
देश को यूरिया उत्पादन में आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में केंद्र सरकार ने बड़ा कदम उठाया है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय कैबिनेट ने 'नेशनल इन्वेस्टमेंट पॉलिसी फॉर यूरिया-2026' (NIPU-2026) को मंजूरी दी है. नई नीति के तहत 8 से 9 नए गैस आधारित यूरिया प्लांट लगाए जाएंगे, जिनकी कुल क्षमता 1 करोड़ (10 मिलियन) टन सालाना होगी. 2012 की निवेश नीति के संशोधित रूप के तौर पर लाई गई इस पॉलिसी का उद्देश्य घरेलू निवेश बढ़ाना, आयात पर निर्भरता कम करना और किसानों को समय पर सस्ती दरों पर यूरिया उपलब्ध कराना है.
केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने बताया कि देश में यूरिया की मांग हर साल करीब 5 प्रतिशत की दर से बढ़ रही है. पिछले एक दशक में 12.7 लाख मीट्रिक टन वार्षिक क्षमता वाले छह नए यूरिया संयंत्र जोड़े गए हैं, लेकिन बढ़ती मांग को देखते हुए नई उत्पादन क्षमता की जरूरत बनी हुई है.
मंत्री ने बताया कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में 2018 के बाद से यूरिया की कीमतें 3 से 4 गुना तक बढ़ी हैं, इसके बावजूद किसानों को 45 किलो यूरिया का बैग 242 रुपये में उपलब्ध कराया जा रहा है. नई निवेश नीति का मकसद घरेलू उत्पादन बढ़ाकर किसानों को समय पर और किफायती दर पर यूरिया उपलब्ध कराना है.
केंद्रीय मंत्री ने पॉलिसी पर आगे बताते हुए कहा कि नई नीति के तहत सब्सिडी की गणना के लिए फिक्स्ड कॉस्ट और वैरिएबल कॉस्ट को अलग-अलग किया जाएगा. इससे उर्वरक परियोजनाओं की लागत का अधिक पारदर्शी आकलन हो सकेगा और निवेशकों के लिए स्पष्ट नीति ढांचा तैयार होगा.
सरकार ने नई यूरिया परियोजनाओं में निवेश को आकर्षित करने के लिए 12 से 16 प्रतिशत तक का सुनिश्चित रिटर्न (Assured Return) देने का प्रावधान किया है. इससे निजी और सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियों को नए संयंत्र स्थापित करने के लिए प्रोत्साहन मिलेगा.
नीति में विदेशी मुद्रा विनिमय जोखिम (Forex Risk Mitigation) को कम करने का भी प्रावधान किया गया है. इसके तहत डॉलर में होने वाली फिक्स्ड लागत को चार साल बाद रुपये में कन्वर्ट किया जाएगा, जिससे विनिमय दर (Exchange Rate) में उतार-चढ़ाव का असर कंपनियों और सरकार दोनों पर कम पड़ेगा.
नई नीति ग्रीनफील्ड और ब्राउनफील्ड दोनों तरह की यूरिया परियोजनाओं की फिक्स्ड लागत को तर्कसंगत बनाने पर जोर देती है. इससे नई इकाइयों की स्थापना के साथ-साथ मौजूदा संयंत्रों के विस्तार को भी बढ़ावा मिलेगा. सरकार का लक्ष्य घरेलू यूरिया उत्पादन बढ़ाकर आयात पर निर्भरता कम करना और मांग व उत्पादन के बीच के अंतर को पाटना है. इससे देश की उर्वरक सुरक्षा मजबूत होगी और वैश्विक आपूर्ति बाधित होने की स्थिति में भी किसानों को यूरिया उपलब्ध कराने में मदद मिलेगी.
मंत्री ने बताया कि इस पॉलिसी से हर नए प्लांट पर लगभग 250 करोड़ रुपये तक की बचत होने का अनुमान है. इससे प्रोजेक्ट की लागत कम होगी और निवेश ज्यादा व्यवहारिक बन सकेगा. नई नीति विनिमय दर (Exchange Rate) में उतार-चढ़ाव से सरकार पर पड़ने वाले वित्तीय बोझ को भी कम करेगी. इससे सब्सिडी प्रबंधन अधिक स्थिर और अनुमानित हो सकेगा.
सरकार का कहना है कि नेशनल इन्वेस्टमेंट पॉलिसी फॉर यूरिया-2026 घरेलू यूरिया उत्पादन क्षमता में नए निवेश को बढ़ावा देकर आत्मनिर्भर भारत अभियान को मजबूती देगी और दीर्घकाल में देश को उर्वरक क्षेत्र में अधिक आत्मनिर्भर बनाने में अहम भूमिका निभाएगी. यह नीति उर्वरक क्षेत्र में निवेश को बढ़ावा देने, प्राकृतिक गैस आधारित आधुनिक प्लांट को गति देने और वैश्विक आपूर्ति संकट या आयात संबंधी जोखिमों के बीच देश की खाद सुरक्षा को मजबूत करने में अहम भूमिका निभाएगी.
मालूम हो कि पश्चिम एशिया में ईरान-अमेरिका और इजरायल के बीच चल रहे युद्ध जैसे हालातों के चलते उपजे होर्मुज संकट के कारण दुनियाभर में खाद, प्राकृतिक गैस और अन्य व्यापार इससे प्रभावित हो रहे हैं, ऐसे में केंद्र सरकार ने पॉलिसी लेवल पर यह बड़ी पहल की है.