पानी के बाद अब मुआवजे की आस

नवगछिया से भोजपुर और मुंगेर से बेगूसराय-सारण तक बाढ़ प्रभावित किसानों की सबसे बड़ी चिंता अब आर्थिक मदद और अगली फसल की है. कहीं तैयार फसल पानी में डूब गई तो कहीं खेत अभी खेती के लायक नहीं हुए हैं. कर्ज लेकर फसल लगाने वाले किसानों के सामने दोहरी चुनौती है. उन्हें पुराने कर्ज की चिंता के साथ रबी की बुआई के लिए नए सिरे से पूंजी जुटानी है.

ऐसे में प्रभावित किसान फसल नुकसान का सही आकलन और जल्द मुआवजा दिए जाने की मांग कर रहे हैं, ताकि आगामी खेती शुरू करने में उन्हें मदद मिल सके.

(सुजीत कुमार, सोनू कुमार, गोविंद कुमार, सौरभ कुमार, आलोक जायसवाल, बिपुल राहुल का इनपुट)

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