
देश में नकली बीज, खाद और कीटनाशकों की बिक्री पर रोक लगाने के लिए केंद्र और राज्य सरकारें लगातार निगरानी कर रही हैं. लोकसभा में पिछले साल अगस्त में पूछे गए एक प्रश्न के लिखित उत्तर में कृषि एवं किसान कल्याण राज्य मंत्री रामनाथ ठाकुर ने बताया था कि किसानों को अच्छी क्वालिटी के कृषि सामान उपलब्ध कराने के लिए कई कानून और नियम लागू हैं, जिनके तहत दोषी पाए जाने वालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाती है.
मंत्री ने बताया कि बीज अधिनियम 1966, बीज नियम 1968, बीज (नियंत्रण) आदेश 1983, उर्वरक (नियंत्रण) आदेश 1985, कीटनाशक अधिनियम 1968 और कीटनाशक नियम 1971 जैसे प्रावधान किसानों के हितों की रक्षा करते हैं. इन कानूनों के तहत राज्य सरकारों को बीज, खाद और कीटनाशकों की क्वालिटी जांचने और नकली प्रोडक्ट की बिक्री रोकने का अधिकार दिया गया है.
राज्य सरकारें संबंधित कानूनों के तहत क्वालिटी कंट्रोल इंस्पेक्टर नियुक्त करती हैं. ये अधिकारी बाजार से बीज, उर्वरक और कीटनाशकों के नमूने लेकर प्रयोगशालाओं में जांच करवाते हैं. यदि कोई प्रोडक्ट नकली, मिलावटी या तय मानकों से कम क्वालिटी का पाया जाता है तो उसके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाती है.
सरकार के अनुसार दोषी डीलरों, खुदरा विक्रेताओं और निर्माताओं के खिलाफ लाइसेंस रद्द करना, स्टॉक जब्त करना, बिक्री पर रोक लगाना, चेतावनी जारी करना और अदालत में मामला दर्ज करना जैसी कार्रवाई की जा सकती है.
कृषि मंत्रालय ने कहा कि यदि नकली या घटिया कृषि सामान के कारण किसानों की फसल खराब होती है तो वे संबंधित निरीक्षक के पास शिकायत दर्ज करा सकते हैं. जांच में दोष साबित होने पर संबंधित कंपनियों, सप्लायरों या विक्रेताओं के खिलाफ कानूनी कदम उठाए जाते हैं.
हालांकि सरकार ने स्पष्ट किया कि फसल उत्पादन में कमी केवल बीज की क्वालिटी के कारण नहीं होती. मौसम में बदलाव, मिट्टी की सेहत, खेती के तरीके, कीट और रोगों का प्रकोप भी उत्पादन को प्रभावित करते हैं. इसलिए हर मामले की अलग-अलग तरह से छानबीन की जाती है.
किसानों तक क्वालिटी वाले बीज पहुंचाने के लिए देश में 178 बीज परीक्षण लैब चलाए जा रहे हैं. इसके अलावा 25 राज्य बीज सर्टिफिकेशन एजेंसियां भी काम कर रही हैं, जो बीजों की क्वालिटी सुनिश्चित करने में अहम भूमिका निभाती हैं. कई सरकारी संस्थान और सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियां भी क्वालिटी वाले बीज उत्पादन में लगी हुई हैं.
सरकार ने बताया कि प्राकृतिक आपदा या अन्य कारणों से फसल को नुकसान होने पर किसानों को आर्थिक सुरक्षा देने के लिए प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना (PMFBY) लागू की गई है. यह योजना किसानों को फसल नुकसान की स्थिति में वित्तीय राहत दिलाती है.
कृषि मंत्रालय ने कहा कि राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को समय-समय पर निर्देश जारी किए जाते हैं ताकि नकली कृषि प्रोडक्ट की बिक्री पर सख्ती से रोक लगाई जा सके. नियमों के अनुसार केवल वैधता अवधि के भीतर के बीज ही किसानों को बेचे जा सकते हैं.
यदि चेकिंग के दौरान एक्सपायर्ड बीज, कम क्वालिटी वाले बीज, हानिकारक रंगों से रंगे गए बीज या कैंसर पैदा करने वाले केमिकल से उपचारित बीज पाए जाते हैं तो संबंधित अधिकारियों द्वारा बिक्री रोकने, स्टॉक जब्त करने और अदालत में मामला दर्ज कराने जैसी कार्रवाई की जाती है.
सरकार के मुताबिक कृषि विभाग और राज्यों के मिलेजुले प्रयासों और अलग-अलग कृषि योजनाओं के प्रभाव से देश का खाद्यान्न उत्पादन लगातार बढ़ा है. साल 2019-20 में 297.50 मिलियन टन खाद्यान्न उत्पादन था, जो बढ़कर 2024-25 में 353.96 मिलियन टन तक पहुंच गया है.