
कर्नाटक के पूर्व मुख्यमंत्री बसवराज बोम्मई ने मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार को पत्र लिखकर प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना (PMFBY) और पुनर्गठित मौसम आधारित फसल बीमा योजना (RWBCIS) के मौजूदा नियमों में तत्काल राहत देने की मांग की है. उन्होंने कहा कि हाल में लागू किए गए कुछ प्रावधान छोटे और सीमांत किसानों के लिए बड़ी परेशानी बन गए हैं. खासतौर पर सभी लोन वाले और गैर-लोन वाले किसानों के लिए अनिवार्य किए गए 'सेल्फ-डिक्लेरेशन लेटर' को लेकर उन्होंने गंभीर आपत्ति जताई है.
बसवराज बोम्मई ने अपने पत्र में फसल बीमा प्रक्रिया से जुड़ी 17 तकनीकी और प्रशासनिक कमियों का जिक्र किया है. उन्होंने कहा कि इन खामियों की वजह से जरूरतमंद किसान बीमा सुरक्षा से बाहर हो सकते हैं. उन्होंने कृषि आयुक्त और केंद्र सरकार के आधिकारिक पत्राचार का हवाला देते हुए कहा कि मौजूदा व्यवस्था किसानों के हितों की बजाय उनके लिए नई मुश्किलें खड़ी कर रही है.
पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि साइबर सेंटर संचालकों से ऑनलाइन आवेदन भरते समय होने वाली मामूली टाइपिंग गलतियों को भी 'फर्जी घोषणा' मान लिया जाता है. इसके आधार पर किसानों के बीमा दावे खारिज किए जा रहे हैं. उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि कई मामलों में बैंक समय पर लोन भुगतान की जानकारी अपने सिस्टम में अपडेट नहीं करते, लेकिन इसका खामियाजा किसानों को भुगतना पड़ता है और उन पर गलत जानकारी देने का आरोप लगा दिया जाता है.
बसवराज बोम्मई ने आरोप लगाया कि बीमा कंपनियां सत्यापन प्रक्रिया को फसल सीजन के अंत तक लंबा खींचती हैं और बाद में तकनीकी कारणों का हवाला देकर मुआवजा देने से इनकार कर देती हैं. उन्होंने संयुक्त खाता (जॉइंट खाता) से जुड़े मामलों पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि अगर परिवार के एक सदस्य पर कृषि लोन है तो उसी आधार पर अन्य संयुक्त खाताधारकों को गैर-ऋणी किसान मानने से इनकार किया जा रहा है, जिससे पात्र किसान भी बीमा लाभ से वंचित हो रहे हैं.
पूर्व सीएम ने पत्र में योजना की खामिया बताते हुए लिखा कि दो अलग-अलग बैंकों से कृषि लोन लेने वाले किसानों की समस्या, जमीन मालिक की मृत्यु के बाद खाता ट्रांसफर में देरी और मॉनसून प्रभावित परिस्थितियों में फसल बदलने पर उत्पन्न विवादों से भी किसानों के हित प्रभावित होने की आशंका है. बोम्मई ने कहा कि कम बारिश के कारण किसान अगर दूसरी फसल बोते हैं तो बीमा कंपनियां रिकॉर्ड में अंतर बताकर दावे नामंजूर कर देती हैं.
पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि बटाईदार किसानों और गांव से बाहर रहने वाले जमीन मालिकों को सेल्फ-डिक्लेरेशन फॉर्म पर जरूरी हस्ताक्षर कराने में भी कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है. इसके अलावा राष्ट्रीय फसल बीमा पोर्टल (NCIP) पर बार-बार सर्वर ठप होने और घोषणा पत्र में कानूनी कार्रवाई संबंधी चेतावनियों से भी किसानों में डर का माहौल बन रहा है.
बसवराज बोम्मई ने मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार से आग्रह किया कि फसल बीमा योजनाओं की प्रक्रिया को सरल बनाया जाए, ताकि पात्र किसान गैर-जरूरी तकनीकी बाधाओं के कारण बीमा सुरक्षा से वंचित न रहें. उन्होंने कहा कि अगर मौजूदा जटिलताएं दूर नहीं की गईं तो बड़ी संख्या में किसान फसल बीमा से दूरी बना सकते हैं, जिससे प्राकृतिक आपदाओं की स्थिति में उनकी आर्थिक सुरक्षा कमजोर पड़ जाएगी. (एएनआई)