
उत्तर प्रदेश सरकार ने किसानों के हितों की सुरक्षा और गन्ने की खेती को लेकर बड़ा कदम उठाया है. दरअसल, अब प्रदेश की सभी चीनी मिलें किसानों को केवल प्रमाणित और क्वालिटी जांच से गुजर चुके उर्वरक, जैव उर्वरक, सूक्ष्म पोषक तत्व और कीटनाशक ही उपलब्ध करा सकेंगी. गन्ना आयुक्त मिनिस्ती एस ने इस संबंध में सभी चीनी मिलों के लिए नए दिशा-निर्देश जारी किए हैं. सरकार का मानना है कि इस फैसले से किसानों को नकली और घटिया खाद और कीटनाशक से राहत मिलेगी, खेती की लागत पर बेहतर नियंत्रण होगा और गन्ने की पैदावार के साथ किसानों की आय बढ़ाने में भी मदद मिलेगी.
नई व्यवस्था के तहत चीनी मिलों द्वारा किसानों को उपलब्ध कराए जाने वाले हर बैच की क्वालिटी जांच एनएबीएल (NABL) से मान्यता प्राप्त लैबों में कराना अनिवार्य होगा. केवल वही उत्पाद किसानों तक पहुंचेंगे, जो उर्वरक (नियंत्रण) आदेश 1985, कीटनाशक अधिनियम 1968 और अन्य निर्धारित मानकों पर खरे उतरेंगे. इससे किसानों को बेहतर क्वालिटी वाले खाद और कीटनाशक मिलेंगे और फसल उत्पादन बेहतर होगा.
सरकार ने साफ किया है कि भारत सरकार की से बैन किसी भी कीटनाशक को नहीं बेचा जाएगा. इसके अलावा भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR), उत्तर प्रदेश गन्ना शोध परिषद और कृषि विश्वविद्यालयों के वैज्ञानिकों की ओर से जारी उर्वरकों, जैव उर्वरकों और फसल सुरक्षा उत्पादों को ही प्राथमिकता दी जाएगी. इससे किसानों को वैज्ञानिक सलाह के अनुसार बेहतर खाद और कीटनाशक मिल सकेंगे.
नई गाइडलाइन में किसानों के अधिकारों का भी खास ध्यान रखा गया है. अब किसी भी किसान को उसकी जरूरत और मंजूरी के बिना खाद, कीटनाशक या कोई अन्य कृषि सामग्री नहीं दी जाएगी. इसके अलावा, चीनी मिलें सिर्फ बिक्री बढ़ाने के लिए किसानों पर खाद या कीटनाशक खरीदने का दबाव नहीं बना सकेंगी. किसानों को उनकी जरूरत और गन्ने की खेती के क्षेत्रफल के हिसाब से ही खाद, कीटनाशक और अन्य कृषि सामग्री उपलब्ध कराई जाएगी.
सरकार ने साफ किया है कि किसानों को दी जाने वाली खाद, कीटनाशक और दूसरी कृषि सामग्री की पूरी जिम्मेदारी चीनी मिलों की होगी. चाहे मिल खुद इनका वितरण करे या किसी दूसरी एजेंसी के जरिए, गुणवत्ता और सभी नियमों का पालन करना मिल की जिम्मेदारी होगी. वहीं, जिला गन्ना अधिकारी और उप गन्ना आयुक्त समय-समय पर जांच करेंगे, ताकि किसानों को सही और अच्छी गुणवत्ता वाले उत्पाद मिल सकें.
अगर कोई चीनी मिल किसान की मंजूरी के बिना खाद, कीटनाशक या अन्य कृषि सामग्री देती है, या खराब क्वालिटी वाले उत्पाद बेचती है, तो उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई होगी. ऐसी स्थिति में किसानों के गन्ने के भुगतान से उस सामग्री का पैसा काटने की अनुमति तुरंत खत्म कर दी जाएगी. जरूरत पड़ने पर संबंधित चीनी मिल की बैंक गारंटी भी जब्त की जा सकती है.
सरकार ने यह भी तय किया है कि गन्ना और कृषि विभाग संयुक्त रूप से बाजार में बिक रहे कीटनाशकों की नियमित जांच करेंगे. साथ ही सोशल मीडिया या अन्य माध्यमों से भ्रामक प्रचार करने वाले विक्रेताओं के खिलाफ भी कीटनाशक अधिनियम, 1968 और संबंधित नियमों के तहत कानूनी कार्रवाई की जाएगी.
सरकार का कहना है कि इस नई व्यवस्था से किसानों को अच्छी क्वालिटी वाले खाद और कीटनाशक सही कीमत पर मिलेंगे. इससे खेती करना आसान होगा, फसल की पैदावार बढ़ेगी, मिट्टी की क्वालिटी बनी रहेगी और किसानों की आमदनी बढ़ाने में मदद मिलेगी. साथ ही इससे उत्तर प्रदेश के गन्ना और चीनी उद्योग को भी मजबूती मिलने की उम्मीद है.