छत्तीसगढ़ की पारंपरिक धान किस्मों को आधुनिक विज्ञान से नई पहचान मिली है. इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय और भाभा परमाणु अनुसंधान केंद्र के सहयोग से लंबी धान किस्मों को बौना बनाया गया है. बौनी सफरी, जावा फूल और दुबराज जैसी किस्मों से फसल गिरने की समस्या कम हुई है और किसानों को बेहतर उत्पादन के साथ अधिक आमदनी का लाभ मिल रहा है.
छत्तीसगढ़ में कृषि विकास को नई रफ्तार मिली है। कृषक उन्नति योजना के तहत खरीफ 2023 से खरीफ 2025 तक 25.52 लाख किसानों को ₹35,892.90 करोड़ की सहायता दी गई.कृषि यंत्रीकरण, ड्रिप-स्प्रिंकलर सिंचाई, प्राकृतिक खेती, उद्यानिकी, पशुपालन और मत्स्य पालन में भी उल्लेखनीय प्रगति हुई है. 21 मंडियां e-NAM से जुड़ी हैं और कृषि अवसंरचना निधि में ₹3,026 करोड़ की उपलब्धि दर्ज की गई है.
छत्तीसगढ़ में खरीफ सीजन की बोनी ने रफ्तार पकड़ ली है.11 अगस्त तक प्रदेश में 45.62 लाख हेक्टेयर में बोनी पूरी हो चुकी है, जो लक्ष्य का 94% है. किसानों को अब तक 11.23 लाख मीट्रिक टन खाद और 4.55 लाख क्विंटल प्रमाणित बीज वितरित किया गया है. वहीं, किसानों को 7,487.46 करोड़ रुपये का अल्पकालीन कृषि ऋण भी दिया जा चुका है.
छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने नई दिल्ली में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात कर राजनांदगांव में प्रस्तावित करीब 10,500 करोड़ रुपये की गैस आधारित यूरिया परियोजना को जल्द मंजूरी देने का आग्रह किया.
छत्तीसगढ़ के रायपुर स्थित इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय के आर.एल. रिछारिया जैव विविधता संग्रहालय में देश का सबसे बड़ा धान जर्मप्लाज्म संग्रह मौजूद है.यहां 23,250 पारंपरिक धान किस्मों सहित कुल 30,875 फसल प्रजातियां संरक्षित हैं. संग्रहालय में सुगंधित, औषधीय और विलुप्त हो चुकी धान की दुर्लभ किस्में भी सुरक्षित रखी गई हैं.
छत्तीसगढ़ सरकार ने रायगढ़ जिले के 33,017 किसानों को 113.47 करोड़ रुपये की अग्रिम सहायता, खाद और बीज उपलब्ध कराए हैं.समय पर मिली इस मदद से खरीफ फसलों की बुवाई तेज हुई है और किसानों में बेहतर उत्पादन की उम्मीद बढ़ी है.
छत्तीसगढ़ के महासमुंद जिले में प्रगतिशील किसान हिमांशु बंजारे ने ढैंचा की हरी खाद अपनाकर प्राकृतिक खेती का सफल उदाहरण पेश किया है.ढैंचा मिट्टी में प्राकृतिक नाइट्रोजन बढ़ाकर उर्वरता सुधारता है, रासायनिक खाद की जरूरत कम करता है और खेती की लागत घटाने में मदद करता है.
छत्तीसगढ़ के धमतरी जिले में मंत्री रामविचार नेताम ने 29 एकड़ में हो रही सफल मखाना खेती का निरीक्षण किया। उन्होंने कहा कि मखाना खेती किसानों की आय बढ़ाने के साथ महिलाओं के लिए रोजगार और आत्मनिर्भरता का मजबूत माध्यम बनेगी। साथ ही प्रसंस्करण, ब्रांडिंग और विपणन को सशक्त बनाने के निर्देश दिए
खरीफ सीजन में उर्वरकों की कालाबाजारी और अवैध बिक्री पर रोक लगाने के लिए कृषि विभाग ने बिलासपुर जिले में बड़ी कार्रवाई करते हुए 12.65 टन यूरिया और सुपर फॉस्फेट उर्वरक की बिक्री पर रोक लगा दी.बिना प्राधिकार पत्र खाद बेचने के मामले में विक्रेता को नोटिस जारी किया गया है और लाइसेंस निलंबन की चेतावनी दी गई है.
बालोद जिले में खरीफ 2026-27 के लिए हल्दी और अदरक की खेती को बढ़ावा देने हेतु उद्यानिकी विभाग किसानों को 49,800 रुपये तक का अनुदान देगा. योजना का लाभ ‘पहले आओ-पहले पाओ’ के आधार पर मिलेगा.
खरीफ सीजन में उर्वरक कालाबाजारी पर बेमेतरा प्रशासन की बड़ी कार्रवाई. देवकर तहसील के ग्राम गाड़ाडीह में अवैध रूप से भंडारित 585 बोरी उर्वरक जब्त कर गोदाम सील किया गया. जब्त खाद के नमूने जांच के लिए लैब भेजे गए हैं.प्रशासन ने चेतावनी दी है कि जमाखोरी और कालाबाजारी करने वालों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी
रायगढ़ जिले के पुसौर में खाद की कालाबाजारी और स्टॉक में गड़बड़ी के खिलाफ प्रशासन ने बड़ी कार्रवाई की है.जांच के दौरान एक खाद दुकान से 9 टन यूरिया जब्त किया गया, जबकि दूसरी दुकान पर 21 दिनों तक उर्वरक बिक्री पर प्रतिबंध लगाया गया. प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि किसानों के हितों के साथ खिलवाड़ करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई जारी रहेगी.
बीजापुर जिले को केंद्र सरकार की एफएफएस (Framework for Fertilizer Sale) योजना के तहत पायलट प्रोजेक्ट के रूप में चुना गया है.नई डिजिटल व्यवस्था में किसान मोबाइल ऐप से यूरिया, डीएपी सहित अन्य उर्वरकों की एडवांस बुकिंग कर सकेंगे और ई-टोकन के जरिए खाद प्राप्त करेंगे. इससे लंबी कतारों, कालाबाजारी और वितरण संबंधी अनियमितताओं पर रोक लगेगी तथा किसानों को समय पर खाद उपलब्ध हो सकेगी.
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