90 दिन में तैयार, कम लागत में ज्यादा मुनाफा... जानिए किसानों के लिए क्यों फायदेमंद है तोरिया की खेती

90 दिन में तैयार, कम लागत में ज्यादा मुनाफा... जानिए किसानों के लिए क्यों फायदेमंद है तोरिया की खेती

तोरिया एक कम अवधि वाली तिलहनी फसल है जो लगभग 90 दिनों में तैयार हो जाती है. कम लागत, कम सिंचाई और बेहतर मुनाफे के कारण यह किसानों के लिए लाभकारी विकल्प मानी जाती है. खरीफ और रबी सीजन के बीच इसकी खेती कर किसान अतिरिक्त आय प्राप्त कर सकते हैं. तोरिया के दानों में 41 से 43 प्रतिशत तक तेल पाया जाता है और फसल चक्र में शामिल करने से मिट्टी की उर्वरता भी बढ़ती है. उत्तर प्रदेश कृषि विभाग किसानों को तोरिया की खेती अपनाने के लिए प्रोत्साहित कर रहा है.

सरसों और सब्जियों पर पाले की मारसरसों और सब्जियों पर पाले की मार
क‍िसान तक
  • New Delhi,
  • Sep 17, 2026,
  • Updated Sep 17, 2026, 6:51 PM IST

खरीफ फसलों की कटाई के बाद किसानों के सामने सबसे बड़ा सवाल होता है कि कम समय में कौन सी फसल लगाई जाए, जिससे अच्छी कमाई भी हो और रबी सीजन की मुख्य फसलों की बुवाई में भी देरी न हो. ऐसे में तोरिया की खेती किसानों के लिए एक बेहतर विकल्प साबित हो सकती है. उत्तर प्रदेश कृषि विभाग भी किसानों को तोरिया की खेती अपनाने के लिए प्रोत्साहित कर रहा है.

तोरिया सरसों वर्ग की एक तिलहनी फसल है, जिसकी खेती कम समय, कम लागत और कम सिंचाई में की जा सकती है. यही वजह है कि इसे खरीफ और रबी सीजन के बीच की एक बेहतरीन फसल माना जाता है. कृषि विभाग के अनुसार, तोरिया की फसल करीब 90 दिनों में तैयार हो जाती है, जिससे किसान मुख्य रबी फसल बोने से पहले अतिरिक्त आमदनी हासिल कर सकते हैं.

90 दिन में तैयार हो जाती है फसल

तोरिया की सबसे बड़ी विशेषता इसकी कम अवधि है. यह फसल लगभग तीन महीने में तैयार हो जाती है. सितंबर के पहले सप्ताह में बुवाई करने पर किसान नवंबर तक इसकी कटाई कर सकते हैं. इसके बाद खेत में गेहूं, आलू, सरसों या अन्य रबी फसलों की बुवाई आसानी से की जा सकती है.

किसानों को मिलता है अतिरिक्त मुनाफा

तोरिया को बोनस फसल के रूप में भी देखा जाता है. धान, मक्का या अन्य खरीफ फसलों के बाद किसान खाली पड़े खेतों में इसकी खेती कर सकते हैं. इससे मुख्य फसल के अलावा एक अतिरिक्त आय का स्रोत तैयार होता है. कम समय में तैयार होने के कारण बाजार में इसकी बिक्री से किसानों को अतिरिक्त कमाई का अवसर मिलता है.

कम लागत में होती है खेती

तोरिया की खेती में अन्य कई फसलों की तुलना में कम खर्च आता है. इसमें बीज, उर्वरक और सिंचाई की जरूरत अपेक्षाकृत कम होती है. कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि कम निवेश के बावजूद इसकी अच्छी पैदावार किसानों को बेहतर लाभ दिला सकती है.

कम पानी में भी अच्छा उत्पादन

ऐसे क्षेत्रों में जहां पानी की कमी रहती है, वहां भी तोरिया की खेती की जा सकती है. इस फसल को ज्यादा सिंचाई की जरूरत नहीं होती. कम पानी में भी इसकी अच्छी बढ़वार और उत्पादन संभव है. यही कारण है कि जल संकट वाले इलाकों के किसानों के लिए भी यह लाभकारी विकल्प माना जाता है.

तेल उत्पादन में है महत्वपूर्ण फसल

तोरिया के दानों में लगभग 41 से 43 प्रतिशत तक तेल पाया जाता है. देश में खाद्य तेलों की बढ़ती मांग को देखते हुए इसकी खेती का महत्व बढ़ रहा है. तेल निकालने के अलावा इसके खली का उपयोग पशु आहार के रूप में भी किया जाता है.

किसानों के लिए क्यों बेहतर विकल्प?

  • करीब 90 दिन में तैयार होती है फसल
  • कम लागत और कम जोखिम वाली खेती
  • कम पानी में भी अच्छा उत्पादन
  • 41-43 फीसदी तक तेल की उपलब्धता
  • रबी फसल से पहले अतिरिक्त कमाई का मौका
  • फसल चक्र अपनाने और मिट्टी की उर्वरता बढ़ाने में मददगार

फसल चक्र और मिट्टी के लिए फायदेमंद

कृषि वैज्ञानिकों के अनुसार तोरिया को फसल चक्र में शामिल करने से मिट्टी की उर्वरता बनाए रखने में मदद मिलती है. इससे खेत की उत्पादकता में सुधार होता है और अगली फसलों पर सकारात्मक प्रभाव पड़ता है. किसान यदि फसल विविधीकरण अपनाते हैं तो तोरिया उनके लिए एक अच्छा विकल्प बन सकती है.

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