नैनो उर्वरक से बदली किसान की किस्मत: कम लागत में बढ़ी पैदावार, बलौदाबाजार के शैलेंद्र बने किसानों के लिए मिसाल

नैनो उर्वरक से बदली किसान की किस्मत: कम लागत में बढ़ी पैदावार, बलौदाबाजार के शैलेंद्र बने किसानों के लिए मिसाल

छत्तीसगढ़ के बलौदाबाजार-भाटापारा जिले के प्रगतिशील किसान शैलेंद्र कुमार कन्नौजे ने नैनो यूरिया और नैनो डीएपी का उपयोग कर खेती में नई मिसाल पेश की है. नैनो उर्वरकों के इस्तेमाल से उनकी खेती की लागत घटी है, जबकि फसल उत्पादन में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है.

धर्मेंद्र सिंह
  • Raipur ,
  • Jun 03, 2026,
  • Updated Jun 03, 2026, 11:00 AM IST

छत्तीसगढ़ के बलौदाबाजार-भाटापारा जिले के ग्राम लटुवा के प्रगतिशील किसान शैलेंद्र कुमार कन्नौजे ने नैनो उर्वरकों का उपयोग कर खेती में सफलता की नई कहानी लिखी है. पिछले दो वर्षों से वे नैनो यूरिया और नैनो डीएपी का उपयोग कर रहे हैं, जिससे खेती की लागत में कमी आई है और उत्पादन में उल्लेखनीय बढ़ोतरी हुई है.

पारंपरिक खेती से आधुनिक तकनीक की ओर बढ़ाए कदम

शैलेंद्र कुमार बताते हैं कि खेती में बढ़ती लागत और पारंपरिक खाद की बोरियों को खेत तक पहुंचाने तथा उनके उपयोग में आने वाली कठिनाइयों ने उन्हें नई तकनीक अपनाने के लिए प्रेरित किया. कृषि विभाग की सलाह पर उन्होंने नैनो उर्वरकों का प्रयोग शुरू किया और इसके सकारात्मक परिणाम जल्द ही सामने आने लगे.

उनके अनुसार, नैनो उर्वरक न केवल पारंपरिक खाद की तुलना में कम कीमत पर उपलब्ध होते हैं, बल्कि इन्हें संभालना और खेत तक ले जाना भी बेहद आसान है. इससे किसानों के समय, श्रम और परिवहन खर्च में काफी बचत होती है.

छोटी बोतल, बड़ा फायदा

जहां पहले किसानों को खाद की भारी बोरियां ढोनी पड़ती थीं, वहीं अब आधा लीटर की छोटी बोतलों में उपलब्ध नैनो उर्वरक आसानी से खेत तक पहुंचाए जा सकते हैं. पानी में घोलकर फसलों पर छिड़काव करने से पौधों को आवश्यक पोषक तत्व सीधे और प्रभावी तरीके से मिलते हैं.

शैलेंद्र का कहना है कि इस तकनीक से खाद की बर्बादी कम होती है, फसलों की गुणवत्ता बेहतर होती है और प्रति एकड़ उत्पादन में भी वृद्धि देखने को मिली है. यही वजह है कि वे लगातार नैनो तकनीक पर भरोसा जता रहे हैं.

इस साल भी नैनो उर्वरकों का करेंगे उपयोग

नैनो उर्वरकों से मिली सफलता से उत्साहित शैलेंद्र कुमार ने इस वर्ष भी अपनी खेती में केवल नैनो यूरिया और नैनो डीएपी के उपयोग का निर्णय लिया है. उनका मानना है कि यह तकनीक किसानों को कम लागत में अधिक उत्पादन देने में सक्षम है और भविष्य की खेती का महत्वपूर्ण हिस्सा बनने जा रही है.

अन्य किसानों के लिए बने प्रेरणास्रोत

ग्राम लटुवा के शैलेंद्र कुमार की सफलता आज जिले के अन्य किसानों के लिए प्रेरणा बन चुकी है. जिला प्रशासन और कृषि विभाग भी उनकी उपलब्धि को मॉडल के रूप में प्रस्तुत कर किसानों को आधुनिक एवं वैज्ञानिक खेती अपनाने के लिए प्रोत्साहित कर रहे हैं.

नैनो उर्वरकों के माध्यम से शैलेंद्र ने यह साबित कर दिया है कि यदि किसान समय के साथ नई तकनीकों को अपनाएं, तो कम लागत में बेहतर उत्पादन और अधिक मुनाफा हासिल करना संभव है.उनकी सफलता की कहानी कृषि क्षेत्र में नवाचार और आत्मनिर्भरता की दिशा में एक महत्वपूर्ण उदाहरण बनकर उभरी है.

 

 

MORE NEWS

Read more!