
सूरजमुखी की खेती खरीफ सीजन के दौरान किसान धान, मक्का और सोयाबीन जैसी पारंपरिक फसलों के साथ अब तिलहन फसलों की खेती पर भी जोर दे रहे हैं. इनमें सूरजमुखी एक ऐसी फसल है, जिसकी मांग लगातार बढ़ रही है, क्योंकि भारत अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा आज भी सूरजमुखी तेल के आयात से पूरा करता है. बरसात के मौसम में यदि खेत में जल निकासी की अच्छी व्यवस्था हो और वैज्ञानिक तरीके अपनाए जाएं, तो सूरजमुखी की खेती किसानों के लिए अच्छा मुनाफा देने वाली साबित हो सकती है. ऐसे में अगर आप इस खरीफ सीजन सूरजमुखी की खेती करने की सोच रहे हैं और इसकी उन्नत किस्म KBSH-85 के बीज घर बैठे ऑनलाइन मंगवाना चाहते हैं, तो नीचे दी गई जानकारी आपके लिए है.
सूरजमुखी की खेती किसानों के लिए एक लाभदायक नकदी फसल का विकल्प बनती जा रही है. यही वजह है कि कई किसान पारंपरिक फसलों की जगह सूरजमुखी की खेती की ओर रुख कर रहे हैं. यदि आप भी इसकी खेती करना चाहते हैं, तो राष्ट्रीय बीज निगम (NSC) अपने ऑनलाइन स्टोर के माध्यम से सूरजमुखी की KBSH-85 हाइब्रिड किस्म के बीज उपलब्ध करा रहा है. किसान एनएससी की वेबसाइट से इन बीजों को ऑनलाइन ऑर्डर कर सीधे अपने घर मंगवा सकते हैं.

सूरजमुखी की संकर किस्म KBSH-85 मुख्य रूप से अपनी उच्च उपज और कम फसल अवधि के लिए जानी जाती है. यह किस्म पककर मात्र 90 से 100 दिनों में तैयार हो जाती है और प्रति हेक्टेयर औसतन 18.3 क्विंटल तक उपज देती है. इसके बीजों में तेल की मात्रा बहुत अच्छी होती है, जो लगभग 6.62 क्विंटल प्रति हेक्टेयर तक तेल की पैदावार देती है. यह हाइब्रिड किस्म सूखे का सामना करने में बेस्ट है. इसके तने मजबूत होते हैं और इसके फूल एक समान खिलते हैं. यह भारत के कई प्रमुख सूरजमुखी उत्पादक राज्यों जैसे गुजरात, महाराष्ट्र, कर्नाटक, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना और तमिलनाडु की जलवायु में अच्छे से उगाई जा सकती है.
यदि कीमत की बात करें तो फिलहाल राष्ट्रीय बीज निगम की वेबसाइट पर इसकी 1 किलोग्राम के बीज पैकेट 26 प्रतिशत की छूट के साथ लगभग 700 रुपये में मिल रहा है. इच्छुक किसान इसे ऑनलाइन खरीदकर आसानी से सूरजमुखी की खेती शुरू कर सकते हैं, और इस हाइब्रिड किस्म से बंपर उत्पादन लेकर अच्छी कमाई कर सकते हैं.
सूरजमुखी की अच्छी पैदावार के लिए सही मिट्टी और खेत की तैयारी बेहद जरूरी है. कृषि विशेषज्ञों के अनुसार इसकी खेती के लिए बलुई दोमट मिट्टी सबसे उपयुक्त मानी जाती है, जबकि मिट्टी का पीएच मान 6.5 से 8.5 के बीच होना चाहिए. बुवाई से पहले खेत की अच्छी तरह जुताई करके उसे पाटा लगाकर समतल कर लें. इसके अलावा खेत में जल निकासी की उचित व्यवस्था करना भी आवश्यक है, क्योंकि सूरजमुखी का पौधा जलभराव को बिल्कुल भी सहन नहीं कर पाता. सही किस्म, उचित खेत की तैयारी और वैज्ञानिक तरीके अपनाकर किसान सूरजमुखी की खेती से अच्छी उपज और बेहतर मुनाफा प्राप्त कर सकते हैं.
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