
छत्तीसगढ़ में खरीफ सीजन 2026 की तैयारियों के बीच कृषि विभाग ने खादों की कालाबाजारी, अवैध भंडारण और वितरण में गड़बड़ियों पर शिकंजा कसना शुरू कर दिया है. किसानों को उचित दर पर गुणवत्तापूर्ण खाद उपलब्ध कराने के उद्देश्य से प्रदेश के विभिन्न जिलों में लगातार निरीक्षण अभियान चलाया जा रहा है. इसी कड़ी में कोरबा और जांजगीर-चांपा जिलों में शुक्रवार को की गई कार्रवाई में कई गड़बड़ियां सामने आई, जिसके बाद विभाग ने नोटिस जारी करने से लेकर विक्रय प्रतिबंध और प्रतिष्ठान सील करने तक की कार्रवाई की है.
कोरबा जिले में कृषि विभाग और जिला प्रशासन की संयुक्त टीम ने सहकारी और निजी खाद दुकानों का औचक निरीक्षण किया. जांच के दौरान कई प्रतिष्ठानों में रिकॉर्ड और बिक्री प्रक्रिया से जुड़ी गड़बड़ियां पाई गईं. विभाग ने छह दुकानों को कारण बताओ नोटिस जारी किया, जबकि एक प्रतिष्ठान पर बिक्री पर प्रतिबंध लगाया. निरीक्षण के दौरान सिरली क्षेत्र में एक निजी व्यापारिक प्रतिष्ठान से 56 बोरी यूरिया भी जब्त की गई.
कृषि विभाग के अनुसार, 1 अप्रैल 2026 से अब तक जिले के 115 सहकारी और निजी उर्वरक विक्रय केंद्रों का निरीक्षण किया जा चुका है. इस दौरान गड़बड़ी पाए जाने पर 28 दुकानों को नोटिस जारी किए गए हैं और पांच निजी प्रतिष्ठानों पर निर्धारित अवधि के लिए विक्रय प्रतिबंध लगाया गया है. विभाग ने कहा कि खरीफ सीजन के दौरान उर्वरकों की उपलब्धता और वितरण व्यवस्था पर विशेष निगरानी रखी जा रही है, ताकि किसानों को किसी प्रकार की परेशानी का सामना न करना पड़े.
दूसरी ओर जांजगीर-चांपा जिले में कृषि विभाग की टीम ने निजी कृषि केंद्रों पर छापामार कार्रवाई करते हुए बड़ी मात्रा में रासायनिक उर्वरक जब्त किए. निरीक्षण के दौरान एक थोक विक्रेता के यहां भंडारण और वितरण संबंधी गंभीर अनियमितताएं सामने आईं. इसके बाद विभिन्न श्रेणी के उर्वरकों की कुल 2306 बोरियों के विक्रय पर रोक लगाते हुए उन्हें जब्त कर लिया गया.
बलौदा विकासखंड के ग्राम पिसौद स्थित एक कृषि केंद्र में की गई जांच के दौरान उर्वरकों का अवैध भंडारण पाया गया. टीम ने मौके से 332 बोरी उर्वरक जब्त किए और संबंधित विक्रय केंद्र को सीलबंद कर दिया. विभाग ने साफ किया कि उर्वरक वितरण व्यवस्था में किसी भी प्रकार की लापरवाही या नियमों के उल्लंघन को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा. कृषि विभाग ने किसानों से खाद खरीदते समय पक्का बिल लेने की अपील की है. अधिकारियों का कहना है कि अगर कोई विक्रेता निर्धारित दर से अधिक कीमत वसूलता है या बिल देने से इनकार करता है तो इसकी सूचना तत्काल कृषि अधिकारियों को दें.